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    मां ने 3 साल की बेटी की गर्दन काट दी:गोरखपुर में पिता बोले- वो कहती, मुझे नहीं, बेटी को प्यार करते हो

    2 hours ago

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    गोरखपुर में मां ने 3 साल की मासूम बेटी की गर्दन कुल्हाड़ी से काट दी। कमरे में जिस जगह पर वार किया, वहां जमीन पर 4 इंच का गड्‌ढा हो गया है। दीवार पर बनी अलमारी में पूजा घर है, भगवान की तस्वीरों पर बच्ची के खून के छींटे दिख रहे थे। घर के कोने में बेटी अदिति के खिलौने देखकर मायूस हो रहे पिता त्रिवेणी खुद को कोस रहे थे- बेटी मेरी वजह से मर गई। मैं दूसरी शादी नहीं करता, तो बेटी जिंदा होती। वो बेटी से चिढ़ती थी, उसकी टॉफियां खा जाती थी, इसलिए मैंने डांटा था… क्या पता था कि वो बेटी को ही मार डालेगी। वह आगे कहते हैं- बेटी की गर्दन पर रस्सी कस दी, 4 बार कुल्हाड़ी से गर्दन पर वार किए। बेटी की गर्दन कटकर अलग हो गई। जब बेटी 6 महीने की थी, उसकी बीमार मां की मौत हो गई थी। परिवार के दबाव में मैंने दूसरी शादी पूजा से की। वो मेरी बेटी से चिढ़ती थी, कहती कि तुम मुझे नहीं, अपनी बेटी को ही चाहते हो। शादी के सिर्फ 25 दिन के अंदर ही उसने मेरी बेटी को मार डाला। एक मां ने बेटी को किन हालात में मार डाला? फिर उस मां के साथ गांव के लोगों ने क्या किया? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम पिपराइच के गांव बिजहरा में पहुंची। पढ़िए रिपोर्ट… गांव का माहौल रिश्तेदार परिवार को संभाल रहे, पिता खिलौने देखकर रो रहे गांव में त्रिवेणी मौर्य के घर के बाहर महिलाएं बैठी दिखीं। कुछ महिलाएं रो रही थीं, रिश्तेदार महिलाएं उन्हें संभालती दिखीं। गांव के जो पुरुष वहां पर मौजूद थे, उन्होंने महिलाओं से बात करने से मना किया। घर के बाहर ही बरादमे के एक कोने में त्रिवेणी मौर्य बैठे दिखे। चेहरे पर उदासी थी, हाथ में बेटी अदिति का खिलौना था। वह लगातार उस खिलौने को पलट-पलटकर देखे जा रहे थे। आंख में आंसू थे, लोग उन्हें समझा रहे थे कि हिम्मत रखिए, आपकी क्या गलती है? त्रिवेणी कहते हैं- मैं पूजा से दूसरी शादी नहीं करता, कोई जरूरत भी नहीं थी। कम से कम मेरी फूल जैसी बेटी जिंदा होती। मैं सोचता था कि पूजा बेटी को मां जैसा प्यार देगी, उसकी अच्छी परवरिश करेगी। मगर उसने तो बेटी को मार ही डाला। जहां गर्दन काटी, वहां बच्ची का ताबीज कटा हुआ मिला घर में मौजूद रिश्तेदार हमें घर के अंदर लेकर गए। बाहर के बरामदे में टीन शेड था, अंदर जाने के लिए सिर झुकाकर ही जाना पड़ा। अंदर बने कमरे के दरवाजे खुले तो सामने जमीन पर खून बिखरा दिखा। खून के पास बेड लगा हुआ था। दीवार की अलमारी में मंदिर बना हुआ था। इसमें कई भगवानों की तस्वीरें लगी थीं। बच्ची की गर्दन कटने के बाद मंदिर में लगी सभी भगवान की मूर्तियों पर खून के छीटे पड़े हुए थे। वहीं जिस जगह गर्दन काटी गई। वहां जमीन में 4 इंच तक गड्‌ढा हो गया था। जमीन पर ही एक खून से सनी पतली रस्सी गिरी थी। ठीक बगल में बच्ची की ताबीज भी कटकर गिरी हुई थी। ये सीन देखकर हम बाहर आ गए। हत्या की रात क्या हुआ, ये पढ़िए… आधी रात पूजा घर से बाहर निकल