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    नीले और गुलाबी फूलों में विराजे बाबा आनंदेश्वर:शिवलिंग पर सजाए जरबेरा के फूल, वेदी पर चंदन के स्वास्तिक के साथ लगा फलों का महाभोग

    13 hours ago

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    कानपुर शहर के प्रसिद्ध और लाखों भक्तों की आस्था के केंद्र परमट स्थित बाबा आनंदेश्वर महादेव मंदिर में रविवार को भक्ति का एक बेहद अलौकिक नजारा देखने को मिला। रविवार दोपहर 2 बजे बाबा आनंदेश्वर (शिवलिंग) का बहुत ही भव्य और दिव्य श्रृंगार किया गया। नीले और गुलाबी फूलों से सजे महादेव के इस मनमोहक रूप को देखने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। महाश्रृंगार के तुरंत बाद गर्भगृह में भोलेनाथ की भव्य आरती उतारी गई, जिसके शंखनाद और जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा। नीलकमल की चादर और जरबेरा फूलों का मस्तक पर मुकुट रविवार को हुए इस विशेष श्रृंगार में प्रकृति और भक्ति का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। बाबा के पवित्र शिवलिंग को पूरी तरह से गहरे नीले रंग के सुंदर फूलों (अपराजिता और नीलकमल) से ढका गया था, जो दिखने में किसी नीलमणि की तरह चमक रहा था। शिवलिंग के सबसे ऊपरी भाग यानी शीर्ष पर हरी-भरी पत्तियों (बेलपत्र) और गहरे लाल-गुलाबी रंग के जरबेरा फूलों को मिलाकर एक बेहद खूबसूरत मुकुट का स्वरूप दिया गया था। नीले रंग के इस अद्भुत विग्रह के ऊपर पीले गेंदे के फूलों की माला और पीछे की तरफ सफेद रंग का रेशमी दुपट्टा बाबा की शोभा को कई गुना बढ़ा रहा था। वेदी पर सजे गुलाबी कमल और 'राम-राम' लिखे बेलपत्र शिवलिंग के साथ-साथ नीचे जलाधारी (वेदी) का भी बेहद अलौकिक श्रृंगार किया गया था। वेदी के चारों कोनों और किनारों पर बड़े-बड़े गुलाबी रंग के ताजे कमल के फूल सजाए गए थे, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो महादेव कमल के आसन पर विराजमान हों। इस दिव्य वेदी पर चारों तरफ हरे रंग के बड़े-बड़े बेलपत्र अर्पित किए गए थे, जिन पर लाल रंग से "राम राम" लिखा हुआ साफ दिखाई दे रहा था। शिव दरबार में राम नाम के इन बेलपत्रों को देखना श्रद्धालुओं के लिए बेहद भावुक और आनंदित करने वाला क्षण था। चंदन का पवित्र स्वस्तिक और फलों का लगा महाभोग मन्दिर के महंतों ने वेदी के ठीक केंद्र में पीले चंदन से एक पवित्र स्वस्तिक बनाया था। इस स्वस्तिक के चारों ओर ताजे हरे छोटे फलों (आंवला) की एक सुंदर गोलाकार श्रृंखला (माला) बनाई गई थी। पूरी वेदी को पीले सूरजमुखी, गेंदे, सफेद फूलों की पंखुड़ियों और नीले फूलों के सुंदर संयोजन से एक जीवंत कालीन यानी रंगोली की तरह सजाया गया था। बाबा के भोग के लिए चरणों में पीले रंग के मौसमी फल बहुत ही श्रद्धाभाव से अर्पित किए गए थे। बाबा आनंदेश्वर का यह शांत और मंगलकारी स्वरूप हर भक्त के मन को असीम शांति और सुकून देने वाला था।
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