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    नीली बत्ती में घूमने वाली बरेली की 3 बहनें अरेस्ट:एक शिकार ढूंढती थी, दूसरी माहौल बनाती, तीसरी फर्जी IAS बनकर लूटती थी

    12 hours ago

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    बरेली में फर्जी IAS अफसर बनकर ठगी करने वाली 3 बहनों को पुलिस ने पकड़ा है। इनमें से दो सगी बहनें और एक मामा की बेटी है। तीनों बहनें सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी करती थीं। एक बहन PHD कर चुकी है और पीसीएस प्री भी क्वालीफाई किया है। वहीं, दो अन्य बहनों ने एमए और बीएससी किया है। तीनों की शादी हो चुकी है। मामला बारादरी थाना क्षेत्र का है। अब जानिए पूरा मामला…. बारादरी थाने में नौकरी के नाम पर ठगी की कई शिकायतें आ रही थीं। एक शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की। मुखबिर की सूचना पर 27 अप्रैल को डेंटल कॉलेज रोड स्थित सार्वजनिक शौचालय के पास से तीन युवतियों डॉ. विप्रा शर्मा, दीक्षा पाठक और शिखा शर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनके पास से फर्जी दस्तावेज, 7 चेकबुक, आईफोन और एक सफेद रंग की XUV700 कार बरामद की। कार पर ‘ADM FR उत्तर प्रदेश सरकार’ लिखा था। पूछताछ में सामने आया कि युवतियों के बैंक खातों में करीब 55 लाख रुपए जमा हैं, जिन्हें फ्रीज कर दिया गया है। यह रकम लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करके जुटाई गई थी। फिलहाल पुलिस आरोपियों को कोर्ट में पेश कर रिमांड लेने में जुटी है। दो सगी और एक ममेरी बहन कर रही थीं ठगी बारादारी थाना क्षेत्र की रहने वाली शिखा शर्मा (40), विप्रा शर्मा (35) सगी बहनें हैं। दीक्षा पाठक (32) उनके मामा की बेटी है। तीनों की शादी हो चुकी है। शिखा शर्मा का तो तलाक भी हो चुका है। विप्रा और दीक्षा अपने पति के साथ रहती हैं। विप्रा शर्मा डबल एमए, पीएचडी और पीसीएस प्री क्वालीफाई कर चुकी है। वहीं, शिखा शर्मा ने एमए और दीक्षा पाठक ने बीएससी तक पढ़ाई की है। विप्रा शर्मा के साथ मिलकर ये दोनों साल- 2022 से ठगी कर रही थीं। तीनों बहनों ने अपना काम भी बांट रखा था। दीक्षा शिकार ढूंढती थी और शिखा माहौल बनाती थी। वहीं, विप्रा फर्जी अधिकारी बनकर 'फाइनल डील' करती थी। आरोपी बहनों का कहना है कि उन्हें नीली बत्ती और महंगे शौक करना अच्छा लगता था। इसलिए ठगी करके वे अपने शौक भी पूरे कर रही थीं। पकड़े जाने के बाद तीनों बहनों का कहना है कि वे पढ़ी-लिखी हैं। अभी तक कोई नौकरी नहीं मिली। नीली बत्ती गाड़ी में चलने और महंगी चीजें खरीदने का शौक है। इसलिए फर्जी अधिकारी बनकर रह रही थीं। ठगी के रुपए से इन लोगों ने एक मकान खरीदा था। वहां बैठकर वे फर्जी जॉइनिंग लेटर करती थीं। इसके अलावा एक सफेद रंग की महिंद्रा XUV700 कार भी खरीदी। 26 अप्रैल को दर्ज हुई थी शिकायत फाइक एन्क्लेव में रहने वाली प्रीति लयल ने 26 अप्रैल को बारादरी थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया- मेरी मुलाकात एक महिला से हुई। उसने अपना नाम शिखा पाठक बताया। शिखा पाठक ने मुझे बताया कि उसकी बहन डॉ. विप्रा शर्मा ADM FR है। वह पैसे लेकर सरकारी नौकरी लगवाती है। उसने UPSSSC के जरिए कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिलाने दावा किया। इस पर मैंने अपने परिचित आदिल खान, संतोष कुमार और मुशाहिद को भी इस बारे में बताया। चारों को नौकरी की जरूरत थी। इसलिए हम शिखा पाठक और विप्रा शर्मा से मिलने उनके घर गए। यहां उनके पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा भी मौजूद थे। नौकरी लगवाने के नाम पर चारों लोगों से मिलकर करीब 11 लाख रुपए नकद और बैंक के जरिए ले लिए। लखनऊ पहुंचने पर खुला फर्जीवाड़ा इसके बाद विप्रा शर्मा ने आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद यूपी, लखनऊ के नाम से फर्जी जॉइनिंग लेटर तैयार किए। उन्हें ई-मेल, डाक और वॉट्सएप के जरिए भेज दिया। ये पत्र राजस्व परिषद लखनऊ के नाम पर तैयार किए गए थे। इन पर कथित अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर भी थे। जब पीड़ित जॉइनिंग के लिए लखनऊ पहुंचे, तो वहां अधिकारियों ने साफ कर दिया कि ये सभी लेटर फर्जी हैं। इसके बाद पीड़ितों को ठगी का अहसास हुआ। जब पीड़ितों ने पैसे वापस मांगे तो तीनों बहनों ने धमकी दी। इसके बाद पीड़ितों ने बारादरी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने की धाराओं में केस दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस गैंग ने और कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया है। ---------------------- ये खबर भी पढ़ेंः- पुतला फूंकने में झुलसीं BJP विधायक से मिलने पहुंचे अखिलेश, देखकर मुस्कुराने लगीं; अखिलेश के पुतले में आग लगाते वक्त जली थीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव मंगलवार को अचानक मेदांता हास्पिटल पहुंचे। उन्होंने वहां भर्ती भाजपा विधायक अनुपमा जायसवाल का हाल जाना। अखिलेश ने हाथ जोड़कर नमस्कार किया तो अनुपमा मुस्कराने लगीं। अखिलेश ने विधायक का इलाज कर रहे डाक्टरों से बात भी की। पढ़ें पूरी खबर…
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