Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    MEA Briefing में पूछा गया 'अमेरिकी हरकत' और JD Vance की 'बदजुबानी' पर सवाल, India ने Trump प्रशासन पर दिया तीखा पलटवार

    4 hours ago

    1

    0

    भारतीय पेशेवरों को ‘विदेशी बंधुआ मजदूर’ बताने वाली अमेरिकी टिप्पणी पर भारत ने कड़ा पलटवार किया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयान को भारत ने न केवल अनुचित, बल्कि अपमानजनक करार देते हुए साफ कर दिया कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था, तकनीकी नवाचार और औद्योगिक विकास में भारतीय पेशेवरों के योगदान को इस तरह की भाषा से खारिज नहीं किया जा सकता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने आज प्रेस ब्रीफिंग में इस मुद्दे समेत भारत-अमेरिका संबंधों, पश्चिम एशिया की स्थिति, बांग्लादेश के साथ व्यापार, भारत-पाकिस्तान संबंधों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब दिए।प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम कर रहे विदेशी पेशेवरों और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से जुड़े भारतीय कर्मचारियों को लेकर जारी विवाद पर भारत ने अपनी नाराजगी स्पष्ट शब्दों में जाहिर की है। हम आपको बता दें कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने विदेशी कर्मचारियों को ‘विदेशी बंधुआ मजदूर’ बताते हुए कहा था कि अमेरिकी कामगारों को नौकरी से निकालकर उनकी जगह ऐसे लोगों को नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि विदेश से केवल उन्हीं प्रतिभाशाली लोगों को बुलाया जाना चाहिए, जिनकी विशेषज्ञता अमेरिका में उपलब्ध नहीं है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई, जब अमेरिका ने कई तकनीकी कंपनियों को PERM ग्रीन कार्ड कार्यक्रम से जुड़े आवेदनों की प्रक्रिया पर रोक या निलंबन संबंधी कदमों की घोषणा की। प्रभावित कंपनियों में भारत से जुड़ी कंपनियां भी शामिल हैं।इसे भी पढ़ें: Russian Army में फंसे 69 भारतीयों पर MEA ने मांगी जानकारी, 139 को अब तक कराया गया मुक्तभारत के विदेश मंत्रालय ने इस बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि इस तरह का वर्णन अनुचित है और अमेरिका में भारतीय पेशेवरों के वास्तविक योगदान की अनदेखी करता है। मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय पेशेवर उच्च शिक्षित और कुशल हैं तथा अमेरिकी अर्थव्यवस्था और नवाचार तंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत ने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका का अपना इतिहास विभिन्न पीढ़ियों के प्रवासियों के श्रम, उद्यमशीलता और नवाचार से आकार लेता रहा है। ऐसे में औपनिवेशिक इतिहास और दर्दनाक ऐतिहासिक अनुभवों से जुड़ी शब्दावली का इस्तेमाल करना बेहद अपमानजनक है।भारत ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले से जुड़े घटनाक्रम पर नजर बनाए रखेगा। विदेश मंत्रालय का रुख इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली भारतीय प्रतिभाओं और पेशेवरों के सम्मान के मुद्दे पर किसी भी तरह की अपमानजनक टिप्पणी को हल्के में लेने के लिए तैयार नहीं है।देखा जाये तो एच-1बी वीजा और ग्रीन कार्ड का विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब भारत और अमेरिका के संबंध पहले से ही कई मुद्दों पर दबाव का सामना कर रहे हैं। व्यापार और टैरिफ, आव्रजन नीतियों, भारतीय पेशेवरों की आवाजाही, रूस के साथ भारत के संबंधों और पाकिस्तान के प्रति अमेरिकी रुख को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। साथ ही रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की संभावनाओं से जुड़े अमेरिकी कदम भी भारत की चिंताओं में शामिल हैं। इस संदर्भ में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की राष्ट्रपति की शक्तियों से जुड़े अमेरिकी कानून का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है।विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले ही पाकिस्तान के साथ अमेरिका के बढ़ते संपर्कों को लेकर चिंता जता चुके हैं। भारत का मानना है कि द्विपक्षीय संबंधों में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाए रखने के लिए दोनों पक्षों को एक-दूसरे की प्रमुख चिंताओं और हितों का सम्मान करना होगा। इसके अलावा, भारतीय पक्ष ने यह भी रेखांकित किया है कि प्रतिभाओं की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही दोनों देशों के लिए लाभकारी है। भारतीय पेशेवर अमेरिकी कंपनियों को उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता, अनुसंधान, नवाचार, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। इससे रोजगार सृजन और कंपनियों के आर्थिक विकास को भी प्रोत्साहन मिलता है।विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया कि भारतीय प्रतिभाओं की भूमिका को सीमित करने वाले कदम दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षाओं के अनुकूल नहीं हैं। भारत की अपेक्षा है कि इस प्रक्रिया से जुड़े सभी पक्ष पारस्परिक लाभ की इस वास्तविकता को समझेंगे।हालांकि, मंत्रालय ने एच-1बी वीजा और PERM ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के बीच अंतर भी स्पष्ट किया। उसके मुताबिक, PERM आवेदनों का निलंबन अपने आप में मौजूदा एच-1बी वीजा की वैधता या वीजा धारकों और उनके आश्रितों की स्थिति को प्रभावित नहीं करता। लेकिन प्रभावित कंपनियों के पात्र कर्मचारियों की स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया पर इसका असर पड़ सकता है।पश्चिम एशिया में हमलों के बाद कुछ व्यवधान, हवाई आवाजाही जारीप्रेस ब्रीफिंग के दौरान पश्चिम एशिया में कनेक्टिविटी और हवाई यातायात को लेकर भी सवाल उठे। रणधीर जायसवाल ने बताया कि सऊदी अरब में हमलों के कारण कुछ व्यवधान पैदा हुए हैं। भारत ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर हुए इन हमलों की कड़ी निंदा की है। हालांकि, प्रवक्ता ने कहा कि इसके अलावा कनेक्टिविटी से जुड़ी कोई अन्य बड़ी समस्या सामने नहीं है और पश्चिम एशिया के हवाई अड्डों के जरिए यातायात जारी है।भारत की चिंता का एक महत्वपूर्ण पहलू इस क्षेत्र में रहने वाले भारतीय नागरिकों, यात्रियों और कामगारों की सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संपर्क व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना भी है। क्षेत्रीय तनाव के बीच हवाई आवाजाही और परिवहन संपर्क बनाए रखना भारत के लिए अहम बना हुआ है।भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे पर बातचीत जारीभारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) की प्रगति पर पूछे गए प्रभासाक्षी के सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस पहल पर पर्याप्त प्रगति हुई है और संबंधित देशों के बीच चर्चा जारी है। जायसवाल ने कहा कि अगली बैठक कब होगी, इस बारे में फिलहाल उनके पास कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं है। भाग लेने वाले देशों और आगे की बैठकों से संबंधित जानकारी उपलब्ध होने पर साझा की जाएगी। हम आपको बता दें कि IMEC को भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच संपर्क, व्यापार तथा आर्थिक सहयोग बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है। ऐसे में इसके क्रियान्वयन को लेकर जारी चर्चाएं क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।बांग्लादेश के साथ व्यापारिक मुद्दों पर संयुक्त कार्य समूह की बैठकइसके अलावा, भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर भी विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी। प्रवक्ता के मुताबिक, भारत-बांग्लादेश संयुक्त कार्य समूह की व्यापार संबंधी बैठक नई दिल्ली में कल और आज आयोजित हुई। बैठक संयुक्त सचिव स्तर पर हुई और इसमें दोनों देशों के द्विपक्षीय एजेंडे से जुड़े विभिन्न व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा की गई। जायसवाल ने कहा कि उन्हें बैठक के समापन की स्थिति की पूरी पुष्टि नहीं है, लेकिन उन्हें जानकारी मिली है कि बातचीत अभी-अभी समाप्त हुई हो सकती है या उस समय जारी हो सकती है। देखा जाये तो भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापारिक संपर्क दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों का अहम हिस्सा है। ऐसे में संयुक्त कार्य समूह की बैठक को लंबित व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा और द्विपक्षीय आर्थिक संवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।शिमला समझौते के बाद UNMOGIP की प्रासंगिकता पर भारत का पुराना रुख कायमसंयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह यानी UNMOGIP को लेकर पूछे गए सवाल पर भारत ने अपना पारंपरिक रुख दोहराया। रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत का लगातार यह मत रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद UNMOGIP अपनी प्रासंगिकता खो चुका है। यह रुख भारत की उस नीति के अनुरूप है, जिसके तहत नई दिल्ली भारत-पाकिस्तान संबंधों से जुड़े मुद्दों पर शिमला समझौते और द्विपक्षीय व्यवस्था को प्रमुख महत्व देती है।भारत और लाइबेरिया की पहल: समुद्री सुरक्षा को वैश्विक एजेंडे में लाने पर जोरप्रेस ब्रीफिंग में अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत और लाइबेरिया के बीच बैठक हुई है। भारत ने खाड़ी क्षेत्र और काला सागर क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों तथा नाविकों पर हुए हमलों की श्रृंखला की कड़ी निंदा की है। जायसवाल के अनुसार, नाविकों की सुरक्षा के लिए गठित ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑफ द सेफ्टी ऑफ सीफेरर्स’ (S4) की पहली बैठक न्यूयॉर्क में आयोजित हुई। इसमें भारत के विदेश मंत्री और लाइबेरिया के विदेश मंत्री ने नेतृत्व करते हुए बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में 25 देशों ने भाग लिया।इस समूह का उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजरानी से जुड़े देशों, समुद्री उद्योग के हितधारकों, सेवाएं प्रदान करने वाले प्रमुख देशों और बड़े नाविक समुदायों वाले देशों को एक मंच पर लाना है। भारत चाहता है कि समुद्री सुरक्षा और नाविकों की संरक्षा को वैश्विक चर्चा के केंद्र में रखा जाए। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाकर यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना न बनाया जाए, समुद्री व्यापार बाधित न हो और समुद्र में काम करने वाले नाविक सुरक्षित रहें। मौजूदा क्षेत्रीय तनावों के बीच समुद्री मार्गों की सुरक्षा वैश्विक व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।कई मोर्चों पर भारत का स्पष्ट संदेशविदेश मंत्रालय की आज की प्रेस ब्रीफिंग में भारत का रुख कई स्तरों पर सामने आया। अमेरिका के साथ संबंधों में भारतीय पेशेवरों के सम्मान और प्रतिभाओं की आवाजाही का मुद्दा सबसे प्रमुख रहा, जहां भारत ने जेडी वेंस की टिप्पणी पर तीखा विरोध दर्ज कराया। वहीं, पश्चिम एशिया में नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा, हवाई संपर्क की स्थिति, IMEC पर जारी बातचीत, बांग्लादेश के साथ व्यापारिक चर्चा और समुद्री सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता ने भारत की व्यापक कूटनीतिक प्राथमिकताओं को भी रेखांकित किया। भारत ने UNMOGIP के मुद्दे पर अपने पुराने रुख को दोहराते हुए यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान से संबंधित मामलों में शिमला समझौता उसकी नीति का महत्वपूर्ण आधार है।कुल मिलाकर, विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि भारत अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों के साथ-साथ विदेशों में भारतीय पेशेवरों की प्रतिष्ठा, नागरिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संपर्कों के संरक्षण को लेकर स्पष्ट और दृढ़ रुख अपनाए हुए है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Akhilesh Yadav का दावा, 2027 में बदलेगी सरकार, CM Yogi लड़ें Ayodhya से चुनाव
    Next Article
    Delhi Metro के 57 स्टेशन बंद, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रोकने को 25 हजार जवान तैनात

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment