Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    'प्रेमानंदजी जब तक ठीक नहीं होंगे, इंतजार करेंगे':बंगाल से आई भक्त बोली; संत की तबीयत में सुधार, सिर्फ चुनिंदा शिष्यों से ही मिल रहें

    18 hours ago

    2

    0

    महाराज जी अभी दर्शन नहीं दे रहे हैं। कोई बात नहीं, अभी हम सब यहां रुककर इंतजार करेंगे। मुझे राधा-रानी पर भरोसा है। जल्द ही प्रेमानंद महाराजजी स्वस्थ होंगे। फिर हम लोग आशीर्वाद लेकर घर जाएंगे। यह कहना है 1400 किमी दूर कोलकाता से वृंदावन आई महिला श्रद्धालु जूही भावनी का। इनकी तरह राजस्थान, असम, हरियाणा, उत्तराखंड, बिहार समेत कई राज्यों से भक्त प्रेमानंदजी के दर्शन करने पहुंच रहे हैं, लेकिन प्रेमानंदजी की तबीयत 10 दिनों से खराब है। इसलिए भक्त उनका दर्शन नहीं कर पा रहे हैं। सोमवार को प्रेमानंदजी का एक वीडियो सामने आया। इसमें उन्होंने भावुक अपील की। कहा- मैं रहूं या न रहूं, मेरी चिंता मत करिए। इसके बाद से शिष्य उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। इसी बीच, दैनिक भास्कर को आश्रम से जुड़े शिष्यों ने बताया- अब महाराजजी की तबीयत में सुधार हुआ है। वह सिर्फ चुनिंदा शिष्यों (शरणागत) से मिल रहे हैं। प्रेमानंद महाराजजी की दोनों किडनी खराब हैं। उनकी हफ्ते में 2-3 बार डायलिसिस हो रही है। दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने प्रेमानंदजी के वृंदावन स्थित आश्रम पहुंचकर भक्तों और सेवादारों से बात की। सबसे पहले प्रेमानंदजी की हूबहू भावुक अपील पढ़िए हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं। अंतिम बात यही है कि चिंता नहीं करनी। न यह चिंता करनी है कि कैसे हमारा उत्थान होगा। बिना बोले तुम्हारे दिमाग में हम होंगे। देख लेना, तुम वही करोगे जो गुरुदेव कहेंगे। आप बिल्कुल निश्चिंत रहिएगा। जो जहां जिस सेवा में आए, उस सेवा में रहिएगा। खूब नाम जप करो। मंगल होगा। तुम्हारे गुरुदेव तुम्हारे दिमाग में बैठे रहेंगे। आप निर्भय, निश्चिंत, निशोक होकर भजन करो। हमारा जब मन होगा, तब हम बोल देंगे। हम एकांतवास कर रहे हैं। एकांतवास आपके लिए है, हमारे लिए नहीं। हमारे लिए हम भजन नहीं कर रहे। हमारे लिए हमारा मौन नहीं है। हम आपको सही बताएं तो हमारा जो कुछ होना था, वह हो गया। जो कुछ हो रहा है, वह सब आपके लिए हो रहा है। खूब भजन करो, नाम जप करो, आश्रित रहो और सुखी रहो, प्रसन्न रहो। प्रेमानंदजी के दर्शन करने पहुंचे भक्तों ने क्या कहा, पढ़िए राजस्थान के जालम सिंह बोले- गुरुदेव हृदय के अंदर ही मिलेंगे 560 किमी दूर राजस्थान के पाली से वृंदावन आश्रम आए भक्त जालम सिंह ने कहा- संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए आए हैं। मुलाकात नहीं हुई। मोबाइल पर ही महाराजजी की बातें सुनने को मिल रही हैं। प्रेमानंदजी के भावुक संदेश पर जालम सिंह ने कहा- ध्यान करेंगे तो गुरुदेव हृदय के अंदर ही हैं। गुरुदेव ने जो ज्ञान के रास्ते बताए हैं, उसके हिसाब से चलेंगे तो गुरुदेव हृदय के अंदर ही मिलेंगे। 