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    मंडलीय अस्पताल के बर्न वार्ड से आ रही बदबू:मरीजों को बाहर से लानी पड़ रही पट्टी; ड्रेसिंग के लिए खुले रास्ते से जाना पड़ता है ओटी

    1 day ago

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    दिवाली को लेकर जहां काशी के सभी अस्पतालों को अलर्ट किया गया है, वहीं मंडलीय अस्पताल के बर्न वार्ड की हालत खस्ता है। वार्ड से दूर तक बदबू आ रही है। यहां भर्ती मरीजों की ड्रेसिंग के लिए उन्हें वार्ड से ओटी तक ले जाने की जिम्मेदारी भी परिजनों को उठानी पड़ रही है। वार्ड नंबर-2 में 8 बेड हैं, जिनमें 4 मरीज भर्ती हैं। वार्ड में दो एसी लगे हैं, लेकिन दोनों काम नहीं कर रहे हैं। मरीजों के लिए पंखे लगाए गए हैं। मरीजों के लिए पट्टी, साफ-सफाई में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां और ग्लव्स भी तीमारदारों को बाहर से लाने पड़ रहे हैं। वार्ड में भर्ती एक महिला के पति ने बताया कि उनकी पत्नी 17 अक्टूबर को यहां भर्ती हुई थीं। उनकी तीन महीने की बेटी है। पति के दोनों पैर टूटे हैं, लेकिन स्टाफ को उन पर भी दया नहीं आती। उन्हें अपनी पत्नी की पट्टी खुद बदलनी पड़ती है। सुबह ड्रेसिंग के लिए पत्नी को व्हीलचेयर पर ओटी तक ले जाना पड़ता है। वहां भी एक घंटे तक इंतजार करने के बाद पट्टी बदली जाती है। उनका आरोप है कि स्टाफ जिम्मेदारी लेने से मना कर देता है। 18,750 रुपए की पट्टी खरीदी मरीज के पति के मुताबिक, डॉक्टर की ओर से लिखी गई पट्टी बाहर से करीब 18,750 रुपए में खरीदनी पड़ी। बाद में आयुष्मान कार्ड से पट्टी मिली, लेकिन उनका आरोप है कि उसमें से बहुत थोड़ी मात्रा ही इस्तेमाल के लिए दी गई। बाकी पट्टी अस्पताल में रख ली गई। परिजनों को यह भी चिंता है कि आगे ड्रेसिंग के लिए दोबारा पट्टी खरीदनी पड़ेगी या नहीं। ड्रेसिंग के लिए मरीज को लेकर जाना पड़ता है ओटी परिजन ने बताया कि वार्ड में नियमित रूप से ड्रेसिंग करने कोई कर्मचारी नहीं आता। उन्हें मरीज को खुद ओटी तक लेकर जाना पड़ता है। रास्ते में मरीज को काफी दर्द होता है और वह चिल्लाती रहती है, लेकिन परिजनों के मुताबिक उनकी परेशानी सुनने वाला कोई नहीं है। पति के दोनों पैर टूटे, तीन महीने की है बच्ची महिला के पति के दोनों पैर टूटे हुए हैं। वह 6 महीने पहले छत से गिर गए थे। उनकी तीन महीने की बेटी और 6 साल का बेटा है। पति ने बताया कि उनकी पत्नी 10 अक्टूबर को बेटे के जन्मदिन के दिन गैस से झुलस गई थीं। उन्होंने बताया कि पत्नी का इलाज पहले एक निजी अस्पताल में चल रहा था। वहां करीब 2 लाख रुपए खर्च हो गए। पैसों की कमी के कारण उन्हें यहां लाना पड़ा। इलाज के लिए परिवार ने अपने गहने तक बेच दिए। वार्ड में बदबू, एसी भी बंद बर्न वार्ड नंबर-2 में दूर से ही बदबू आती है। वार्ड के दोनों एसी बंद हैं। ऐसे में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। इससे संक्रमण का खतरा भी बना हुआ है। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से मांग की है कि वार्ड में नियमित ड्रेसिंग, साफ-सफाई, एसी और मरीजों को ओटी तक ले जाने के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
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