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    नहीं संभाल सकते तो इस्तीफा दें या ट्रांसफर ले लें:संभल में हाईकोर्ट की DM-SP को फटकार; अफसरों ने कहा था मस्जिद में केवल 20 नमाजी आएंगे

    3 hours ago

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    संभल में के एक मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज ने कहा यदि एसपी और जिला कलेक्टर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें या तो इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर अपना तबादला मांग लेना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट कहा कि प्रशासन का काम व्यवस्था बनाए रखना है, न कि प्रतिबंध लगाकर समस्या से बचने की कोशिश करना और अदालत से राहत की उम्मीद करनी चाहिए। अदालत की इस टिप्पणी के बाद यह मामला प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने के यूपी प्रशासन के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने प्रशासन के आदेश को खारिज करते हुए कहा कि राज्य का दायित्व है कि हर समुदाय को अपने धार्मिक स्थल पर शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना या इबादत का अधिकार मिले। देखें 2तस्वीरें… अब विस्तार से जानें पूरा मामला यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुनाजिर खान की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। सुनवाई जस्टिस अतुल श्रीधरन और जिस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने की। याची की तरफ से बताया गया कि गाटा संख्या 291 पर रमजान के दौरान नमाज पढ़ने से रोका जा रहा है। याची के वकील ने कोर्ट को बताया कि उस जगह पर मस्जिद है और लोग वहीं नमाज अदा करते हैं। हालांकि कोर्ट ने यह भी नोट किया कि याची की ओर से अभी तक उस मस्जिद या नमाज की जगह की कोई फोटो कोर्ट में दाखिल नहीं की गई है। दूसरी ओर सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने नमाजियों की संख्या सीमित करने का आदेश दिया था। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से इस मामले में निर्देश लेने के लिए समय मांगा गया। वहीं याची की ओर से भी समय मांगा गया ताकि वह यह दिखा सके कि नमाज कहां अदा की जानी है। इसके लिए उसे नमाज की जगह की तस्वीरें और राजस्व रिकॉर्ड दाखिल करने के लिए पूरक शपथपत्र देने की अनुमति दी गई। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को तय करते हुए इसे फ्रेश केस के रूप में शीर्ष दस मामलों की सूची में लगाने का निर्देश दिया है। इस दौरान राज्य सरकार की तरफ से यह भी कहा गया कि गाटा संख्या 291 की जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद है। राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन मोहन सिंह और भूराज सिंह (दोनों सुखी सिंह के पुत्र) के नाम दर्ज बताई गई है। फिलहाल प्रशासन ने वहां सिर्फ 20 लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति दी है, जबकि याची का कहना है कि रमजान के कारण बड़ी संख्या में लोग नमाज पढ़ने आ सकते हैं। पहले भी तनाव का रहा है इतिहास बताया जाता है कि पिछले साल इसी इलाके में दंगे की घटना हुई थी। इसके बाद से प्रशासन संवेदनशील मौकों पर विशेष सतर्कता बरतता रहा है। रमजान माह के दौरान अलविदा जुमे की नमाज कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कराई गई थी। उस समय बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था और पूरे शहर की निगरानी सीसीटीवी कंट्रोल रूम से की गई थी। करीब 2500 से अधिक लोगों ने नमाज अदा की थी और अमन-शांति की दुआ की गई थी। अब हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद सबकी नजर प्रशासन की आगे की तैयारियों और फैसलों पर टिकी हुई है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। ---------------------------- ये भी पढ़ें- राहुल बोले- मनरेगा में 85% दलित-पिछडे़:15% का ब्यूरोक्रेसी-कॉरपोरेट पर कब्जा लखनऊ में दलित वोट साधने के लिए राहुल गांधी 35 मिनट तक बोले। मुद्दा कांशीराम जयंती का था, लेकिन राहुल के टारगेट पर मोदी सरकार थी। दलितों के सामने राहुल ने कांशीराम से ज्यादा नरेंद्र मोदी का नाम लिया। कहा-नरेंद्र मोदी देश के संविधान की विचारधारा को नहीं मानते। कभी अपोलो जाना, वहां डॉक्टर की नेम प्लेट देखना, कहीं पर 85% (दलित, पिछड़े) नहीं दिखेंगे। बड़ी कंपनियों के CEO में दलित, पिछड़े नहीं मिलेंगे। पढ़ें पूरी खबर…
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