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    नाबालिग से रेप के दोषी को 15 साल की कैद:गवाहों के मुकरने पर भी सजा, नौ साल पुराने मामले में फैसला

    6 hours ago

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    औरैया में विशेष न्यायाधीश पाक्सो अधिनियम अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र ने थाना दिबियापुर क्षेत्र में एक दस वर्षीय बालिका के साथ घिनौनी हरकत करने संबंधी करीब 09 वर्ष पुराने मामले में निर्णय सुनाया। इस घृणित मामले में जहां पुलिस ने एफआर लगाकर आरोपित को निर्दोष बताया। वहीं वादिनी के पक्ष में पक्षद्रोही बयान देकर उसे बचाने का भरसक प्रयास किया। लेकिन न्यायालय ने अपराध का होना पाकर दोषी डोरीलाल को 15 वर्ष के कठोर कारावास व 1.10 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। मामले को अभियोजन पक्ष से पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक पाक्सो मुदुल मिश्रा ने बताया कि वादिनी ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया। इसमें लिखा कि 19 मार्च 2017 को वह अपने पति के साथ कानपुर दवा लेने गई थी। उसकी 10 वर्षीय पुत्री घर पर अकेली थी। आरोप है कि डोरी लाल ने पुत्री को घर पर बुलाया व तख्त पर अपने साथ लिटा लिया। उसके साथ अश्लील हरकतें कर दुष्कर्म करने का पूर्ण प्रयास किया। किसी तरह नाबालिग पुत्री उसके चंगुल से भाई निकली। माता-पिता को पूरी बात बताई। पीड़िता के परिजनों ने आरोपित के परिजनों से उलाहना दिया। वह वह मारपीट पर अमादा हो गए व तमाम आरोप लगाते हुए जान से मारने की धमकी देने लगे। प्रार्थनापत्र में वादिनी ने लिखा कि आरोपित की दबंगई के कारण मुहल्ले में भय व्याप्त है। प्रार्थना पत्र पर पुलिस अधीक्षक ने उपनिरीक्षक को जांच कर मुकदमा पंजीकत करने व कार्रवाई का आदेश दिया। दौरान विवेचक ने वादिनी, उसके पति, पीड़िता व गवाहों के शपथ पत्र लगवाए। जिसमें घटना को मनगढंत बताया गया है। विवेचक ने साक्ष्य के अभाव में एफआर लगाकर न्यायालय में पत्रावली प्रस्तुत की। संगीन मामले में एफआर हैरानी हुई। तत्कालीन जज ने इस एफआर को निरस्त कर आरोपित को बिना प्रोटेस्ट के तलब किया। आरोपित काफी समय तक न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ। उच्चतम न्यायालय तक बचाव में पैरवी करता रहा। राहत न मिलने पर वह न्यायालय में उपस्थित हुआ। न्यायालय में उस पर दुष्कर्म, पाक्सो आदि में विचारण चला। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक पाक्सो मृदुल मिश्रा ने दोषी को कठोर सजा देने की बहस की। बचाव पक्ष ने एफआर, वादिनी पक्ष के पक्षद्रोही आदि का हवाला देकर उसे निर्दोष बताया। दोनों पक्षकारों को सुनने के बाद न्यायालय ने निर्णय सुनाया। अर्थदण्ड अदा न करने पर उसे 06 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। जमा कराई गई अर्थदंड की आधी धनराशि पीड़िता को अदा करने का भी आदेश दिया। दोषी को जिला कारागार इटावा भेज दिया गया।
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