गई, मैंने पूछा तो उसने घूरकर देखा अब पिता त्रिवेणी से कहा कि उस रात क्या हुआ था, थोड़ा समझा दें। त्रिवेणी कहते हैं- रात के करीब 12 बजे थे, सब लोग सो गए थे। मुझे बाथरूम जाना था, इसलिए मोबाइल की टार्च जलाकर घर के बाहर तक आया। इसी दौरान एक परिचित का कॉल आ गया। मैं घर के बाहर ही टहलते हुए बात करने लगा। तभी रात के अंधेरे में मुझे मेरे घर से एक साया तेजी से बाहर निकलते हुए दिखा, मैंने आवाज दी। तब पता चला कि ये तो मेरी पत्नी पूजा है…। उसके हाथ में एक बैग था। मैंने पूछा- कहां जा रही हो? वह बोली कुछ नहीं…बस घूरकर मेरी तरफ देखा, फिर तेजी से एक तरफ चली गई। बेटी की गर्दन पूरी अलग कर दी, कोई मां कैसे कर सकती है पिता बोले- मैं अंदर से डर गया। दौड़ता हुआ घर के अंदर आया। यहां कमरे में खून ही खून था। बेटी बेसुध और लहूलुहान जमीन पर पड़ी थी। उसकी गर्दन धड़ से अलग थी। तब मुझे पूजा की करतूत का पता चला। मैं बाहर आकर चिल्लाने लगा, गांव के लोग दौड़कर आ गए। मैंने उन्हें बताया कि बर्बाद हो गया हूं, मेरी पत्नी ने ही बेटी को मार डाला। गुस्साएं गांव के लोग पूजा को ढूंढने लगे। वो ज्यादा दूर नहीं जा सकी थी, कुस्मही के जंगल के पास लोगों ने उसको घेर लिया। वो भागने की कोशिश कर रही थी, इसलिए उसके हाथ-पैर बांध दिए। पिपराइच पुलिस को इस बारे में जानकारी दी। पूजा ने कबूल कर लिया कि उसने ही मेरी बेटी को मार डाला था। वो कहती थी- त्रिवेणी मुझे नहीं, बेटी को ज्यादा प्यार करते थे, मैं कब तक सहती। दूसरी शादी क्यों करनी पड़ी, ये जानिए बेटी को जन्म देने के 6 महीने बाद पत्नी की मौत हमने पूछा- आपको दूसरी शादी क्यों करनी पड़ी? त्रिवेणी कहते हैं- मेरी पहली शादी 12 जुलाई, 2012 को लक्ष्मी देवी से हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद से ही वह बीमार रहने लगी। 16 अप्रैल, 2023 को अदिति का जन्म हुआ। इसके 6 महीने बाद 30 अक्टूबर को लक्ष्मी की मौत हो गई। उस समय अदिति बहुत छोटी थी। मैं बहुत परेशान रहने लगा था। मैं एक राजमिस्त्री हूं। बच्ची की वजह से काम पर नहीं जा पा रहा था। तब बच्ची को पालने के लिए उसके मामा के घर भेज दिया। परिवार में एक बड़ा भाई है, वह मुझसे अलग दूसरे घर में रहता है। बार-बार बच्ची से मिलने पहली पत्नी के घर जाना पड़ता था। बच्ची दूर होती चली जा रही थी, इसलिए सभी लोगों ने समझाया कि दूसरी शादी कर लो, बेटी को नई मां मिल जाएगी। घर में भी चहल पहल हो जाएगी। अभी सूना-सूना लगता है। कुछ दिन बाद ही बेटी खटकने लगी, कहती- तुम उसे ही चाहते हो इसके बाद सहजनवां की रानूखोर की रहने वाली 35 साल की पूजा से शादी तय हुई। मैंने उससे पूछा- मेरी बेटी का ख्याल रख लोगी? तब पूजा ने कहा था- बच्ची को मैं संभाल लूंगी। 