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    पूजा के फूल-कपड़ों से बना रहीं पर्स-पोटली:कानपुर की निधि कुकरेजा का स्टार्टअप बना मिसाल, अमेरिका-जापान तक डिमांड

    9 hours ago

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    अक्सर पूजा के बाद चढ़ाए गए फूल, चुनरी और वस्त्र नदियों के किनारे कचरे में बदल जाते हैं। कानपुर की महिला उद्यमी निधि कुकरेजा ने इसी समस्या को अवसर में बदल दिया। उन्होंने ‘निर्वाण अपसाइकलर्स’ नाम से स्टार्टअप शुरू कर धार्मिक अपशिष्ट को उपयोगी और आकर्षक उत्पादों में बदलने की पहल की है। यह प्रयास जहां पर्यावरण को प्रदूषण से बचा रहा है, वहीं आस्था से जुड़ी सामग्रियों के सम्मान को भी बनाए रख रहा है। निधि बताती हैं कि मंदिरों में चढ़ने वाले फूल, कपड़े और अन्य सामग्रियां आमतौर पर विसर्जित कर दी जाती हैं। उनकी टीम इन वस्तुओं को इकट्ठा कर अपसाइकलिंग के जरिए नया रूप देती है। अब तक कानपुर समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से करीब 1000 किलो पूजा वेस्ट संग्रहित किया जा चुका है। इस पूरी प्रक्रिया में वेस्ट कलेक्शन से लेकर उत्पाद निर्माण तक कई लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। पुरानी चुनरी से पर्स-पोटली, कागज की जगह कपड़े के लिफाफे स्टार्टअप के तहत पुराने पूजा वस्त्रों से पर्स, पोटलियां और टिकाऊ बुक कवर तैयार किए जा रहे हैं। बाजार में मिलने वाले कागज के शगुन लिफाफों के विकल्प के तौर पर कपड़े के वॉशेबल लिफाफे बनाए जा रहे हैं, जिन्हें बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे कागज और प्लास्टिक की खपत कम हो रही है और पर्यावरण पर बोझ घट रहा है। आईआईटी के लिए प्लांटेबल फोल्डर और कंपोस्टेबल पेन नवाचार के तहत आईआईटी के लिए रिसाइकिल्ड कॉटन पेपर से विशेष फोल्डर तैयार किए गए हैं, जिनमें तुलसी के बीज डाले गए हैं। इस्तेमाल के बाद इन्हें मिट्टी में दबाने पर तुलसी का पौधा उग सकता है। इसके अलावा कंपनी कंपोस्टेबल पेन और पेंसिल भी बना रही है, जो पर्यावरण में आसानी से घुल-मिल जाती हैं। अमेरिका-जापान तक पहुंची मांग, किफायती भी उत्पाद निर्वाण अपसाइकलर्स के उत्पादों की मांग अब विदेशों तक पहुंच चुकी है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देशों में भी इनकी सप्लाई हो रही है। थोक में एक फोल्डर की कीमत करीब 150 रुपये और रिटेल में 235 रुपये है, जो गुणवत्ता के लिहाज से किफायती मानी जा रही है। निधि कुकरेजा की पहल यह साबित करती है कि सकारात्मक सोच के साथ आस्था और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। यह स्टार्टअप वेस्ट मैनेजमेंट, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है।
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