2 हजार किमी दूर से आए भक्त बोले- भगवान गुरुदेव को स्वस्थ करें 2 हजार किमी दूर असम से वृंदावन आए भक्त ओमप्रकाश ने कहा- महाराजजी मेरे सर्वेसर्वा हैं। उनका जो वीडियो आया है, उसमें वह बताना चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा राधा नाम से जुड़ें। नाम जप करें। इससे आपको दुखों से मुक्ति मिलेगी। उनके स्वास्थ्य को लेकर हम बहुत चिंतित हैं। मन से भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि जल्द से जल्द हमारे गुरुदेव को स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें। भावुक अपील पर सेवादार बोले- वीडियो सुनकर महाराजजी के भाव समझिए भास्कर रिपोर्टर ने प्रेमानंदजी के केली कुंज आश्रम में मौजूद सेवादारों से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने ऑन कैमरा कुछ भी कहने से हाथ जोड़कर इनकार कर दिया। हालांकि ऑफ कैमरा बातचीत में एक सेवादार ने बताया कि फिलहाल प्रेमानंद महाराज दर्शन नहीं दे रहे हैं। एकांत भजन में लीन हैं। महाराजजी की भावुक अपील के सवाल पर उन्होंने कहा- लोग पूरा वीडियो सुनें, तभी महाराजजी का भाव सही तरह से समझ पाएंगे। यह वीडियो आश्रम के ‘श्री हित राधा कृपा’ यूट्यूब चैनल पर भी उपलब्ध है। प्रेमानंद की बीमारी के बारे में पढ़िए 2006 में पेट में दर्द हुआ तो पता चला किडनी खराब हैं प्रेमानंद महाराज को पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज की बीमारी है। इसकी जानकारी 19 साल पहले 2006 में तब हुई, जब उनके पेट में दर्द हुआ। वह कानपुर में डॉक्टर को दिखाने पहुंचे। डॉक्टर ने उन्हें बताया कि उन्हें किडनी की आनुवांशिक बीमारी है। इसके बाद वह दिल्ली गए और वहां एक डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने उन्हें बताया कि उनकी दोनों किडनी खराब हैं और जीवन सीमित है। इसके बाद वह वृंदावन आ गए। पहले वह काशी में रहे और शिव भक्ति की। वृंदावन में उन्होंने राधा नाम का जप शुरू किया। तब से वह लगातार राधा नाम का जप कर रहे हैं। प्रेमानंद महाराज ने अपनी किडनियों का नाम कृष्णा और राधा रखा है। फ्लैट में ही होती है डायलिसिस प्रेमानंद महाराज वृंदावन की श्री कृष्ण शरणम् सोसाइटी में रहते हैं। इस सोसाइटी में उनके दो फ्लैट 209 और 212 हैं। इनमें से एक फ्लैट में वह रहते हैं, जबकि दूसरे फ्लैट में डायलिसिस का इंतजाम है। इसी फ्लैट में उनका डायलिसिस होता है। किडनी की बीमारी से जूझ रहे संत प्रेमानंद महाराज की पहले कभी-कभी डायलिसिस होती थी। फिर यह हफ्ते में होने लगी। इसके बाद कभी तीन दिन, कभी पांच दिन और कभी-कभी हर दिन डायलिसिस होने लगी। डायलिसिस की यह प्रक्रिया 4 से 5 घंटे तक चलती है। 17 मई से नहीं कर रहे पदयात्रा, 3 दिन पहले वराह घाट गए थे संत प्रेमानंद महाराज की रात में होने वाली पदयात्रा पिछले 10 दिन से स्थगित है। 17 मई की रात हजारों की संख्या में भक्त महाराज जी के दर्शन के लिए पहुंचे थे, लेकिन प्रेमानंदजी हर दिन की तरह तड़के 3 बजे पदयात्रा पर नहीं निकले। उनकी जगह उनके शिष्य पहुंचे। शिष्यों ने लाउडस्पीकर से अनाउंस कर बताया- आप सभी से निवेदन है कि महाराजजी का स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण आज से पदयात्रा रद्द की जा रही है। कृपया रोड किनारे खड़े होकर भीड़ न लगाएं। इसके बाद भक्तों को महाराजजी के दर्शन किए बिना मायूस लौटना पड़ा। हालांकि, 3 दिन पहले संत प्रेमानंद महाराज अपने केली कुंज आश्रम से निकलकर वराह घाट स्थित गुरु संत गोविंद शरण महाराज के दर्शन करने उनके आश्रम गए थे। डेढ़ किमी पैदल चलकर जाते थे प्रेमानंद महाराज तबीयत खराब होने से पहले संत प्रेमानंद महाराज तड़के 3 बजे केली कुंज आश्रम से सौभरी वन के लिए निकलते थे। डेढ़ किमी पैदल चलकर जाते थे। प्रेमानंद महाराज जब पदयात्रा पर निकलते हैं तो उनके दर्शन के लिए हजारों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं। आम दिनों में यह