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    प्रतापगढ़ में तालाब में डूबे 3 भाई-बहन:परिवार को नहीं मिलीं सरकारी योजनाएं, पक्की छत और राशन कार्ड का अभाव

    8 hours ago

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    प्रतापगढ़ के कंधई थाना क्षेत्र के साहिलपुर कंजास गांव में तालाब में डूबने से तीन सगे भाई-बहनों की मौत हो गई। यह घटना एक गरीब परिवार से जुड़ी है, जिसे सालों से सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया था और बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित था। मृतक बच्चों के पिता विजय बहादुर यादव का परिवार लंबे समय से आर्थिक तंगी का सामना कर रहा था। करीब 15 साल पहले जमीन विवाद के कारण उन्हें अपना पैतृक घर छोड़ना पड़ा था। इसके बाद परिवार किराए के मकानों और अन्य जगहों पर भटकते हुए जीवन यापन कर रहा था। वर्तमान में वे ग्राम सभा की जमीन पर एक झोपड़ी बनाकर रह रहे थे। परिवार के पास न तो पक्की छत थी और न ही राशन कार्ड जैसी मूलभूत सरकारी सुविधाएं। कुछ समय पहले विजय बहादुर लकवाग्रस्त हो गए थे, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई। उनके इलाज में जो थोड़ी-बहुत जमा पूंजी थी, वह भी खर्च हो गई। इसके बाद परिवार दूसरों की मदद और उधार के सहारे जीवन यापन कर रहा था। घर में विजय बहादुर की पत्नी कुसुम, आठ माह का एक बेटा और तीन बच्चे रानी (12), मोहित (8) और रोहित (7) थे। उनके बड़े भाई जयराम भी परिवार के साथ रहते थे। सोमवार सुबह करीब 10 बजे रानी अपने दोनों भाइयों मोहित और रोहित के साथ गर्मी से राहत पाने के लिए पास के तालाब में नहाने गई थी। नहाते समय अचानक छोटा भाई रोहित गहरे पानी में चला गया। उसे बचाने के प्रयास में मोहित और बहन रानी भी तालाब के गहरे हिस्से में डूब गए। काफी देर तक जब बच्चे घर नहीं लौटे, तो उनकी मां कुसुम उन्हें खोजने निकलीं। इसी दौरान गांव के एक युवक ने तालाब में एक बच्चे का शव उतराता देखा और शोर मचाया। ग्रामीणों की मदद से पहले रोहित, फिर मोहित और रानी के शवों को तालाब से बाहर निकाला गया। हालांकि, तब तक तीनों की मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद तीनों बच्चों का देर शाम अंतिम संस्कार किया गया। बताया जाता है कि सई नदी के किनारे बेला देवी घाट पुल के पास तीनों को दफनाया गया। इस दौरान पिता विजय बहादुर और बड़े भाई जयराम शवों से लिपटकर बिलखते रहे। घटना की जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री ने मामले का संज्ञान लिया है और अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है। यह हादसा एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि आखिर क्यों जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाता। गांव में इस घटना के बाद गहरा शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।
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