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    परीक्षा-तनाव दूर करने के लिए भांगड़ा करते स्कूल पहुंचा परिवार:बेटी को खुश करने के लिए परिवार ने निकाला अनूठा तरीका

    19 hours ago

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    बोर्ड परीक्षाओं के दौरान जहां अधिकतर छात्र-छात्राएं अंकों के दबाव और तनाव से घिरे रहते हैं, वहीं शहर के अशोक नगर निवासी निर्माण सिंह ने अपनी बेटी को इस मानसिक दबाव से मुक्त कराने का अनोखा तरीका निकाला। उन्होंने अपनी बेटी श्रोत कौर की दसवीं की परीक्षा समाप्त होने पर उसे ढोल, भांगड़ा और माला से मोटिवेट किया। परीक्षा केंद्र के बाहर बेटी को माला पहनाया और भांगड़ा किया। परिवार साथ बेटी को लेने पहुंचे स्कूल निर्माण सिंह अपनी बेटी को लेने परीक्षा केंद्र पहुंचे, लेकिन अकेले नहीं। उनके साथ पूरा परिवार ढोल और माला लेकर स्कूल पहुंच गया। जैसे ही श्रोत परीक्षा देकर बाहर निकली, परिवार ने ढोल बजाना शुरू कर दिया और जमकर भांगड़ा किया। बेटी को माला पहनाकर उसका स्वागत किया गया। यह देखकर न सिर्फ श्रोत बल्कि वहां मौजूद अन्य छात्राएं और अभिभावक भी हैरान रह गए। बेटी कुछ समझती की उससे पहले बजने लगा ढोल निर्माण सिंह ने बताया कि उनके बहनोई अमन रंधावा, बेटी की बुआ और उसकी मां परमीत कौर ढोल और माला लेकर पहले से तैयार थे। उन्होंने कहा, "बच्ची कुछ समझ पाती, उससे पहले ही हमने ढोल बजाना शुरू कर दिया। हम चाहते थे कि वह परीक्षा के तनाव से मुक्त होकर खुशी महसूस करे। हमने कभी भी उस पर अंकों को लेकर दबाव नहीं बनाया। पल भर में टेंशन हो गई दूर इस अनोखी पहल से श्रोत की टेंशन पल भर में दूर हो गई। श्रोत ने बताया, "मैं परीक्षा को लेकर काफी नर्वस थी, लेकिन परिवार ने जो किया, उससे मैं पूरी तरह टेंशन फ्री हो गई। मेरे परिवार ने कभी मुझे अंकों के लिए प्रेशर नहीं दिया, और आज के इस मोटिवेशन ने मेरा आत्मविश्वास और बढ़ा दिया है। बताया कि वह 10वीं में फातिमा कांवेंट की छात्रा है। नंबर के प्रेशर से बच्चों को रखें दूर छात्रा के पिता निर्माण सिंह ने बताया कि बेटी को नर्वस से दूर किया जाए, इसके लिए हम फूल माला और ढोल लेकर परीक्षा के बाद स्कूल पहुंच गए। हमने अपनी बच्ची को नंबर की दौड़ से दूर करते हुए खुश करने का काम किया है। मैं अभिभावकों को यही सलाह दूंगा कि वह अपने बच्चों को नंबर के प्रेशर से दूर रखें। परीक्षाएं तो आती जाती रहतीं छात्रा के फूफा अमन रंधावा ने बताया कि हमारा प्लान को कुछ नहीं था। लेकिन हमारी बेटियां बेटों से बढ़कर हैं। परीक्षाएं तो आती जाती रहती हैं। हमारा मकसद यही रहा है कि हमारी बेटी कभी किसी टेंशन में न रहे। जिंदगी एक ही बार मिली है। उसको खुलकर जियो।
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