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    NEET छात्रा का सुसाइड नोट- मेरा दिमाग मुझे डराता है:जिंदगी तबाह कर रहा; MBBS में सेलेक्शन के बाद भी गोली मारकर जान दी

    16 hours ago

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    प्रयागराज में सुसाइड करने वाली NEET छात्रा रितु शर्मा (18) का 8 पेज का सुसाइड नोट कमरे में मिला है। रितु ने सोमवार को पिता की पिस्टल से खुद को गोली मारकर जान दे दी थी। सुसाइड नोट में उसने लिखा है- दिनभर परेशान करने वाले ख्याल मेरे दिमाग में आते हैं। मैं ढंग से पढ़ाई नहीं कर पा रही हूं। एक ही चीज को बार-बार दोहराती हूं। ऐसा नहीं करने पर मेरा दिमाग मुझे डराता है कि कुछ बुरा हो जाएगा। अब मैं थक चुकी हूं। ये अनचाहे थॉट्स नकारात्मक और डरावने हैं। जो मेरी जिदंगी को पूरी तरह तबाह कर रहे हैं। इसलिए मैं सुसाइड कर रही हूं। रितु शर्मा का NEET की तीसरे राउंड की काउंसिलिंग में MBBS में चयन हो गया था। शाम 4:30 बजे उसका रिजल्ट आया था। उसे सोनभद्र में सरकारी मेडिकल कॉलेज मिला था। रितु पूरी रात पढ़ाई करती और दिन में सोती थी। दोपहर में ढाई-तीन बजे उठती थी। सोमवार को वह जब कमरे से बाहर नहीं निकली तो परिवार ने खिड़की से झांककर देखा तो उसकी लाश पड़ी थी। रितु का जुड़वां भाई ऋषिराज देहरादून के एक कॉलेज से बीटेक कर रहा है। पिता डॉ. देवराज राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से रिटायर्ड इंजीनियर हैं। पिता के नाम पिस्तौल और लाइसेंसी राइफल है। मामला झूंसी थाना क्षेत्र के त्रिवेणीपुरम का है। सुसाइड नोट में छात्रा ने क्या लिखा, वो पढ़िए- छात्रा ने लिखा- मुझे NEET 2025 और NEET 2026 में मिले अंकों के पीछे मेरी मानसिक समस्या एक बड़ा कारण है। मैं पिछले 2 सालों से ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD) जैसी समस्या से जूझ रही हूं। इसकी शुरुआत 11वीं और 12वीं कक्षा के दौरान हुई। पहले मुझे समझ नहीं आता था कि मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है। मैं इसे सामान्य ओवरथिंकिंग और एंग्जायटी समझती थी, लेकिन कुछ सप्ताह पहले इंटरनेट पर इसके बारे में पढ़ने के बाद मुझे पता चला कि मेरे अनुभव OCD के लक्षणों से मिलते-जुलते हैं। इस समस्या से मेरे दिमाग में बार-बार अनचाहे विचार और शंकाएं आती हैं। खासकर पढ़ाई करते समय ये विचार मुझे बहुत परेशान करते हैं। कई बार मैं किसी विषय को पहले ही अच्छी तरह पढ़ चुकी होती हूं। लेकिन मेरा दिमाग मुझे उसी चीज को दोबारा पढ़ने और समझने के लिए मजबूर करता है। मुझे डराता है कि अगर मैंने उसे बार-बार नहीं दोहराया, तो परीक्षा में मुझसे गलती हो जाएगी या मैं असफल हो जाऊंगी। जब मैं अपने दिमाग के कहे अनुसार बार-बार चीजें दोहराती या चेक करती हूं, तो मुझे कुछ समय के लिए मानसिक राहत मिलती है। मेरी घबराहट और डर थोड़े कम हो जाते हैं। लेकिन यह राहत स्थायी नहीं होती। कुछ समय बाद वही विचार और शंकाएं फिर आने लगती हैं। मैं चाहकर भी इससे बाहर नहीं निकल पा रही हूं। मैं खुद को असहाय, कमजोर और आत्मविश्वास की कमी से घिरा हुआ महसूस करती हूं। मुझे लगता है कि मैं दूसरों से पीछे रह गई हूं और शायद अपने जीवन के लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाऊंगी। छात्रा ने लिखा- मेरे साथ ही ऐसा क्यों कई बार मेरे मन में यह सवाल आता है कि "Why me? आखिर मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है? मैं बस अच्छे से पढ़ना चाहती हूं, सामान्य जिंदगी जीना चाहती हूं और एक शांत दिमाग चाहती हूं। अपनी पढ़ाई पूरी कर अपने करियर के लक्ष्य हासिल करना चाहती हूं। मुझे लगता है कि मैं इस OCD के साथ अपनी लाइफ में कभी कुछ बड़ा नहीं कर पाऊंगी। इसलिए मैं आखिर में सुसाइड कर रही हूं। मुझे माफ कर देना। सोनभद्र मेडिकल कॉलेज में मिली थी MBBS सीट रितु ने प्रयागराज में डीपीएस से 2022 में हाईस्कूल और 2024 में इंटरमीडिएट किया था। इसके बाद उसने NEET की तैयारी शुरू की थी। 2026 में हुए NEET एग्जाम में उसकी ऑल इंडिया रैंक 10,74,272 आई थी। सोमवार को उसे सोनभद्र के सरकारी मेडिकल कॉलेज में ईडब्ल्यूएस-दिव्यांग (EWPH) कोटा के तहत MBBS सीट आवंटित की गई है। रितु की आंखों में दिक्कत थी। इसलिए उसका दिव्यांग सर्टिफिकेट बना था। OCD के प्रमुख लक्षण इसमें एक ही तरह के विचार बार-बार आना, उन विचारों से चिंता या घबराहट होना और बेचैनी कम करने के लिए एक ही काम बार-बार करना शामिल है। जब ये विचार और आदतें व्यक्ति की पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों या रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने लगें, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। भास्कर इन्वेस्टिगेशन पढ़िए:- पढ़ाई-खर्च के लिए छात्र अपना खून बेच रहे, यूपी में नीट का छात्र बोला- खून तो बनता रहेगा; पढ़ाई का मौका फिर नहीं मिलेगा पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए छात्रों को अपना खून बेचना पड़ रहा है। गरीब परिवारों के इन बच्चों को नीट-एसएससी की महंगी कोचिंग, हॉस्टल-मेस की फीस भरनी होती है। पैसे जुटाने के लिए कोई छात्र महीने में 2 बार, तो कोई 4 बार अपना खून निकालकर बेचने को मजबूर है। पढ़िए पूरी इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट…
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