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    मोदी के 3 सेकेंड और फिर जली इतनी फ्लैश लाइट, कुर्सी छोड़ खड़ी हुई भीड़

    4 hours ago

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    पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि मेलबर्न वालों के साथ फ्लैट वाइट कॉफी पीता हूं। साथियों जिस एनर्जी से आप सभी ने हमारे फ्रेंड्स ने हम सभी को वेलकम किया है। वो और भी अमेजिंग है। मेलबर्न ने एक तरह से मैदान मार लिया है। साथियों मैं मेरे मित्र भारत के मित्र प्राइम मिनिस्टर एंथनी अल्बनीसी का भी बहुत आभारी हूं। आप सिडनी में भी साथ थे। और आज यहां मेलबर्न में भी भारतीय कम्युनिटी के बीच आए हैं और ये एक प्रकार से फुल सर्कल हो गया है। अहमदाबाद जहां दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट ग्राउंड है। और मेलबर्न जहां आइकॉनिक स्टेडियम है। हम दोनों साथ रहे हैं। और साथियों हम सभी ने देखा है प्राइम मिनिस्टर अल्बमनी जी जब बोलते हैं तो भारतीयों के दिल और दिमाग में छा जाते हैं। सिडनी में भी आपने धूम मचाई थी और यहां भी आप छा गए। मैं विक्टोरिया की प्रीमियर का भी उनके ऊर्जा भरे शब्दों के लिए भारत के प्रति इतने स्नेह से उन्होंने जो कहा उसके लिए उनका भी हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। साथियों मैं जब साल 2014 में ऑस्ट्रेलिया आया था तो 28 साल के बाद भारत का कोई पीएम यहां पहुंचा था और आप याद कीजिए तब तब मैंने कहा था कि अब आपको 28 साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पिछले 12 वर्षों में मैं तीसरी बार यहां आया हूं। यानी इस बार हैट्रिक लगी है। यह दिखाता है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते किस ऊंचाई पर है। और जानते हैं इसमें सबसे बड़ी भूमिका किसकी है?इसे भी पढ़ें: प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा के बीच कांग्रेस ने पूर्व पीएम डेविड लैंग और भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को किया यादमोदी की नहीं इसमें आप सभी साथियों की भूमिका है। इंडियन डायस्पोरा की भूमिका है। साथियों कहते हैं कि मैलबन शहर एक दिन में ही चार सीजन के दर्शन करा देता है। लेकिन भारतीय समुदाय ने अपने कल्चरल कलर्स से इसको और वाइब्रेंट बना दिया है। यहां मेलबर्न में और आसपास काफी ऐसे स्थान है ऐसे मार्केट्स हैं जो भारतीयता के रंग से भरे हैं। कोई इन्हें लिटल इंडिया कहता है। कोई मिनी इंडिया कहता है। नाम जो भी हो लेकिन रंग भारतीयता से भरे हुए हैं।इसे भी पढ़ें: प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा के बीच कांग्रेस ने पूर्व पीएम डेविड लैंग और भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को किया याद ऐसे ही एक मार्केट का वीडियो किसी ने मुझे दिखाया। वीडियो में बता रहे थे कि वहां खूब सेल चलती रहती है। इस सेल के चक्कर में लोग गनचक्कर बन जाते हैं। शॉपिंग का मूड ना भी हो तो भी खरीदारी करनी ही पड़ती है। मैं सही कह रहा हूं ना शेल का आकर्षण होता है ना साथियों आप में से कई साथी फर्स्ट टाइम ऑस्ट्रेलिया आए और कईयों का जन्म जन्म भी यही हुआ पीढ़ियां बदल गई लेकिन भीतर की भारतीयता हमेशा हमेशा जिंदा रही। यहां कई सारे साथी ऐसे होंगे जिनके घर में कम से कम दो टाइम जोन चलते हैं। यहां बच्चे स्कूल से घर ऑस्ट्रेलियन टाइम के हिसाब से आते हैं। लेकिन भारत में दादा-दादी नाना नानी वीडियो कॉल पर इंतजार कर रहे होते हैं। यहां वीकेंड होता है तो भारत में किसी शादी की लाइव स्ट्रीमिंग चल रही होती है। यानी दूरी हजारों किलोमीटर की है। लेकिन डेली रूटीन आज भी भारत से जुड़ा हुआ है और इस रूटीन के साथ आप सभी ऑस्ट्रेलिया के विकास में पूरी शक्ति से जुटे हुए हैं। मुझे आप सब पर गर्व है। साथियों हम भारतीय ऐसे ही हैं जैसे दूध में चीनी मिल जाती है। उसे और मीठा कर देती है। वैसे ही हम भारतीय दुनिया में अपने प्रेम का रंग घोलते रहते हैं। घर में दूध ऑस्ट्रेलिया वाला आता है लेकिन चाय भारत वाली बनती है।
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