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    महराजगंज में बेटे को ठेले पर लादकर अस्पताल पहुंचा पिता,VIDEO:एंबुलेंस नहीं बुला सका, गोरखपुर पहुंचने से पहले तोड़ा दम

    22 hours ago

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    महराजगंज के पनियरा नगर पंचायत में गुरुवार शाम गरीबी और स्वास्थ्य सुविधाओं की मजबूरी का दर्दनाक मंजर सामने आया। गंभीर रूप से बीमार बेटे की हालत बिगड़ने पर बुजुर्ग पिता उसे एंबुलेंस से नहीं, बल्कि ठेले पर लादकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पनियरा लेकर पहुंचे। पिता के पास मोबाइल से एंबुलेंस बुलाने की जानकारी और साधन नहीं था। बेटे को ठेले पर ले जाते पिता के पीछे उसकी पत्नी अपने दो साल के मासूम बच्चे को गोद में लेकर पैदल अस्पताल पहुंची। प्राथमिक उपचार के बाद युवक को गंभीर हालत में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। देखिए तस्वीरें... पढिए पूरी खबर.... वार्ड नंबर-5 कबीर नगर निवासी महाजन पुत्र सरजू भारती ठेला चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। गुरुवार शाम करीब पांच बजे अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। परिवार के सामने तत्काल अस्पताल पहुंचाने की चुनौती थी। पिता सरजू भारती पढ़े-लिखे नहीं हैं और मोबाइल से एंबुलेंस बुलाने में असमर्थ थे। कोई दूसरा साधन उपलब्ध नहीं होने पर उन्होंने बेटे को ठेले पर लिटाया और PHC पनियरा की ओर निकल पड़े। पीछे से महाजन की पत्नी ललिता अपने दो साल के बेटे को गोद में लेकर पैदल अस्पताल पहुंचीं। यह दृश्य देखकर आसपास के लोगों में भी चर्चा शुरू हो गई। चार महीने से पैर की बीमारी से परेशान था महाजन पत्नी ललिता के अनुसार, महाजन पिछले करीब चार महीने से पैर की गंभीर बीमारी से परेशान थे। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उनका बेहतर इलाज नहीं हो पा रहा था। गुरुवार को भी वह किसी तरह ठेला लेकर कस्बे में गए थे। वहां से लौटने के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों के अनुसार, परिवार की आय का मुख्य साधन महाजन का ठेला चलाना था। बीमारी के कारण काम प्रभावित होने से आर्थिक परेशानियां और बढ़ गई थीं। PHC पनियरा के चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रवण कुमार तिवारी के अनुसार, युवक की प्राथमिक जांच में खेतों में इस्तेमाल होने वाला कीटनाशक खाने की आशंका सामने आई थी। उसके मुंह से झाग निकल रहा था और हालत गंभीर थी। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया। परिजन एंबुलेंस से उसे लेकर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद महाजन को मृत घोषित कर दिया। मौत की जानकारी मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। देर रात शव को घर लाया गया। पीछे रह गए दो छोटे बच्चे महाजन अपने पीछे पत्नी ललिता और दो बच्चों को छोड़ गए हैं। उनकी बड़ी बेटी करीब 12 वर्ष की है, जबकि छोटा बेटा महज दो साल का है। पिता सरजू भारती ने बताया कि उनकी पांच बेटियां और एक बेटा था। सभी बेटियों की शादी हो चुकी है। महाजन भी शादीशुदा थे। उन्होंने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। परिवार के पास जमीन नहीं है। परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है। महाजन की पत्नी ने इलाज के लिए समूह से कर्ज भी लिया था, लेकिन पति को बचाया नहीं जा सका। महाजन की मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट और गहरा गया है। जिस व्यक्ति की कमाई से घर चलता था, उसकी मौत के बाद पत्नी और दो छोटे बच्चों के सामने भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है। परिवार पहले से ही इलाज के खर्च और कर्ज के बोझ से जूझ रहा था। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण और गरीब परिवारों के सामने स्वास्थ्य सुविधाओं तक समय पर पहुंचने की चुनौती को सामने ला दिया है। पिता का ठेले पर बेटे को अस्पताल ले जाने का दृश्य इस बात की ओर भी ध्यान खींचता है कि आपात स्थिति में एंबुलेंस जैसी सुविधा तक पहुंच कितनी आसान है।
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