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    मस्जिद में नमाज न पढ़ने पर वकील पर हमला:चेंबर में घुसकर मारपीट, मौलाना समेत 50 लोगों पर FIR दर्ज

    4 hours ago

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    बरेली के हाफिजगंज थाना क्षेत्र के सेंथल निवासी सीनियर एडवोकेट अख्तर अली ने जामा मस्जिद के इमाम पर गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने बताया कि 22 फरवरी की शाम करीब 5 बजे, जब वे अपने घर स्थित चेंबर में कानूनी काम कर रहे थे, तभी जामा मस्जिद के मौलाना खुर्शीद के इशारे पर 50 से अधिक उपद्रवियों ने उन पर हमला बोल दिया। हमलावरों ने न केवल उनकी गर्दन दबाकर जान लेने की कोशिश की, बल्कि अभद्र गालियां देते हुए दफ्तर की महत्वपूर्ण फाइलें फाड़ दीं और उनमें आग लगाने का प्रयास भी किया। ‘मौलाना के पीछे नमाज पढ़ो वरना मार देंगे’ वकील अख्तर अली का कहना है कि हमलावरों ने उन्हें धमकाते हुए कहा कि तुम जामा मस्जिद जाकर मौलाना खुर्शीद के पीछे नमाज अदा क्यों नहीं करते? आरोप है कि भीड़ ने उन्हें चेतावनी दी कि अगर भविष्य में मस्जिद जाकर नमाज नहीं पढ़ी, तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। इस घटना के बाद से पीड़ित वकील और उनका पूरा परिवार खौफ में है। उन्होंने मामले की शिकायत हाफिजगंज थाने में दर्ज कराई है, लेकिन उनका आरोप है कि इतनी बड़ी वारदात के बाद भी पुलिस ने अब तक किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है। इबादत पर पहरा मंजूर नहीं: एडवोकेट दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अख्तर अली ने कहा, "अल्लाह की इबादत के लिए किसी खास जगह की पाबंदी नहीं है, इबादत तो कहीं भी की जा सकती है। मैं जहां होता हूं, वहीं नमाज अदा कर लेता हूं।" उन्होंने मौलाना खुर्शीद पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मौलाना का बैकग्राउंड क्रिमिनल है और उन पर कई मुकदमे दर्ज हैं। वकील के मुताबिक, मौलाना को सही ढंग से नमाज पढ़ाना भी नहीं आता, इसी वजह से सेंथल कस्बे के करीब 70% लोग उनके पीछे नमाज पढ़ना पसंद नहीं करते। पुलिस कार्रवाई का इंतजार फिलहाल, बरेली कचहरी पहुंचे एडवोकेट अख्तर अली ने न्याय की गुहार लगाई है। जामा मस्जिद के मौलाना खुर्शीद और उनके समर्थकों पर मुकदमा तो दर्ज हो गया है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पीड़ित का कहना है कि उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वे मौलाना के पीछे ही नमाज अदा करें, जो उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है।
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