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    महिला बोली- मेरे सामने पति-देवर कट गए:प्रयागराज में ट्रेन की चपेट में आए; रेलवे में अप्रेंटिसशिप ज्वाइन कर लौट रहे युवक की भी जान गई

    7 hours ago

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    “मैं, मेरे पति और देवर कालका एक्सप्रेस से कोलकाता जा रहे थे। हमें रिश्तेदारी की एक शादी में शामिल होना था। रास्ते में किसी के ट्रेन से गिर जाने की वजह से ट्रेन को रोक दिया गया। ट्रेन रुकने पर मेरे पति और देवर नीचे उतरकर देखने चले गए। कुछ देर बाद वे लौट आए। लेकिन ट्रेन चलने में देरी होने लगी तो वे फिर से नीचे उतर गए। वे पटरी पर कुछ देख ही रहे थे कि तभी तेज रफ्तार से एक दूसरी ट्रेन आ गई। दोनों ट्रेन को देखकर भागे, लेकिन वह उन्हें रौंदते हुए निकल गई।” अपनी आंखों के सामने पति और देवर को खोने वाली पूजा यह बताते हुए अपने आंसू नहीं रोक पाती। वह रोते हुए कहती है कि पल भर में उसकी सारी खुशियां छिन गईं। दरअसल, दिल्ली-हावड़ा रेल लाइन बुधवार शाम को पूजा के पति अजय और देवर आकाश सहित 4 लोग पुरुषोत्तम एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आए थे। हुआ यह कि कालका मेल में सफर कर रहे बिहार के बलिराम भगत अचानक से नीचे गिर गए। इस वजह से प्रयागराज के पचदेवरा हॉल्ट के पास कालका मेल को रोक दी गई थी। ट्रेन के रूकने के बाद कई यात्री पटरियों पर उतर आए थे, तभी एक दूसरी ट्रेन आ गई। बुआ के घर से भाई के घर शादी में जा रहे थे… पूजा ने बताया कि कोलकाता के तेली पाड़ा में हम रहते हैं। 17 मार्च को मैं और मेरे पति अजय (20) फिरोजाबाद के पृथ्वी पूर्व खैरागढ़ निवासी अपनी बुआ के घर घूमने आए थे। पति शादियों में पगड़ी बांधने का काम करते थे। चूंकि, जेठ के घर में शादी थी इसलिए हम वापस कोलकाता जा रहे थे। शादी में शामिल होने के लिए देवर आकाश भी हम लोगों के साथ ही जा रहा था। बुधवार सुबह 11 बजे कालका मेल थी। शाम करीब 6:15 बजे ट्रेन करछना के पचदेवरा के पास पहुंची। इसी दौरान अचानक ट्रेन रुक गई। पता चला कि कोई व्यक्ति ट्रेन से नीचे गिर कर कट गया है। उसे देखने के लिए कोच से कई यात्री नीचे उतर गए। मेरे पति और देवर भी नीचे उतर गए लेकिन कुछ देर में वे वापस ट्रेन में आ गए। ट्रेन चलने में देरी हुई तो वे लोग फिर नीचे उतर गए। पटरी पर अचानक से वे दौड़े… पत्नी ने बताया- अचानक से मेरी नजर पटरियों पर पड़ी। पति और देवर तेजी से भाग रहे। पीछे तेज रफ्तार ट्रेन थी। वे भागकर खुद को बचाते इसके पहले ट्रेन ने दोनों को उड़ा दिया। पति और देवर उछलकर कुछ दूर जा गिरे। मैं चिल्लाती रही। देखते ही देखते अफरा-तफरी मच गई। दोनों की मौत हो चुकी थी। जीआरपी पहुंची। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। अब जानिए अन्य मृतकों के बारे में… संजय रेलवे में अप्रेंटिसशिप ज्वाइन कर लौट रहे थे ट्रेन की चपेट में आने से चार लोगों की मौत हुई थी। पूजा के पति अजय और देवर आकाश के अलावा तीसरे शख्स की पहचान मिर्जापुर के सुनील कुमार के रूप में हुई है। जबकि चौथे की पहचान अभी नहीं हो सकी है। सुनील, मिर्जापुर के बिशेंदरपुर के थे और 15 अप्रैल को प्रयागराज में रेलवे में अप्रेंटिसशिप ज्वाइन कर लौट रहे थे। वह छह भाई-बहनां में दूसरे नंबर पर थे। उनके पिता संतलाल पीडब्ल्यूडी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर मिर्जापुर में ही तैनात हैं। परिवार पीडब्ल्यूडी कॉलोनी में रहता है। उधर, अजय के साथ कोलकाता जा रहे आकाश के पिता गिरिराज ने बताया कि आकाश 12वीं में पढ़ाई करता था। दोनों रिश्ते में ममेरे भाई थे। बलिराम भगत प्राइवेट जॉब करते थे, घर लौट रहे थे हादसा के पहले कालका मेल से गिरे यात्री बलिराम भगत बिहार के रहने वाले थे। उनके साले संजय कुमार ने बताया- वह मध्य प्रदेश में प्राइवेट नौकरी करते थे। मंगलवार को घर लौट रहे थे। वह रेलवे ट्रैक पर कैसे आए, इस बारे में कोई कुछ बात नहीं पा रहा है। रेलवे वाले सिर्फ यह बता रहे हैं कि उनकी लाश पहले से रेलवे ट्रैक पर पड़ी हुई थी। परिवार में पत्नी सुमन देवी के अलावा दो बच्चे हैं। वह तीन भाई में सबसे बड़े थे। -------------------- ये खबर भी पढ़िए- लखनऊ अग्निकांड- 2 मासूम जिंदा जले, 250 परिवार बेघर:राख में सामान तलाश रहे लोग; महिलाएं बोलीं- कोठीवालों ने झोपड़ियां फूंकीं लखनऊ में बुधवार को लगी आग में 2 मासूम जिंदा जल गए। झोपड़ियों में रहने वाले करीब 250 परिवार बेघर हो गए। DCP दीक्षा शर्मा ने कहा- मासूमों के परिजनों की पहचान कराई जा रही है। घटनास्थल पर आज यानी गुरुवार सुबह सिर्फ राख और जल चुके गृहस्थी के सामान नजर आ रहे हैं। कई परिवार राख के बीच सामान तलाश रहे हैं। हालांकि, पुलिस वहां से लोगों को हटा रही है। डीएम ने कई प्रभावित परिवारों को रैन बसेरों में भिजवाया था तो कुछ परिवारों ने पास के खाली प्लॉट में रात बिताई। महिलाओं ने रोते हुए आरोप लगाया कि कोठीवालों ने उनके घरों में आग लगाई। उन्हें धमकाया गया था कि झोपड़ियां हटा लो, नहीं तो गोली मार दी जाएगी। जब वे नहीं हटे, तो उनकी झोपड़ियों में आग लगा दी गई। अब वे कहां जाएं? पढ़ें पूरी खबर
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