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    मोबाइल-चिप्स की जिद ने बदला मासूमों का मिजाज:3 से 5 साल के बच्चों को आ रहा गुस्सा, मामूली बात पर आक्रामक भी हो रहे

    4 hours ago

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    कानपुर शहर में अब नन्हे बच्चों का व्यवहार माता-पिता के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है। तीन से पांच साल की उम्र के बच्चे मोबाइल, चिप्स और चॉकलेट जैसी चीजें न मिलने पर गुस्से में आकर न सिर्फ नाराजगी जता रहे हैं, बल्कि कई मामलों में परिजनों पर हाथ भी उठा रहे हैं। चुन्नीगंज स्थित मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र में बीते एक साल में ऐसे एक दर्जन से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। अभिभावकों की हो रही काउंसिलिंग अपने बच्चों के इस बदलते व्यवहार से परेशान माता-पिता अब मनोवैज्ञानिकों की शरण ले रहे हैं। खास बात यह है कि यहां बच्चों से ज्यादा उनके अभिभावकों की काउंसिलिंग की जा रही है।मनोवैज्ञानिक संध्या शुक्ला ने बताया कि बच्चे वही सीखते हैं जो वे घर में देखते हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में माता-पिता बच्चों को शांत रखने के लिए उन्हें मोबाइल थमा देते हैं। लेकिन जब काम खत्म होने पर अचानक मोबाइल छीन लिया जाता है, तो बच्चे इसे स्वीकार नहीं कर पाते और गुस्से में प्रतिक्रिया देते हैं। खाना खाते समय मोबाइल देखना खतरनाक उन्होंने बताया कि खाना खाते समय मोबाइल देखने की आदत भी बच्चों के मानसिक और व्यवहारिक विकास पर नकारात्मक असर डाल रही है। यही वजह है कि काउंसिलिंग के दौरान अभिभावकों को बच्चों के साथ व्यवहार के सही तरीके सिखाए जा रहे हैं। बच्चा हाथ उठाए तो उसको मारे नहीं मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यदि बच्चा गुस्से में हाथ उठाता है, तो अभिभावकों को उसे मारना नहीं चाहिए। ऐसा करने पर बच्चा इसे खेल समझ सकता है और उसकी आदत बन सकती है। इसके बजाय सख्त और गंभीर भाव से उसे समझाना अधिक प्रभावी होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों को समय देना, उनकी दिनचर्या में संतुलन बनाना और मोबाइल के इस्तेमाल को सीमित करना बेहद जरूरी है। वरना छोटी-सी जिद आगे चलकर बड़े व्यवहारिक संकट का रूप ले सकती है।
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