Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    लेम्बोर्गिनी कांड-अरबपति कारोबारी का बेटा गिरफ्तार:VIDEO बनाने पर भड़का; पिता की बचाने की कोशिशें नाकाम, नकली ड्राइवर तक पेश किया

    11 hours ago

    1

    0

    कानपुर में तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी से 6 लोगों को टक्कर मारने वाला अरबपति कारोबारी का बेटा आखिरकार गिरफ्तार हो गया। तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा ने अपने बेटे को बचाने की तमाम कोशिशें कीं, लेकिन नाकाम रहीं। पहले घटनास्थल से बेटे को हटवाया, फिर कहा कि मेरा बेटा गाड़ी नहीं चला रहा था। पुलिस को मैनेज करने की कोशिश की गई, लेकिन मामला सीएम योगी तक पहुंच गया। जब यह पैतरा एक्सपोज हो गया तो पुलिस कमिश्नर को ही झूठा करार दिया। फिर अचानक मंगलवार को कोर्ट में नकली ड्राइवर को सरेंडर करवा दिया। हालांकि, कोर्ट ने ड्राइवर मोहन की अर्जी खारिज कर दी और उसे आरोपी नहीं माना। पुलिस का कहना है कि शिवम को आर्यनगर में घर के सामने से गिरफ्तार किया गया। इस दौरान आरोपी बीमार नजर आया। पुलिसवाले उसे सहारा देते नजर आए। उसका मेडिकल कराने के बाद AJCM कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान वीडियो बनाने पर मीडिया कर्मी पर भड़क गया। इशारों में कहा कि वीडियो मत बनाओ। शिवम को बचाने की क्या कोशिशें हुईं, जो नाकाम रहीं, 5 पॉइंट में पढ़िए— 1- VIP ट्रीटमेंट दिया, फिर FIR में नाम जोड़ा कानपुर के वीआईपी रोड पर 8 फरवरी को तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी ने 6 लोगों को घायल कर दिया। यह कार आर्यनगर में रहने वाले तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा की है। हादसे के बाद रसूखदार परिवार के आगे पहले तो पुलिस सरेंडर हो गई और लेम्बोर्गिनी कार को थाने में वीआईपी ट्रीटमेंट दिया गया। कार को वहां खड़ा किया गया, जहां थानेदार की कार खड़ी होती है। उसे कवर से ढक दिया गया। रखवाली के लिए बाउंसर खड़े किए गए। पहले तो पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की। सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने के बाद पुलिस ने रात 8:30 बजे कार नंबर के आधार पर अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज की। बाद में अखिलेश यादव ने ट्वीट कर इस मामले को सियासी तूल दिया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने पूरे मामले में कार्रवाई के आदेश दिए। इसके बाद पुलिस ने 24 घंटे बाद कार चला रहे शिवम मिश्रा का नाम जांच में जोड़ दिया। 2- कमिश्नर के दावे पर कारोबारी ने कहा- झूठ बोल रहे हैं 10 फरवरी को कानपुर कमिश्नर रघुबीर लाल सामने आए। उन्होंने कहा कि जांच में सामने आया है कि शिवम मिश्रा ही गाड़ी चला रहा था, इसलिए FIR में उसका नाम जोड़ा गया है। अगले दिन कारोबारी पिता केके मिश्रा ग्वालटोली थाने पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि हादसे के वक्त बेटा शिवम नहीं, बल्कि ड्राइवर मोहन लेम्बोर्गिनी चला रहा था। शिवम उस वक्त सो रहा था। हादसे के बाद कार लॉक हो गई थी, जिससे बेटे की तबीयत बिगड़ गई। ठीक होने पर बेटे को लेकर मैं खुद थाने आऊंगा। 3- FIR कराने वाले से समझौते की खबर आई, पुलिस ने नकारा 11 फरवरी को इस केस में बड़ा यू-टर्न हुआ। घायल और मुकदमा दर्ज कराने वाले वादी मो. तौसीफ ने ड्राइवर के साथ समझौता कर लिया। कारोबारी के बेटे के वकील धर्मेंद्र सिंह ने कोर्ट में जो समझौतानामा पेश किया, उसमें तौसीफ की ओर से कहा गया कि इलाज का खर्च दे दिया गया है। इस वजह से वह पूरी तरह संतुष्ट है और इस केस में कोई कार्रवाई नहीं चाहता। यह आपसी समझौता बिना किसी दबाव के किया गया है। हादसे के वक्त गाड़ी मोहन ही चला रहा था। हालांकि, DCP सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने इस बात से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पुलिस के पास किसी तरह का कोई समझौतानामा नहीं आया है। 4- अचानक कारोबारी का ड्राइवर कोर्ट पहुंचा, बोला- कार मैं ही चला रहा था बुधवार दोपहर तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के कथित ड्राइवर मोहन अचानक कानपुर कोर्ट पहुंचा और सरेंडर कर दिया। वह अपने वकील नरेंद्र कुमार यादव के साथ कोर्ट पहुंचा। मोहन ने कहा कि शिवम मिश्रा की गाड़ी वही चला रहा था। शिवम को दौरा पड़ गया था। उस वक्त वह घबरा गया और उसे कुछ समझ नहीं आया। तभी हादसा हो गया। जब शीशा तोड़ा गया और दरवाजा खोला गया, तो वह नीचे से निकल गया था। बाउंसर ने शिवम को बाहर निकाला। हादसे के बाद वह एक कोने में खड़ा हो गया था। शिवम को दूसरी गाड़ी में ले जाया गया था। 5- कोर्ट ने ड्राइवर की याचिका खारिज की, आरोपी नहीं माना हालांकि, कोर्ट ने ड्राइवर मोहन की अर्जी खारिज कर दी और उसे आरोपी नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट में आरोपी शिवम है, मोहन का कहीं नाम नहीं है। जब मोहन से पूछा गया कि इस कार में कितने गियर होते हैं, तो उसने बताया कि 9 गियर होते हैं, जबकि एक्सपर्ट से बात करने पर सामने आया कि इस कार में 7 गियर और एक बैक गियर, यानी कुल 8 गियर होते हैं। इससे साफ हो गया कि वह झूठ बोल रहा था। लेम्बोर्गिनी केस से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए-
    Click here to Read more
    Prev Article
    बांग्लादेश में वोटिंग जारी, BNP और जमात में मुकाबला:12 करोड़ वोटर्स से यूनुस बोले- आज का दिन आजादी जैसा, नया बांग्लादेश बनाने का मौका
    Next Article
    'मैं ठाकुर हूं' कहने वाली आस्था बोलीं-सुसाइड कर लेना चाहिए:मेरे चरित्र पर ऋतु त्रिपाठी ने दाग लगाया, मुझे डीफेम किया; कानपुर पुलिस से शिकायत

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment