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    NHM कर्मचारियों ने राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन:पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग की

    17 hours ago

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    जौनपुर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा। संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश ने भारतीय मजदूर संघ के आह्वान पर सरकार से पारदर्शी और न्यायसंगत स्थानांतरण नीति लागू करने की अपील की है। कर्मचारियों ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इन सेवाओं में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम, रोग नियंत्रण, जन-जागरूकता और आपातकालीन सेवाएं शामिल हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी इन एनएचएम कर्मचारियों ने अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य योद्धाओं के रूप में निरंतर सेवाएं दी थीं। वर्तमान में बड़ी संख्या में एनएचएम कर्मचारी 10 से 20 वर्षों से अधिक समय से कार्यरत हैं। उनके अनुभव और दक्षता ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है, लेकिन इसके बावजूद वे सेवा सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा, वेतन विसंगति, स्थानांतरण नीति और भविष्य की स्थिरता जैसी मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित हैं। कर्मचारियों ने बताया कि भारत सरकार समय-समय पर राज्यों को स्थायी स्वास्थ्य मानव संसाधन विकसित करने, IPHS मानकों के अनुरूप पद सृजित करने और अनुभवी मानव संसाधन के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने के सुझाव देती रही है। इसी क्रम में कर्मचारियों ने अपनी मांगों पर सकारात्मक विचार करने का आग्रह किया है। उनकी प्रमुख मांगों में IPHS मानकों के अनुरूप स्थायी पब्लिक हेल्थ कैडर का गठन और सेवा सुरक्षा/नियमितीकरण नीति लागू करना शामिल है। विशेष रूप से, कर्मचारियों ने भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्पष्ट, ऑनलाइन और पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि रिक्त पदों के आधार पर प्रत्येक वर्ष स्थानांतरण का अवसर प्रदान किया जाए। महिला कर्मचारियों, दिव्यांग कर्मचारियों और विशेष परिस्थितियों वाले कर्मचारियों को स्थानांतरण में प्राथमिकता दी जानी चाहिए, और वर्षों से गृह जनपद से दूर कार्यरत कर्मचारियों को राहत प्रदान की जाए।
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