Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    मैक्सिको के रुईज और गोंजलो ने काशी में लिए सात-फेरे:हिंदू रीति-रिवाजों से गंगा नदी में नौका पर की शादी, बोले - मन को मिली शांति

    3 hours ago

    1

    0

    धर्म की नगरी काशी से आकर्षित होकर पूरी दुनिया से लोग यहां आते हैं। कुछ यहां आकर यहीं के होकर रह जाते हैं तो कुछ यहां को अपना कर वापस जाते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ मैक्सिको के रुईज कब्रोल और गोंजलो मिगुल के साथ जो काशी घूमने पहुंचे थे। दोनों को काशी इतनी भाई की इन्होने यहीं एक दूजे का होने का निर्णय लिया और दोनों वैदिक रीति से गंगा किए धारा में नाव पर सात फेरे ले लिए। दूल्हे रुईज कब्रोल ने शादी के बाद कहा काशी में शादी करने के बाद मन को शांति मिली। मैक्सिकन जोड़े की शादी की देखिये तस्वीरें… दो दिन पहले पहुंचे थे वाराणसी विवाह संस्कार कराने वाले आचार्य दीपक पांडेय ने बताया - धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में एक बार फिर सैलानियों ने शादी की और इसका मै साक्षी बना यह हर्ष का विषय है। उन्होंने कहा - रुईज कब्रोल और गोंजलो मिगुल वाराणसी पहुंचे तो उन्होंने दो दिन तक यहां के अध्यात्म को समझा और फिर अपने गाइड आरिफ खान से यहीं शादी करने की बात कही जिसके बाद उन्होंने मुझसे संपर्क किया। दोनों की सहमति से हुई शादी आचार्य दीपक पांडेय ने बताया - मैंने दोनों से बात की तो उन्होंने बिना किसी दबाव के हिंदू रीती रिवाज से शादी करने की बात कही। जिसपर नाव पर व्यवस्था की गयी और शादी संपन्न कराई गयी। दोनों विदेशी मेहमान इस शादी से खुश दिखे। रुईज कब्रोल और गोंजलो मिगुल वैदिक रीति-रिवाज से विवाह किया और एक दूजे की हो गईं। बनारसी साड़ी पहनकर इतराई दुल्हन इस दौरान दुल्हन गोंजलो मिगुल ने बनारसी साड़ी पहनी थी। गाइड आरिफ मोहम्मद ने बताया - उन्होंने स्वयं शादी से पहले बनारसी साड़ी पहनने की बात कही थी। जिसपर उन्हें साड़ी दिलाई गयी और उसके बाद वो दुल्हन की तरह तैयार हुईं और नाव पर शादी संपन्न कराई गई। गंगा की धारा, मंत्रों की गूंज और घाटों की आध्यात्मिक आभा ने इस विवाह को विशेष बना दिया। उपस्थित लोगों ने इसे संस्कृतियों के संगम का प्रतीक बताया। वाराणसी में विदेशी सैलानियों द्वारा भारतीय परंपराओं को अपनाने की यह परंपरा लगातार बढ़ रही है, जो शहर की वैश्विक पहचान और सांस्कृतिक प्रभाव को दर्शाती है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    होली पर चलेंगी 500 अतिरिक्त बसें:28 फरवरी से 9 मार्च तक होगा संचलन, दिल्ली-पश्चिमी यूपी रूट पर खास फोकस
    Next Article
    डॉक्टर ने स्टेटस लगाया- 24 घंटे में न्याय मिला:डरो मत आवाज उठाओ, कानून है..., गोरखपुर में बैड टच कर लड़कों ने उतारी थी शर्ट

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment