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    नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग का इस्तीफा:वित्तीय लेनदेन पर उठे सवालों के बीच लिया फैसला, नई सरकार से दूसरा इस्तीफा

    9 hours ago

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    नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके निवेश और शेयर पर उठे सवालों के बीच उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए यह फैसला किया। ANI के मुताबिक उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच और हितों के टकराव से बचने के लिए पद छोड़ना जरूरी था। गुरुंग ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि हाल में उनके वित्तीय लेन-देन और शेयर को लेकर उठे सवालों को उन्होंने गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा, “मेरे लिए नैतिकता किसी भी पद से बड़ी है और जनता का भरोसा सबसे बड़ी ताकत है।” गुरुंग 26 मार्च से गृह मंत्री के तौर पर काम कर रहे थे। नेपाल की नई सरकार में यह दूसरा मामला है, जब किसी मंत्री को पद छोड़ना पड़ा है। इससे पहले 9 अप्रैल को श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपक कुमार साह अनुशासनहीनता के आरोप में हटा दिया था। मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी से संबंधो को लेकर विवाद स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुंग के एक कारोबारी दीपक भट्ट से संबंधों को लेकर सवाल उठे थे। दीपक भट्ट को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। भट्ट पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच चल रही है, जिसके बाद गुरुंग की वित्तीय गतिविधियों पर भी सवाल उठने लगे थे।गुरुंग ने कहा कि Gen Z आंदोलन देश में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा, “जब मेरे 46 साथियों के बलिदान से बनी सरकार पर सवाल उठते हैं, तो उसका जवाब नैतिकता ही है।” गुरुंग ने मीडिया, नागरिकों और युवाओं से भी ईमानदारी और सच्चाई के रास्ते पर चलने की अपील की। नेपाल में Gen Z आंदोलन का प्रमुख चेहरा थे गुरुंग गुरुंग सितंबर 2025 में हुए Gen Z आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे थे। हालांकि उनकी उम्र 36 साल है, जिस पर यह सवाल भी उठा कि वे Gen Z का हिस्सा नहीं हैं। उन्हें 27 मार्च को बालेंद्र शाह के नेतृत्व में बनी राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी की सरकार में गृहमंत्री बनाया गया। नियुक्ति के अगले ही दिन उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक की गिरफ्तारी के आदेश दिए थे। दोनों नेताओं को 28 मार्च की सुबह गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई 8 सितंबर को Gen Z प्रदर्शनों के पहले दिन हुई लापरवाही से हुई मौतों के मामले में जांच आयोग की सिफारिश पर हुई थी। हालांकि बाद में दोनों को रिहा कर दिया गया। बालेन शाह सरकार के विवादित फैसले भारत से आने वाले सामान पर सख्ती- नई सरकार ने 100 रुपये से ज्यादा कीमत वाले सामान पर अनिवार्य शुल्क लगा रही है। सीमा के लोग और व्यापारी का कहना है कि, यह फैसला आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ है। छात्र राजनीति पर रोक- सरकार ने कॉलेजों में छात्र संघों और राजनीतिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। छात्रों का कहना है कि यह उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। पूर्व नेताओं पर कार्रवाई- सत्ता में आते ही उन्होंने भ्रष्टाचार और पुरानी मौतों के मामलों में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और अन्य बड़े नेताओं के खिलाफ जांच और गिरफ्तारी के आदेश दिए, जिसे कुछ लोग बदले की राजनीति बता रहे हैं। शिक्षा में बदलाव- कक्षा 5 तक पारंपरिक परीक्षाएं खत्म करने का फैसला भी विवाद में रहा।
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