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    मनचाही पोस्टिंग के लिए RSS-BJP दफ्तर के चक्कर लगा रहे:लिखा- पत्नी की देखभाल करनी है; सरकार का ये आखिरी ट्रांसफर सीजन

    8 hours ago

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    यूपी सरकार में तबादला सीजन शुरू होते ही अधिकारियों और कर्मचारियों की दौड़ तेज हो गई है। शासन से लेकर सभी मंत्रालयों में 31 मई तक समूह क, ख और ग के अधिकारियों-कर्मचारियों की ट्रांसफर लिस्ट जारी हो जाएगी। चूंकि जनवरी, 2027 के शुरुआती हफ्तों में विधानसभा चुनाव की घोषणा होनी तय है, इसलिए योगी सरकार 2.0 का यह आखिरी ट्रांसफर सीजन है। यही वजह है कि कर्मचारी अपनी पसंदीदा जगह पोस्टिंग के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। पढ़िए रिपोर्ट… ट्रांसफर सेट करने के लिए क्या-क्या कर रहे… नेताओं की परिक्रमा: ट्रांसफर के लिए एक-दो साल से उम्मीद लगाए बैठे सरकारी बाबू अपने रसूखदार रिश्तेदारों, भाजपा नेताओं और विधायकों-सांसदों को लेकर मंत्रियों के दफ्तर और घरों के चक्कर काट रहे हैं। संघ से भी सिफारिशें: सिर्फ भाजपा ही नहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा के सहयोगी संगठनों के लोग भी 'भारती भवन' (संघ मुख्यालय) के जरिए अपने लोगों को सेट करने में जुटे हैं। 20% की लिमिट बनी मंत्रियों की मुसीबत चुनावी साल में मंत्री और नेता चाहते हैं कि वे ज्यादा से ज्यादा लोगों की सिफारिशें पूरी करके उन्हें खुश कर सकें। लेकिन सरकार की ट्रांसफर पॉलिसी ने उनके हाथ बांध दिए हैं। ज्यादा तबादलों से होने वाले विवाद से बचने के लिए सरकार ने अधिकतम 20% की सीमा तय की है। यानी कुल स्टाफ के सिर्फ 20% लोगों का ही ट्रांसफर हो सकता है। इसी वजह से मंत्री और बड़े अफसर (अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और डायरेक्टर) भारी दबाव में हैं। तबादले के आवेदनों में सबसे ज्यादा ये 5 इमोशनल और पारिवारिक वजहें सामने आ रही हैं… बड़े विभागों पर सबसे ज्यादा प्रेशर जनता से सीधे जुड़े होने के कारण कुछ खास विभागों के मंत्रियों और अफसरों पर सिफारिशों का सबसे भारी दबाव है। ये विभाग हैं- पिछले साल 15 दिन की विंडो खोली, फिर 'जीरो सेशन' हुआ साल 2025 में भी ट्रांसफर के लिए करीब 15 दिन की विंडो खोली गई थी। लेकिन सिफारिशों और दबाव इतना बढ़ गया कि सरकार को कई बड़े महकमों में 'जीरो सेशन' (कोई ट्रांसफर नहीं) करना पड़ा। इनमें बेसिक शिक्षा, प्राविधिक शिक्षा, पशुपालन और स्वास्थ्य विभाग शामिल थे, जहां ट्रांसफर लिस्ट ही जारी नहीं हो पाई थी। RSS और भाजपा मुख्यालय की सिफारिशों पर ज्यादा ध्यान तबादलों की इस रेस में सबसे ज्यादा अहमियत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा प्रदेश मुख्यालय से आने वाली सूचियों को मिल रही हैं। संगठन की तरफ से फाइनल नामों की लिस्ट सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात दो विशेष कार्याधिकारियों (OSD) को भेजी जाती है। सीएम के अधीन आने वाले विभागों और अन्य महत्वपूर्ण सूचियों को हरी झंडी दिलाने का अंतिम जिम्मा इन्हीं दोनों ओएसडी के पास होता है। मंत्री भी संगठन की इन सूचियों को टालने का जोखिम नहीं लेते। राज्यमंत्रियों की परेशानी ज्यादा, कैबिनेट मंत्रियों से टकराव प्रदेश सरकार में 21 राज्यमंत्री हैं। इनके पास अपने ही विभाग में तबादले का ज्यादा अधिकार नहीं है। लेकिन मंत्री होने के कारण क्षेत्र की जनता और कार्यकर्ताओं का दबाव इन पर सबसे ज्यादा रहता है। जब ये सिफारिशें लेकर बैठते हैं, तो विभागीय कैबिनेट मंत्री इन्हें ज्यादा तवज्जो नहीं देते। इसके चलते कई बार कैबिनेट मंत्री और राज्यमंत्री के बीच टकराव की स्थिति बन जाती है। विधायकों की भी टेंशन कम नहीं तबादला सीजन में भाजपा विधायक भी कोई कम परेशान नहीं हैं। उन्हें चुनावी तैयारी में जुटना है, सभी कार्यकर्ताओं का साथ भी चाहिए। ये तब ही हो सकेगा, जब उनकी सिफारिश पर तबादले भी हो सकें। जानकार मानते हैं कि एक-एक विधायक के पास तबादले के लिए 500 से लेकर 1000 तक सिफारिशें पहुंच रही हैं। यही कारण है कि इन दिनों ज्यादातर विधायक तबादलों की सिफारिश लेकर लखनऊ में डेरा जमाए हैं। रोजाना मंत्रियों के घर विधायकों को तबादले की सिफारिश लेकर जाते देखा जा रहा है। जानकार मानते हैं कि ज्यादातर विभागों में तबादले की लिस्ट 28 से 31 मई तक जारी की जाएगी। इसके बाद विभागाध्यक्ष और विभागीय मंत्री एक-दो दिन लखनऊ से बाहर चले जाएंगे, ताकि उन्हें शिकायतों का सामना न करना पड़े। वित्त मंत्री ने कहा- नई नीति मंजूर, प्रक्रिया पूरी कर लेंगे वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने मई 2026 के पहले हफ्ते में हुई कैबिनेट बैठक के बाद नई तबादला नीति को लेकर सरकार का आधिकारिक पक्ष रखा था। वित्त मंत्री ने बताया कि कैबिनेट ने नई तबादला नीति को मंजूरी दे दी है, इसके तहत इस साल ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया 31 मई तक पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार भी ट्रांसफर पर अधिकतम सीमा तय रहेगी। जो अधिकारी एक जिले में 3 साल और एक मंडल में 7 साल पूरे कर चुके हैं, उन्हें वहां से अनिवार्य रूप से ट्रांसफर किया जाएगा। --------------- ये पढ़ें - धनंजय के गढ़ में बेटा लॉन्च करने को तैयार बृजेश:पर्दे के पीछे से दो नेता कर रहे प्लानिंग; धनंजय कह चुके- मैं डरने वाला नहीं 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में अभी 8 महीने से ज्यादा का समय है। लेकिन, पूर्वांचल की सियासत में नई जंग छिड़ती दिख रही है। चर्चा है, बाहुबली नेता धनंजय सिंह के गढ़ जौनपुर में उनके विरोधी बृजेश सिंह एंट्री लेने वाले हैं। वह बेटे सिद्धार्थ सिंह को जिला पंचायत चुनाव लड़ाने की प्लानिंग कर रहे हैं। पढ़िए पूरी खबर...
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