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    पाकिस्तानी सबा की जमानत याचिका पर सेशन कोर्ट करेगा सुनवाई:24 फ़रवरी की गई निर्धारित, निचली अदालत से हो चुकी ज़मानत ख़ारिज, धोखाधड़ी का आरोप

    9 hours ago

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    पाकिस्तानी महिला सबा फरहत की बेल निचली अदालत से खारिज होने के बाद अब सेशन कोर्ट से ज़मानत की उम्मीद जताई जा रही है। सबा के एडवोकेट की तरफ से सेशन कोर्ट में याचिका दायर की गई है। 24 फरवरी तारीख लगी है, जिसमें जिला जज याचिका पर सुनवाई करेंगे। पहले एक नजर पूरे मामले पर देहलीगेट निवासी रुकसाना ने पाकिस्तानी महिला सबा फरहत पर गैरकानूनी तरीके से भारत में रहने का आरोप लगाते हुए देहली गेट थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे के आधार पर पुलिस ने सबा को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से सबा फरहत को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। वर्तमान में सबा जिला कारागार मेरठ में बंद है। निचली अदालत से जमानत याचिका खारिज सबा फरहत की गिरफ्तारी के बाद उनके एडवोकेट वीके शर्मा ने कोर्ट में बहस की और मजबूती के साथ अपना पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट में स्पष्ट भी किया कि सबा की तरफ से कभी वोटर आईडी के लिए आवेदन नहीं किया गया है लेकिन वादी पक्ष ने अपोज किया। इसके बाद कोर्ट ने मामले को गंभीर बताते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी। 24 फरवरी को सेशन कोर्ट में सुनवाई सबा के एडवोकेट वीके शर्मा ने बताया कि जिस तरह के आरोप लगे हैं, उनका कोई मजबूत साक्ष्य अभी तक कोर्ट के समक्ष पेश नहीं किया गया है। वह 24 फरवरी को होने वाली सुनवाई के दौरान अपनी तरफ से कुछ साक्ष्य सेशन कोर्ट में प्रस्तुत करेंगे। इसके लिए उनकी तरफ से अतिरिक्त तैयारी की गई है। कई चौकाने वाली जानकारी सामने आई है, जिन्हें वह कोर्ट के समक्ष रखेंगे। आरोप : वादी महिला लालकुर्ती के केस में वांटेड एडवोकेट वीके शर्मा ने आरोप लगाया कि जिस महिला रुखसाना की तहरीर के आधार पर देहली गेट थाने में सबा और बेटी ऐमन के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है, वह महिला खुद एक मुकदमे में वांछित है। यह मुकदमा लालकुर्ती थाने में दर्ज है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो महिला खुद वांछित है, वह दूसरे के खिलाफ केस कैसे दर्ज करा सकती है? पुलिस को पहले उसे गिरफ्तार करना चाहिए था। बर्थ सर्टिफिकेट में धोखाधड़ी की धारा गलत एडवोकेट वीके शर्मा ने बताया कि उनके हाथ एक रूलिंग भी लगी है जो पुलिस की कार्रवाई पर सवालिया निशान लगाती है। उन्होंने बताया कि वादी पक्ष ने फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट का मुद्दा कोर्ट के समक्ष रखा था। दरअसल, ऐसे मामले में फोर्जरी की धारा लगती है, नाकि धोखाधड़ी की। इस रूलिंग में इसी का जिक्र किया गया है।
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