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    Middle East War 2026 | पश्चिम एशिया में महायुद्ध: खाड़ी देशों पर ईरानी मिसाइलों की बौछार, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया खतरा

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    पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की लपटें अब इजराइल की सीमाओं को लांघकर पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल गई हैं। रविवार को ईरान ने अपने हमलों का दायरा बढ़ाते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, बहरीन और ओमान जैसे पड़ोसी देशों पर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे। इस हमले ने न केवल वैश्विक विमानन सेवाओं को अस्त-व्यस्त कर दिया है, बल्कि दुनिया की ईंधन आपूर्ति की जीवन रेखा कहे जाने वाले हॉर्मुज जलडमरूमध्य को भी संकट में डाल दिया है।इजराइल और अमेरिका ने 28 फरवरी को यह कहते हुए ईरान पर हमला किया था कि वे ईरान के परमाणु व सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं और ईरान के लोगों से भी अपने नेताओं के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया था। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और फारस की खाड़ी के आसपास के पड़ोसी देशों पर हमले किए। इस संघर्ष के कारण वैश्विक विमानन सेवाएं अस्त-व्यस्त हो गई हैं, तेल निर्यात बाधित हुआ है और दुनियाभर में ईंधन की कीमतों में वृद्धि हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें आशा है कि तेल व गैस के निर्यात पर निर्भर देश हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेजेंगे। हालांकि रविवार तक किसी भी देश ने इसके लिए प्रतिबद्धता नहीं जताई, लेकिन कुछ देशों ने कहा कि वे इस पर विचार कर रहे हैं। इजराइल ने कहा कि उसने रविवार को भी ईरान पर हमले जारी रखे। बहरीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने रविवार को अपने निवासियों को चेतावनी दी कि वे उनकी ओर आ रहीं मिसाइल रोकने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। इससे पहले, ईरान ने लोगों से संयुक्त अरब अमीरात के तीन बंदरगाहों को खाली करने का आग्रह किया था। ईरान ने पश्चिम एशिया के सबसे व्यस्त बंदरगाह और संयुक्त अरब अमीरात के दो अन्य बंदरगाहों को खाली करने का आह्वान किया। यह पहली बार है जब ईरान ने किसी पड़ोसी देश की गैर-अमेरिकी परिसंपत्तियों पर हमले की खुले तौर पर धमकी दी। ईरान ने कोई साक्ष्य दिए बिना कहा कि अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात के मुख्य टर्मिनल वाले खार्ग द्वीप पर हमला करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात में ‘‘बंदरगाहों, ‘डॉक’ और ठिकानों’’ का इस्तेमाल किया। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका ने संयुक्त अरब अमीरात से खार्ग और अबू मूसा द्वीपों पर हमले किए। उन्होंने कहा कि यह स्थिति खतरनाक है और ईरान कोशिश करेगा कि ‘‘वहां किसी भी आबादी वाले इलाके पर हमला न किया जाए।’’ अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के इस दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के कूटनीतिक सलाहकार अनवर गर्गाश ने भी ईरान के इस आरोप को खारिज दिया कि खार्ग द्वीप पर हमले के लिए अमेरिका ने अमीरात की जमीन या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल किया। संघर्ष के दौरान ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सऊदी अरब, कतर और ओमान पर सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन दागे। उसका कहना है कि वह अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है, लेकिन हवाई अड्डों और रिहायशी इलाको में हमलों की सूचनाएं भी सामने आईं। हालांकि इन देशों की वायु रक्षा प्रणाली ने अधिकतर हमलों को नाकाम कर दिया, फिर भी इस युद्ध से काफी नुकसान हुआ है और खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाएं भी प्रभावित हुई हैं। अब्बास अराघची ने रविवार को लंदन के अखबार ‘अल-अरबी अल-जदीद’ से कहा कि ईरान ऐसे किसी भी प्रस्ताव पर विचार करने के लिए तैयार है, जिसमें युद्ध को पूरी तरह खत्म करने की बात हो। उन्होंने यह भी कहा कि तनाव कम करने के लिए ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिशें जारी हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि इन कोशिशों में अब तक कोई प्रगति हुई है या नहीं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘‘बंद करने’’ के ईरान के प्रयास से प्रभावित देशों से आग्रह किया कि वे वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण इस संकरे समुद्री मार्ग को सुरक्षित करने के लिए पोत भेजें। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य में पोत भेजने का आग्रह करते हुए कहा कि अमेरिका तटरेखा पर बमबारी जारी रखेगा और ईरानी पोतों एवं नौकाओं को निशाना बनाएगा। ईरानी हमलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को प्रभावित किया है जो कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है। अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने एनबीसी को बताया कि वह कुछ देशों के साथ “संवाद” में हैं और उन्हें उम्मीद है कि चीन “रचनात्मक साझेदार” बनेगा, ताकि जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सके। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ‘सीबीएस’ से बातचीत में कहा कि कई देशों ने अपने जहाजों के सुरक्षित गुजरने के लिए उनसे संपर्क किया है, लेकिन इसके बारे में निर्णय उनके सैन्य बलों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि कुछ देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई है, हालांकि उन्होंने इसका विवरण नहीं बताया। ईरान ने कहा है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों को छोड़कर यह जलडमरूमध्य सभी के लिए खुला है। ब्रिटेन के ऊर्जा मंत्री एड मिलिबैंड ने ‘स्काई न्यूज’ से कहा, “हम अपने सहयोगियों के साथ मिलकर गंभीरता से देख रहे हैं कि क्या किया जा सकता है, क्योंकि यह बहुत जरूरी है कि जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाए।” उन्होंने यह भी कहा कि “इस संघर्ष को खत्म करना ही जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का सबसे अच्छा और भरोसेमंद तरीका है।” दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह इस मुद्दे पर वॉशिंगटन के साथ करीबी समन्वय करेगा और ट्रंप के प्रस्ताव की समीक्षा करेगा। अराघची ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ट्रंप की इस अपील को “भीख मांगने जैसा” बताया। वहीं ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने फिर से चेतावनी दी कि अगर ईरान के तेल से जुड़े ढांचे पर हमला किया गया, तो वह क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े तेल, आर्थिक और ऊर्जा ढांचों को निशाना बनाएगा। युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान के हमलों में खाड़ी देशों में कम से कम 12 आम लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें ज्यादातर प्रवासी मजदूर थे। ईरान में अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति के अनुसार अब तक 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। न्यायपालिका की आधिकारिक समाचार एजेंसी मीजान के मुताबिक ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि मरने वालों में 223 महिलाएं और 202 बच्चे शामिल हैं। इजराइल में ईरान के मिसाइल हमलों से 12 लोगों की मौत हो चुकी है और कई अन्य घायल हुए हैं, जिनमें रविवार को घायल हुए तीन लोग भी शामिल हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका के कम से कम 13 सैनिकों की भी जान जा चुकी है। इस बीच, लेबनान का मानवीय संकट और गहरा गया है। इजराइल ने ईरान समर्थित हिजबुल्ला चरमपंथियों के खिलाफ कई हमले किए जिनमें 800 से अधिक लोग मारे गए हैं और 8,50,000 लोग विस्थापित हुए हैं। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच शनिवार को इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिकी दूतावास परिसर के अंदर एक हेलीपैड पर मिसाइल से हमला हुआ जबकि संयुक्त अरब अमीरात में ईरान की रोकी गई मिसाइल का मलबा तेल संयंत्र पर गिर गया।
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