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    महाठग राशिद नसीम दुबई में गिरफ्तार:ED लखनऊ लेकर आएगी, आरोपी के खिलाफ 100 से ज्यादा धोखाधड़ी की FIR दर्ज हैं

    4 hours ago

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    शाइन सिटी ग्रुप के प्रमोटर और हजार करोड़ की ठगी के मुख्य आरोपी राशिद नसीम को दुबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम उसे लखनऊ लेकर आएगी। करीब 10 महीने पहले लखनऊ की विशेष अदालत ने राशिद नसीम को भगोड़ा घोषित किया था। राशिद 2019 में देश छोड़कर फरार हो गया था। राशिद और उसकी कंपनियों के खिलाफ 554 से ज्यादा एफआईआर दर्ज है। आरोप है कि निवेश के नाम पर लोगों से 800 से 1000 करोड़ रुपए की ठगी की है। दुबई पुलिस ने ईडी और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के अनुरोध पर ये कार्रवाई की है। संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय एजेंसियों के कार्डिनेशन से राशिद को पकड़ा गया है। लंबे समय से उसकी लोकेशन ट्रेस की जा रही थी। ईडी और ईओडब्ल्यू के अनुरोध पर दुबई में एक्शन राशिद शाइन सिटी ग्रुप के जरिए रियल एस्टेट और हाई रिटर्न निवेश योजनाओं का लालच देकर लोगों से बड़ी रकम जुटाता था। आरोप है कि भुगतान बंद होने के बाद वह 2019 में देश छोड़कर दुबई फरार हो गया। 554 एफआईआर और हजार करोड़ की ठगी का आरोप पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार राशिद नसीम और उसकी कंपनियों के खिलाफ करीब 554 एफआईआर दर्ज हैं। निवेश के नाम पर 800 से 1000 करोड़ रुपए तक की ठगी का आरोप है। लोगों को लुभावने रिटर्न, प्लॉट और मकान देने का वादा किया गया, लेकिन बाद में न तो पैसा लौटा और न ही जमीन का कब्जा मिला। लगातार बढ़ते मुकदमों और पुलिस दबाव के बाद राशिद देश छोड़कर भाग गया था। इसके बाद उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं शुरू की गईं। 1000 करोड़ की प्रॉपर्टी पहले ही जब्त सरकारी एजेंसियों ने राशिद और उससे जुड़ी कंपनियों की सैकड़ों करोड़ की संपत्तियां जब्त की हैं। 2021 में जारी एक ऑडियो में राशिद ने खुद दावा किया था कि सरकार उसकी करीब 500 करोड़ रुपए की संपत्ति कब्जे में ले चुकी है, जिसकी मौजूदा कीमत लगभग 1000 करोड़ रुपए बताई जाती है। उस ऑडियो में यह भी कहा गया था कि करीब 300 करोड़ रुपए किसानों और ब्रोकरों के बीच फंसे हैं। जमीन दिलाने वाले कुछ दलालों के फरार होने और रजिस्ट्री विवादों के कारण कंपनी कानूनी उलझनों में फंसी हुई है। हालांकि जांच एजेंसियां इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि कर रही हैं। इनामी आरोपी, भाई भी गिरफ्तार राशिद और उसके भाई आसिफ पर गृह विभाग की ओर से 5-5 लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था। इससे पहले इन पर 50-50 हजार रुपए का इनाम था। कंपनी से जुड़े अन्य पांच आरोपियों पर भी एक-एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया है। आसिफ को पहले ही प्रयागराज से गिरफ्तार किया जा चुका है। कोर्ट के आदेश पर ईओडब्ल्यू और ईडी दोनों एजेंसियां जांच आगे बढ़ा रही हैं। अब राशिद की गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ में बड़े वित्तीय नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। दुबई से ऑपरेट होता था सिंडिकेट जांच एजेंसियों का दावा है कि दुबई में बैठकर राशिद पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। बताया जा रहा है कि उसने वहां बड़ा निवेश किया और भारत में अपने सहयोगियों के जरिए गतिविधियां जारी रखीं। 2018 में नेपाल में गिरफ्तारी और जमानत के बाद वह दुबई पहुंचा था। कई वर्षों तक गिरफ्तारी से बचते रहने के कारण उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी जांच की जा रही है। एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि ठगी की रकम किस-किस चैनल से विदेश भेजी गई। अप्रैल 2025 में घोषित हुआ था भगोड़ा लखनऊ की विशेष पीएमएलए अदालत ने अप्रैल 2025 में राशिद नसीम को भगोड़ा घोषित किया था। इसके बाद संपत्तियों की कुर्की और जब्ती की कार्रवाई और तेज कर दी गई। प्रयागराज, लखनऊ समेत कई जिलों में अवैध संपत्तियां सरकार के कब्जे में ली जा चुकी हैं। खबर अपडेट की जा रही है…
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