30 जनवरी को कुस्मही इलाके के ही एक मंदिर में धूमधाम से शादी हुई। इस दौरान मेरे और पूजा के परिवार से करीब 200 लोग इकट्‌ठा हुए। शादी के बाद पूजा उसी दिन शाम को मेरे घर आ गई। उसके आने के बाद बेटी को मैं उसके मामा के घर से ले आया। बेटी पहले दिन पूजा को पाकर उसके गले लग गई। मुझे लगा, अब सब ठीक हो जाएगा। मेरा बिखरा घर एक बार फिर संवर जाएगा। शादी के बाद से ही मैं काम पर नहीं जा रहा था। बच्ची को लेकर गांव में घुमता रहता था। घर में भी बच्ची मेरे साथ रहती थी। काफी दिनों बाद मेरी बच्ची घर आई थी, इसलिए उसे छोड़ना नहीं चाह रहा था। लेकिन यह बातें पूजा को बुरी लगने लगी थी। मुझे पहले तो इसका पता नहीं चला। जब मैं अदिति के लिए टॉफी चॉकलेट लाकर रखता था तो उसे पूजा खा जाती थी। मुझे पता चला तो 3-4 दिन पहले उसे डांट फटकार लगाई। तब उसने कहा कि दिन भर तुम बच्ची के साथ रहते हो, मेरी चिंता नहीं है। तब मुझे लगा कि पूजा अदिति को पसंद नहीं कर रही है। लेकिन कभी ये नहीं लगा कि पूजा मेरी बेटी की जान ले लेगी। गांव के लोगों ने ही पूजा को ढूंढ निकाला त्रिवेणी के घर के बगल में रहने वाले सुरेंद्र चौहान कहते हैं- उस रात करीब 12:30 बजे चिल्लाने की आवाज आई। हमलोग घर से बाहर निकले। देखा त्रिवेणी बदहवास दौड़ भाग रहे हैं। उनसे कारण पूछा तो बोले कि मेरी पत्नी ने बेटी का गला काटकर मार दिया। हम दौड़कर अंदर कमरे में गए तो देखा अदिति खून से सनी पड़ी हुई है। इसके बाद गांव के सभी लोग मिलकर त्रिवेणी की पत्नी को ढूंढना शुरू किए। इधर-उधर ढूंढने पर नहीं मिली, तब हम लोग गाड़ी लेकर उसे खोजने निकले। थोड़ी देर बाद वह कुस्मही जंगल के पास मिली। इसके बाद गांव के लोगों ने उसको पकड़कर हाथ और पैर बांध दिए। भांजी बोली- किसी से बात नहीं करती थीं मामी त्रिवेणी की भांजी सीमा कहती हैं- पूजा मामी हमेशा घर के अंदर रहती थीं। वह किसी से कुछ बोलती नहीं थीं। कई बार बोलने पर अंदर से ही जवाब देकर बैठ जाती थी, लेकिन कभी हम लोगों से बात नहीं करती थीं। उनका व्यवहार शुरू से ही अजीब था 16 अप्रैल को बर्थडे मनाने की थी तैयारी त्रिवेणी मौर्य ने बताया- 16 अप्रैल को अदिति का बर्थडे था। इस बार सोचा था कि परिवार पूरा हो गया है। धूमधाम से बच्ची का बर्थडे मनाउंगा। रिश्तेदारों को भी कॉल कर दावत दे रहा था। लेकिन पूजा ने मेरी सारी खुशी एक पल में छीन ली। अब पुलिस की जांच जानिए आरोपी मां हिरासत में, ज्यादातर सवालों के जवाब नहीं दे रही CO चौरी चौरा रत्नेश्वर सिंह कहते हैं- देर रात गांव के लोगों ने ही बताया कि एक बच्ची की उसकी सौतेली मां ने हत्या कर दी। पुलिस ने उस महिला को हिरासत में ले लिया। उससे बेटी को मारने की वजह पूछी गई, वो ज्यादातर सवालों पर खामोश रही है। हत्या में इस्तेमाल कुल्हाड़ी को हमने बरामद कर लिया है। ……………… ये पढ़ें - शंकराचार्य के समर्थन में कांग्रेसियों का हल्ला-बोल, पुलिस से धक्का-मुक्की:आगरा में बोले- सरकार परमाणु बम से छेड़छाड़ कर रही शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में कांग्रेस सड़कों पर उतर आई है। काशी, आगरा समेत यूपी के कई शहरों में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। शंखनाद कर सरकार को चेतावनी दी। कई जगह पुलिस से धक्का-मुक्की भी हुई। आगरा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शंकराचार्य के पोस्टर लहराए, जबकि लखनऊ में प्रदर्शन कर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। मेरठ, बुलंदशहर, गोरखपुर और ललितपुर में भी कांग्रेसियों ने जमकर नारेबाजी की। पढ़िए पूरी खबर…
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