संख्या करीब 20 हजार के करीब होती है। वीकेंड और बड़े पर्वों पर दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या कई गुना बढ़कर लाखों में पहुंच जाती है। शरणागत शिष्यों के बारे में पढ़िए, जिनसे प्रेमानंदजी मिल रहे प्रेमानंद महाराज के आश्रम में शरणागत बृजवासी शिष्य वे भक्त होते हैं, जिन्होंने अपना जीवन पूरी तरह गुरु और राधा-कृष्ण की भक्ति को समर्पित कर दिया होता है। ये लोग स्थायी रूप से वृंदावन या ब्रज क्षेत्र में रहते हैं और आश्रम के नियमों का पालन करते हुए भजन, सेवा और साधना करते हैं। अब संत प्रेमानंद महाराज की कहानी 13 साल की उम्र में घर छोड़ा प्रेमानंद महाराज का जन्म यूपी में कानपुर जिले की नरवल तहसील के अखरी गांव में हुआ था। पिता शंभू नारायण पांडे और मां रामा देवी हैं। 3 भाई हैं, प्रेमानंद मंझले हैं। बचपन में प्रेमानंद जी का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। वह बचपन से ही आध्यात्मिक रहे। कक्षा 8 तक पढ़ाई की है। बचपन में अनिरुद्ध ने अपनी सखा टोली के साथ शिव मंदिर के लिए एक चबूतरा बनाना चाहा। इसका निर्माण भी शुरू करवाया, लेकिन कुछ लोगों ने रोक दिया। इससे वह मायूस हो गए। उनका मन इस कदर टूटा कि घर छोड़ने का फैसला कर लिया। वह कानपुर होते हुए काशी पहुंचे। जब 13 साल के हुए तो उन्होंने ब्रह्मचारी बनने का फैसला किया। शुरुआत में प्रेमानंद महाराज का नाम 'आरयन ब्रह्मचारी' रखा गया। काशी में उन्होंने करीब 15 महीने बिताए। उन्होंने गुरु गौरी शरण जी महाराज से गुरुदीक्षा ली। फिर वह मथुरा आ गए। संन्यासी से राधावल्लभी संत बन गए प्रेमानंद महाराज प्रेमानंद महाराज वृंदावन पहुंचकर हर रोज बांके बिहारी जी के दर्शन करते। फिर रासलीला रास आई और राधावल्लभ के कार्यक्रमों में जाने लगे। वहां घंटों खड़े रहते। एक दिन एक संत ने श्री राधारससुधानिधि से एक श्लोक पढ़ा, लेकिन महाराज उसे समझ नहीं पाए। फिर एक दिन वृंदावन की परिक्रमा करते समय एक सखी को एक श्लोक गाते हुए सुना। उसे सुनकर महाराज ठिठक गए। श्लोक ऐसा रास आया कि अपना संन्यास धर्म तोड़कर वो उस सखी के पास गए। उससे श्लोक का मतलब पूछा। सखी ने कहा- इसका मतलब समझने के लिए राधावल्लभी होना जरूरी है। इस तरह महाराज राधावल्लभी हो गए। ------------------------------------ ये खबर भी पढ़िए- यूपी में बिजली संकट से आक्रोश, भाजपा विधायक सहमे: ऊर्जा मंत्री को चिट्ठियां लिख रहे, एक्शन में योगी; जानिए कटौती मजबूरी क्यों यूपी में एक तरफ पारा रोज नए रिकॉर्ड छू रहा है, वहीं शहर से लेकर गांव तक 'पावर कट' से जनता में हाहाकार है। यूपी पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) ने 30 हजार मेगावाट से ज्यादा बिजली सप्लाई करके रिकॉर्ड बनाया। लेकिन, लोगों की जरूरत भर की बिजली नहीं दे पा रहा है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के डर से भाजपा के अपने विधायक भी इस कदर सहमे हुए हैं कि वे ऊर्जा मंत्री को सीधे चिट्ठियां लिख रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…
    Click here to Read more
    Prev Article
    ऊर्जा मंत्री गुलदस्ता लेकर छापा मार रहे:गोली खाकर हंसता रहा हिस्ट्रीशीटर, विधायक जी ने 4 मौतों की कीमत लगाई
    Next Article
    प्रेमानंदजी की भावुक अपील-मेरी चिंता छोड़िए, हम बोलें न बोलें:जो कुछ होना था, वो हो गया; बीमारी के चलते 10 दिन से पदयात्रा बंद

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment