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    पत्नी और बहू-बेटों की सियासत में एंट्री को छटपटाए नेताजी:वेस्ट यूपी में नेताओं की अगली पीढ़ी को जिला-महानगर कमेटियों में एडजस्ट करने का प्रेशर

    2 hours ago

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    वेस्ट यूपी में भाजपा के कुछ दिग्गज नेता अपनी अगली पीढ़ी को सियायस की सीढ़ी चढ़ाने के लिए छटपटा रहे हैं। इसके लिए संगठन में पत्नी, बहू और बेटों के लिए जगह बनाने की कवायद चल रही है। 6 साल के लंबे अंतराल के बाद वेस्ट यूपी में जिला और महानगर कमेटियों का गठन होने जा रहा है। जिला और महानगर अध्यक्षों को 27 फरवरी से पहले ये टास्क पूरा करने की हिदायत है। लेकिन बडे़ नेताओं की पत्नी, बहू और बेटों को एडजस्ट करने के प्रेशर ने नए संगठन की सूची एक बार फिर लटका दी है। बता दें कि 2019 के बाद से भारतीय जनता पार्टी के जिला और महानगर स्तर के संगठन का पुनर्गठन नहीं हुआ है। 2019 में तत्कालीन जिला और महानगर अध्यक्षों ने जो टीमें बनाई थीं, वही टीमें अभी तक चली आ रही हैं। 2022 में जिला और महानगर अध्यक्ष तो बदले लेकिन उन्होंने अपना पूरा कार्यकाल पुरानी टीमों के सहारे ही पूरा कर दिया। पूरे वेस्ट यूपी के यही हालात हैं। सूत्र बताते हैं कि 2022 में जिला और महानगर अध्यक्षों को निर्देश थे कि वे नई टीम बनाने के बजाए पुरानी टीम से ही काम लें। इसलिए चाहकर भी जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष अपनी नई टीमें नहीं बना सके थे। इसके बाद 2025 में फिर से जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष तो बदल दिए गए लेकिन टीम अभी तक वही 2019 वाली चली आ रही है। भाजपा के एक बड़े नेता ने दैनिक भास्कर से कहा- अब शीर्ष नेतृत्व ने नई टीमों के गठन का निर्देश दिया है। 27 फरवरी से पहले जिले और महानगरों में नई टीमें गठित करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। वेस्ट यूपी के एक कद्दावर भाजपा नेता कहते हैं, संगठन के पुनर्गठन में इसलिए भी देरी हो रही है क्योंकि भाजपा के कुछ नेता अपनी अगली पीढ़ी को संगठन के रास्ते सियासत की सीढ़ी चढ़ाना चाहते हैं। किसी को अपनी बहू को एडजस्ट कराना है तो कोई पत्नी-बेटे को संगठन में पद दिलाना चाहता है। ऐसे में जिला और महानगर अध्यक्षों के सामने इन स्थापित नेताओं को NO बोलने की चुनौती है। परिवारवाद को लेकर शिकायतें प्रदेश से लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंच रही हैं। बात मुरादाबाद की करें तो यहां मेयर विनोद अग्रवाल अपनी बहू प्रिया अग्रवाल के लिए राजनीति का रास्ता क्लियर करना चाहते हैं। 2 बार विनोद अग्रवाल की पत्नी बीना अग्रवाल मेयर रहीं। बीना के निधन के बाद 3 टर्म से विनोद अग्रवाल मेयर हैं। अब वे अपनी बहू प्रिया अग्रवाल को विधायक या मेयर की कुर्सी पर देखना चाहते हैं। नगर निगम के चुनाव में काफी वक्त है, इसलिए उनकी भी पहली कोशिश यही है कि प्रिया को संगठन में कहीं एडजस्ट करा दें। दूसरी ओर भाजपा के शहर विधायक रितेश गुप्ता हैं। उनकी पत्नी अल्पना रितेश गुप्ता भी पिछले काफी समय से राजनीति में सक्रिय नजर आ रही हैं। सूत्र बताते हैं कि शहर विधायक भी अपनी पत्नी को संगठन में किसी महत्वपूर्ण पद पर एडजस्ट कराना चाहते हैं ताकि उनकी पत्नी अल्पना गुप्ता का सियासी सफर शुरू हो सके। मुरादाबाद की कुंदरकी सीट से उपचुनाव जीतकर विधायक बने ठाकुर रामवीर सिंह के बेटे विक्की ठाकुर ने तो विधायक की जगह कार्यक्रम भी अटैंड करने शुरू कर दिए हैं। रामवीर अपने बेटे को अभी से अपनी सियासी विरासत के लिए तैयार कर रहे हैं। उनका बेटा तमाम सियासी मंचों पर नजर आता है। कांठ से भाजपा के पूर्व विधायक राजेश सिंह उर्फ चुन्नू ने भी अपने बेटे के लिए सियासी राह बनानी शुरू कर दी है। मुरादाबाद के दिवंगत भाजपा नेता पूर्व सांसद कुंवर सर्वेश सिंह अपने जीते जी अपने बेटे सुशांत सिंह को सियासत में स्थापित कर गए। सुशांत दो बार से बढ़ापुर सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक हैं। अब चर्चा है कि सर्वेश सिंह की पत्नी साधना सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ सकती हैं। ठाकुरद्वारा में ही भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह चौहान अपने बेटे अमित की राजनीति में एंट्री की हसरत रखते हैं। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह अपने बेटे को संगठन में छोटे पद से शुरू करके स्टैप बाई स्टैप आगे बढ़ा रहे हैं। शुभम ने भाजपा युवा मोर्चा से सियासत में एंट्री की। कार्यकर्ता के रूप में जुड़े और फिर भाजयुमो में जिले की टीम में महामंत्री बने। संभल की बात करें तो मंत्री गुलाब देवी अपनी दोनों बेटियों को राजनीति में आगे बढ़ा चुकी हैं। एक बेटी भाजपा में प्रवक्ता है तो दूसरी ब्लॉक प्रमुख। मंत्री के पति भी राजनीतिक पद पर हैं। नोएडा की बात करें तो रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज चौधरी सियासत मे स्थापित हो चुके हैं। अब उनके दूसरे बेटे नीरज की भाजपा संगठन के रास्ते सियासत में एंट्री की चर्चाएं हैं। बुलंदशहर में पूर्व मंत्री अनिल शर्मा अपने बेटे को सियासत में एंट्री दिलाने की कवायद में जुटे हैं। हापुड़ की जिलाध्यक्ष कविता मादरे की टीम में तो उनके पति ही महामंत्री हैं। अब नई टीम में कविता मादरे को तय करना है कि पति को रखना है या टीम से आउट करना है। नेताओं के अगली पीढ़ी को सेट करने के मिशन में दशकों पुराने वे कार्यकर्ता पिस रहे हैं जो दशकों से पार्टी के आयोजनों में इस आस में कुर्सी बिछाते आ रहे हैं कि कभी न कभी तो उन्हें भी कुर्सी नसीब होगी। एक पुराने भाजपा कार्यकर्ता ने दैनिक भास्कर से कहा- पहली नेताजी फिर पत्नी, फिर बहू फिर बेटे-बेटियों की परपंरा भाजपा के कर्मठ कार्यकर्ताओं में निराशा भर रही है। स्थापित नेता अपनी सीट को फैमिली सीट समझकर अपनी बहू, बेटे और पत्नियों को सियासत में उतार रहे हैं। ऐसा होने से पार्टी के दशकों पुराने कर्मठ कार्यकर्ताओं का हक मारा जा रहा है।
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