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    परिवार ने मांगी इच्छामृत्यु, हरीश राणा एम्स में शिफ्ट:गाजियाबाद से हरीश दिल्ली ले जाए गए, डॉक्टर शुरु करेंगे आगे की प्रकृिया

    11 hours ago

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    गाजियाबाबद में 13 साल से कोमा में पड़े हरीश राणा को दिल्ली के एम्स में शिफ्ट किया गया है। हालांकि परिवार ने शिफ्ट करने के पीछे बहुत ही गोपनीय तरह से काम किया। पड़ोसी और सोसायिटयों को भनक तक नहीं लगने दी। गाजियाबाद की राज एम्पायर सोसायटी के पदाधिकारियों को भी नहीं बताया गया। शनिवार सुबह से ही देर शाम तक उनके फ्लैट पर ताला लटका रहा। एक करीबी ने बताया कि प्राइवेट गाड़ी से परिवार के लोग उन्हें ले गए। मां, बहन और भाई भावुक होकर रोने लगे हरीश राणा को जब गाजियाबाद स्थित किराए के फ्लैट से एम्स ले जाया गया तो उस समय हरीश की मां, छोटा भाई और बहन भावुक हो गए। इतना बताया कि मां और पिता अशोक राणा ने कहा कि हम सबसे माफी मांगते हैं, ऊपर वाले ने यह सब हमें देखने के लिए दिया। हम यही चाहते हैं कि हमारा बेटा जहां भी रहे, जिस परलोक में रहे हमेशा हम उसे भूल नहीं पाएंगे। हमारे करीबियों, रिश्तेदारों, डॉक्टरों, कोर्ट में हमारी पैरवी करने वाले वकीलों और सभी ने हमारा बहुत सहयोग किया। हम सभी के इस सहयोग के आभारी रहेंगे। एम्स में शिफ्ट होने के बाद बहन देर शाम अपने फ्लैट पर आईं। भाई और परिवार के लोगों ने कुछ नहीं बताया। एम्स की एक वीडियो भी सामने आई है। यहां पूरी प्रकिया के बार उनके लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाए जाएंगे। जिसके बाद इच्छा मृत्यू दी जाएगी। 13 साल से हरीश को कोई ठीक हनीं कर पाया। ब्रह्मकुमारी परिवार से जुड़ा राणा परिवार ब्रह्मकुमारी परिवार से जुड़े राणा परिवार ने अपना दर्द दीदी से साझा किया तो उन्होंने एक वकील भेजा। राणा कहते हैं, 'हाईकोर्ट ने तो हमारी याचिका खारिज ही कर दी थी, पर सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी देकर हरीश पर बड़ा उपकार किया। हमसे उसकी पीड़ा देखी नहीं जाती, बेबसी ये है कि वह बता भी नहीं पाता कि उसे कहां-क्या तकलीफ है। हमारा तो बच्चा है, सेवा कर रहे हैं और जब तक सामर्थ्य है करते ही रहेंगे। कोर्ट के फैसले के बाद एम्स ने सभी तैयारी कर ली है। बस हमें तय करना है कि उसे आखिरी बार इस बिस्तर से उठाकर कब एम्स ले चलें। हम तो इसे पैसिव यूथेनेशिया भी नहीं बोलना चाहते। हम इसे भगवान की गोद में छोड़ रहे है। हम उसे ऐसे अनुभवी डॉक्टरों के पास छोड़ रहे हैं जो उसे घातक इंजेक्शन नहीं देंगे। बल्कि प्राकृतिक रूप से जीवन छोड़ने का रास्ता सुगम करेंगे। एम्स में अनुभवी डॉक्टरों की निगरानी में सिर्फ फूड पाइप हटाएंगे। हम उसे पानी पिलाते रहेंगे, जैसे कोई व्रत करता है। जब हरीश प्राण त्याग देगा तो बहुत सम्मान से घर लाएंगे और उसे अंतिम विदाई देंगे। मां के आंसू नहीं सूख पाते मां चुप हैं, एकदम भावशून्य चेहरा, न खुशी कि बच्चे को मुक्ति मिल रही है और न गम कि आखिरी घड़ी आ पहुंची। हालांकि, कुछ बोलते ही फफक पड़ती हैं... कौन मां-बाप अपने बच्चे को इस स्थिति में ले जाना चाहेगा। जिसे जन्म दिया, पाल-पोसकर बड़ा किया। फिर से अबोध की तरह उसकी देखभाल करनी पड़ी तो उसमें मां को कष्ट कैसा। दुख तो बस इस बात का रहा कि इसने तो अपनी पीड़ा भी नहीं बताई। सुबह-शाम जब उसकी मालिश करती तो मैं उसे घर के किस्से सुनाती आज क्या-क्या हुआ? कई बार घंटों तक बस इंतजार करती कि एक बार बस पलक झपके ताकि मुझे लगे कि उसने सब सुन लिया। कभी उबासी लेता, कभी छींक आती या आंखों के आसपास की त्वचा फड़कती तो हमें उसी से उसके जिंदा होने का सुकून होता था।
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