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    पशुचर भूमि पर कब्जे का आरोप, ग्रामीणों का प्रदर्शन:सिद्धार्थनगर कलेक्ट्रेट पहुंचकर डीएम को सौंपा ज्ञापन, अतिक्रमण हटाने की मांग

    1 hour ago

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    सिद्धार्थनगर जिले के इटवा तहसील क्षेत्र के खैराखास गांव से सोमवार को लगभग 40 महिला-पुरुष कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने पशुचर भूमि पर कथित अवैध कब्जे के विरोध में प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन सौंपकर सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग की। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे खैराखास निवासी कमलेश पुत्र सीताराम ने बताया कि गांव में गाटा संख्या 7 पशुचर (चरागाह) भूमि के रूप में दर्ज है, जो गाटा संख्या 9 से सटी हुई है। आरोप है कि क्षेत्र के मदलहवा गांव के एक व्यक्ति द्वारा गाटा संख्या 7 और 9 में जबरन मिट्टी पटवाकर पशुचर की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, यह भूमि वर्षों से गांव के पशुओं के चरने के लिए उपयोग में आती रही है और पूरे गांव की साझा संपत्ति है। ग्रामीणों ने बताया कि पशुचर भूमि पर लगभग 200 से 300 बड़े-बड़े पेड़ लगे हुए थे। आरोप है कि इनमें से 22 पेड़ों को अवैध रूप से काटकर हटा दिया गया और उनकी लकड़ी को अन्यत्र भेज दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए कहा कि बिना अनुमति पेड़ों की कटान पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है। ग्रामीणों के अनुसार, मिट्टी पटाई का कार्य रात में लगातार कराया जा रहा है। जब गांव के लोगों ने इसका विरोध किया, तो कथित कब्जा करने वाले पक्ष के लोग मारपीट पर उतारू हो गए और धमकी दी। इससे गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है। महिलाओं ने भी प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो पशुचर भूमि पूरी तरह से कब्जे में चली जाएगी। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट परिसर में नारेबाजी कर प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने राजस्व विभाग की टीम भेजकर भूमि का सीमांकन कराने, अतिक्रमण हटाने और पेड़ों की अवैध कटान की जांच कराने की मांग की। साथ ही, दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की अपील भी की गई।\ ज्ञापन प्राप्त करने के बाद अधिकारियों ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार शिकायत के आधार पर राजस्व व संबंधित विभागों की टीम मौके पर भेजी जाएगी और तथ्यात्मक जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल खैराखास गांव में इस मुद्दे को लेकर चर्चा और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पशुचर भूमि गांव की अमानत है और इसे किसी भी कीमत पर अतिक्रमण से मुक्त कराया जाना चाहिए। अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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