Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    ‘मोहम्मद दीपक’ पर दर्ज FIR पर सुप्रीम कोर्ट की रोक:सोशल मीडिया पोस्ट पर हाईकोर्ट का आदेश भी स्थगित; 4 हफ्ते में जवाब मांगा

    1 day ago

    1

    0

    कोटद्वार के जिम संचालक मोहम्मद दीपक कुमार को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। सोमवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने उनके खिलाफ दर्ज FIR पर आगे की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी। मामला बजरंग दल के सदस्यों और एक मुस्लिम दुकानदार के बीच हुए विवाद से जुड़ा है। दीपक ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इससे पहले उत्तराखंड हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से इनकार कर दिया था। दीपक ने हाईकोर्ट के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तब तक विवादित FIR के संबंध में आगे की कार्यवाही स्थगित रहेगी। सोशल मीडिया वाले आदेश पर भी रोक सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस आदेश के प्रभाव और संचालन पर भी रोक लगा दी, जिसमें दीपक कुमार को घटना और उससे जुड़े मामले के संबंध में सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से प्रतिबंधित किया गया था। यानी फिलहाल FIR की कार्रवाई के साथ-साथ दीपक को घटना से संबंधित मैसेज, वीडियो या अन्य सामग्री सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से रोकने वाला हाईकोर्ट का निर्देश भी प्रभावी नहीं रहेगा। दीपक ने खुद भी दर्ज कराई थी शिकायत दीपक कुमार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने विवाद के दौरान हस्तक्षेप कर दुकानदार की मदद करने की कोशिश की थी। सिंघवी के मुताबिक, मौके पर मौजूद लोगों ने जब दीपक से उनका नाम पूछा तो उन्होंने जवाब दिया- ‘मोहम्मद दीपक।’ सुनवाई के दौरान सिंघवी ने कहा कि घटना के बाद दीपक दुकानदार की मदद करने पहुंचे थे और उन्होंने खुद भी मामले को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई, जबकि उनके खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई। उन्होंने वीडियो साक्ष्य का हवाला देते हुए हाईकोर्ट के आदेश के तर्क पर भी सवाल उठाया। सिंघवी ने कहा कि दीपक के खिलाफ BNS की धारा 191 के तहत दंगा करने का आरोप लगाया गया था, लेकिन इसके लिए जरूरी साक्ष्य मौजूद नहीं थे। बाद में पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर यह आरोप हटा दिया गया। अर्नेश कुमार केस का दिया हवाला दीपक की ओर से सुप्रीम कोर्ट में यह भी दलील दी गई कि उनके खिलाफ लगाए गए अपराधों में अधिकतम सजा सात साल से कम है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार मामले में तय दिशा-निर्देश लागू होते हैं। सिंघवी ने इन दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि मामले में उनके मुवक्किल को राहत दी जानी चाहिए। सोशल मीडिया बैन पर भी उठाए सवाल सुनवाई के दौरान सिंघवी ने हाईकोर्ट के उस निर्देश पर भी आपत्ति जताई, जिसमें दीपक को घटना से संबंधित मैसेज, वीडियो या अन्य सामग्री सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से रोक दिया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि राहत देने के बजाय हाईकोर्ट ने उनके मुवक्किल पर सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर एक तरह का पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल FIR से जुड़ी कार्यवाही और हाईकोर्ट के विवादित आदेश के प्रभाव एवं संचालन पर रोक लगा दी है। मामले में प्रतिवादियों के जवाब के बाद कोर्ट इस मामले पर आगे सुनवाई करेगा। ------------------ ये खबर भी पढ़ें : उत्तराखंड में ‘शुद्धिकरण’ पर कांग्रेस का हल्लाबोल: देहरादून में BJP प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के खिलाफ तहरीर सौंपी, गोगी बोले- कार्रवाई हो हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद किए गए ‘शुद्धिकरण’ को लेकर कांग्रेस का विरोध तेज हो गया है। सोमवार को कांग्रेस ने प्रदेशभर के थानों, कोतवालियों और पुलिस चौकियों में तहरीर देने का अभियान शुरू किया। पढ़ें पूरी खबर…
    Click here to Read more
    Prev Article
    BJP ने CM मान का आपत्तिजनक VIDEO हटाया:थप्पड़ मारते दिखाया था, पगड़ीधारी सिख के अपमान पर घिरे; AAP ने केस की चेतावनी दी थी
    Next Article
    Venice Film Festival 2026 में दिखेगा Deepak Tijori और Iulia Vantur की ‘Echoes of Us’ का जलवा, Joe Rajan की फिल्म को मिला बड़ा मंच

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment