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    पीएम बेंजामिन नेतन्याहू 'इंटरनेशनल क्रिमिनल':सहारनपुर में मौलाना कल्बे जव्वाद बोले- भारत को बताना चाहिए, इजराइल से उसे क्या मिल रहा?

    8 hours ago

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    शिया मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जव्वाद नकवी रविवार को सहारनपुर पहुंचे। यहां वह एक मय्यत में शामिल हुए और श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने भारत की विदेश नीति, इजराइल से संबंध, अमेरिका के प्रभाव, चाबहार पोर्ट और महंगाई को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा- देश की जनता से अपील करना चाहता हूं कि सरकार से पूछें कि आखिर इजराइल से ऐसा क्या लाभ मिल रहा है, जिसके लिए ईरान और रूस जैसे पुराने सहयोगियों को पीछे छोड़ दिया गया। मौलाना ने कहा- देश में तेल और गैस की समस्या तथा बढ़ती महंगाई के पीछे भी ऐसी नीतियां जिम्मेदार हैं। भारत के कई फैसले अमेरिका और इजराइल के दबाव में लिए जा रहे हैं। इसका नुकसान देश की जनता को उठाना पड़ रहा है। जनता को सरकार से जवाब मांगना चाहिए कि इजराइल के साथ बढ़ती नजदीकियों से देश को क्या फायदा हो रहा है और पुराने सहयोगी देशों से दूरी क्यों बनाई जा रही है। अब पढ़िए मौलाना सैयद कल्बे जव्वाद नकवी की बड़ी बातें… भारत की विदेश नीति पर उठाए सवाल अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव पर मौलाना सैयद कल्बे जव्वाद नकवी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा- देश की जनता भी यह जानना चाहती है कि भारत को अमेरिका और इजराइल से ऐसा क्या लाभ मिल रहा है, जिसके चलते ईरान और रूस जैसे पुराने सहयोगी देशों से दूरी बढ़ती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि न तो भारत को इजराइल से तेल और गैस मिलती है और न ही वहां बड़ी संख्या में भारतीयों को रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। मौलाना का दावा था कि इजराइल का अस्तित्व काफी हद तक अमेरिका के समर्थन पर निर्भर है और वहां इस्तेमाल होने वाले अधिकांश हथियार भी अमेरिका से आते हैं। उन्होंने कहा कि भारत खुद भी रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा है और कई प्रकार के हथियार बना रहा है। मुस्लिम देशों से मिलने वाले लाभों का किया जिक्र मौलाना ने कहा- भारत को मुस्लिम देशों से तेल, गैस, यूरिया जैसी जरूरी चीजें मिलती हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में भारतीयों को वहां रोजगार भी मिलता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि इजराइल के साथ भारत की बढ़ती नजदीकियों का आधार क्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि इजराइल से भारत को केवल मुसलमानों के प्रति दुश्मनी की भावना मिल रही है, जबकि मुस्लिम देशों के साथ संबंध भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए अधिक उपयोगी साबित होते हैं। सरकार को देश की जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि इजराइल के साथ करीबी रिश्तों से भारत को क्या ठोस लाभ मिल रहा है। धर्म के नाम पर वोट मांगने वालों से रहें सावधान देश की जनता और अपने हिंदुस्तानी भाइयों से अपील करना चाहता हूं कि वे सरकार से पूछें कि आखिर इजराइल से ऐसा क्या लाभ मिल रहा है, जिसके लिए ईरान और रूस जैसे पुराने सहयोगियों को पीछे छोड़ दिया गया। उन्होंने दावा किया कि देश में तेल और गैस की समस्या तथा बढ़ती महंगाई के पीछे भी ऐसी नीतियां जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजराइल के दबाव में भारत अपने राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचा रहा है। उनका कहना था कि जनता को सरकार से इन मुद्दों पर जवाब मांगना चाहिए। ट्रंप और एप्स्टीन फाइल्स का किया जिक्र मौलाना ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र करते हुए दावा किया कि ट्रंप भी दबाव में हैं, क्योंकि उनका नाम एप्स्टीन फाइल्स में आया है। इसी वजह से अमेरिका को इजराइल की बात माननी पड़ती है। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत के नेता किस दबाव में हैं, यह भी देश को बताया जाना चाहिए। इजराइल को "फादरलैंड" तक कहा गया, जिससे कई सवाल खड़े होते हैं। चाबहार परियोजना में 10 हजार करोड़ खर्च हुए मौलाना ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को "इंटरनेशनल क्रिमिनल" बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय अदालत ने उन्हें मानवता का दुश्मन करार दिया है। उन्होंने कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे व्यक्ति से सम्मान लेकर आए हैं। यदि कोई दाऊद इब्राहिम से सम्मान लेकर आए तो लोग सवाल उठाएंगे, जबकि मेरे अनुसार नेतन्याहू पर उससे भी गंभीर आरोप लगे हैं। देश की कई परेशानियों की एक बड़ी वजह इजराइल के प्रति झुकाव है। भारत अमेरिका और इजराइल के निर्देशों का पालन कर रहा है। अमेरिका ने भारत से चाबहार परियोजना से दूरी बनाने को कहा। इस परियोजना में भारत के लगभग 10 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए थे, जो जनता के पैसे थे। क्या यह पैसा नेताओं ने अपनी जेब से लगाया था। चाबहार पोर्ट छोड़ने पर उठाए सवाल मौलाना ने कहा कि यदि भारत को चाबहार परियोजना का पूरा लाभ मिलता तो देश में तेल और गैस की कमी नहीं होती। उन्होंने सरकार से पूछा कि आखिर चाबहार परियोजना को क्यों छोड़ा गया और जनता के 10 हजार करोड़ रुपये की भरपाई कौन करेगा। अमेरिका और इजराइल नहीं चाहते थे कि भारत इस परियोजना को आगे बढ़ाए, इसलिए भारत को पीछे हटना पड़ा। उनके अनुसार इससे यह संदेश जाता है कि भारत के फैसले अमेरिका और इजराइल के प्रभाव में लिए जा रहे हैं। इन नीतियों से देश की जनता का नुकसान हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को गुमराह किया जा रहा है और भारत में अमेरिका तथा इजराइल का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। मौलाना ने कहा कि धर्म का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसका नुकसान हमेशा समाज को उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सत्ता हासिल करने के लिए धर्म का इस्तेमाल करना गलत है और वह इसके खिलाफ हैं। इस्लाम को लेकर यदि किसी के मन में गलत धारणाएं हैं तो उन्हें दूर किया जाना चाहिए और समाज में संवाद बढ़ाया जाना चाहिए। चार शादियों वाले दावे गलत मौलाना ने उन लोगों को चुनौती दी जो दावा करते हैं कि मुसलमान चार-चार शादियां करते हैं। पूरे देश में कोई ऐसा व्यक्ति दिखा दिया जाए, जिसकी चार पत्नियां हों। एक पत्नी की जिम्मेदारी निभाना ही कठिन होता है। उनके अनुसार कुछ कट्टरपंथी लोग हिंदू समाज को भ्रमित करने के लिए ऐसे मुद्दे उठाते हैं और लोगों को गुमराह करते हैं। धर्म का इस्तेमाल वही राजनीतिक दल करते हैं जो जनता के लिए जमीन पर काम करने में विफल हो चुके होते हैं। उनका कहना था कि जो दल विकास और जनहित के मुद्दों पर काम करते हैं, उन्हें धर्म का सहारा लेने की जरूरत नहीं पड़ती। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर मौलाना ने कहा कि जनता को उन राजनीतिक दलों से दूरी बनानी चाहिए जो धर्म के नाम पर राजनीति करते हैं या दंगे भड़काने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि मतदाताओं को ऐसे उम्मीदवारों और दलों का समर्थन करना चाहिए जो जनता के बीच रहकर काम करते हों, विकास को प्राथमिकता देते हों और समाज में सौहार्द बनाए रखने का प्रयास करते हों। -------------------------- ये खबर भी पढ़िए… योगी पर टिप्पणी करने वाला लंगड़ाते हुए थाने से निकला, मेरठ में कान पकड़कर माफी मांगी मेरठ में CM योगी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले 70 साल के शख्स को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी ने थाने में पुलिसवालों के सामने कान पकड़कर माफी मांगी। पुलिस जब उसे थाने से बाहर लेकर आई तो वह लंगड़ाता दिखा। उसने गिड़गिड़ाते हुए कहा कि गलती हो गई। अब ऐसा नहीं होगा। 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