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    निशा विश्वकर्मा मौत मामला...पिता ने युवक पर जताया शक:मोबाइल देने के बाद तय कर दी थी शादी, 25 अप्रैल को आने वाले थे लड़के वाले

    7 hours ago

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    गाजीपुर जिले के करंडा थाना क्षेत्र के कटारिया गांव में 15 अप्रैल को हुई निशा विश्वकर्मा की मौत के मामले में नया मोड़ आया है। मृतका के पिता सियाराम विश्वकर्मा ने एक युवक हरिओम पांडे पर अपनी बेटी की मौत का शक जताया है। उन्होंने बताया कि हरिओम द्वारा निशा को मोबाइल दिए जाने के बाद उसकी शादी तय कर दी गई थी। सियाराम विश्वकर्मा के अनुसार, 14 अप्रैल की रात करीब 1:30 बजे जब वे खेत से गेहूं काटकर घर लौटे, तो निशा घर पर नहीं थी। तलाश के दौरान हरिओम से पूछताछ की गई। हरिओम ने पहले अनभिज्ञता जताई, लेकिन बाद में कहा कि वह निशा को घर छोड़ आया है। हालांकि, निशा घर नहीं पहुंची थी। सियाराम का आरोप है कि इस घटना के लिए हरिओम पांडे ही जिम्मेदार है। पिता ने बताया कि बाद में पुलिया पर उनकी बेटी का मोबाइल, चप्पल और गमछा मिला। इसकी जानकारी एक सहेली के फोन से हुई। इसके बाद मौके पर पहुंचकर डायल 112 को सूचना दी गई। सियाराम विश्वकर्मा ने बताया कि बेटी को एक लड़के द्वारा मोबाइल दिए जाने की बात सामने आने के बाद उन्होंने लगभग एक महीने पहले ही उसकी शादी की तैयारी शुरू कर दी थी। 25 अप्रैल को लड़के वाले निशा को देखने आने वाले थे। इस घटना के बाद 22 अप्रैल को राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गईं। समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने आने वाला था। इससे पहले ही सियाराम विश्वकर्मा ने प्रशासन को पत्र लिखकर सीमित संख्या में लोगों के आने की अपील की थी, ताकि गांव में तनाव और विवाद की स्थिति न बने। उसी दिन कांग्रेस पार्टी का भी एक छोटा प्रतिनिधिमंडल गांव पहुंचा था। इसी दौरान मलिकपुरा निवासी अनिल यादव और कुछ लोगों के बीच झड़प हो गई, जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। बाद में समाजवादी पार्टी का डेलिगेशन गांव पहुंचा, लेकिन अंबेडकर चौक पर महिलाओं ने विरोध करते हुए उन्हें रोक दिया। इसके बाद सपा नेता वहीं धरने पर बैठ गए और पीड़ित परिवार से मिलने की मांग करने लगे। पुलिस ने परिवार को धरना स्थल पर बुलाया, जहां बातचीत के दौरान अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गई, जिसमें करंडा थाना प्रभारी घायल हो गए। पिता सियाराम विश्वकर्मा ने इस बात को भी स्पष्ट किया कि डेलिगेशन को सीमित रखने के लिए लिखे गए पत्र पर किसी का दबाव नहीं था। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल गांव में शांति बनाए रखना था। साथ ही उन्होंने आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग की है। सियाराम ने पुलिस की अब तक की कार्रवाई पर संतोष जताते हुए कहा कि प्रशासन ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर सख्त सजा दिलाने का भरोसा दिया है, अब आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है।
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