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    Petrol, Diesel, CNG Price में वृद्धि से जूझ रही जनता की मुश्किलें और बढ़ाएंगी Chemist Strike, Auto-Taxi Strike

    23 hours ago

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    देश में महंगाई बम तो फूट ही रहा है, साथ ही अब हड़तालों से आम जनता की परेशानी और बढ़ने जा रही है। हम आपको बता दें कि पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की लगातार बढ़ती कीमतों ने जहां लोगों का घरेलू बजट बिगाड़ दिया है, वहीं अब दवा दुकानदारों और व्यावसायिक वाहन चालकों के विरोध प्रदर्शन ने परिवहन और दवा आपूर्ति जैसी जरूरी सेवाओं पर भी असर डालने की आशंका पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में लोगों को सफर से लेकर दवाइयों तक के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।हम आपको बता दें कि देशभर के केमिस्ट और दवा विक्रेता संगठनों ने 20 मई को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। अखिल भारतीय केमिस्ट और ड्रगिस्ट संगठन, जो करीब 12.4 लाख दवा विक्रेताओं, फार्मासिस्टों और वितरकों का प्रतिनिधित्व करता है, उसने सरकार से दो अधिसूचनाएं वापस लेने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि इन नियमों की वजह से ऑनलाइन दवा कंपनियां बिना सख्त निगरानी के काम कर रही हैं। इससे गलत और फर्जी पर्चियों पर दवाइयां बेचे जाने का खतरा बढ़ गया है। संगठन का कहना है कि ऑनलाइन दवा कंपनियों को पारंपरिक मेडिकल दुकानों की तरह ही सख्त नियमों के दायरे में लाया जाना चाहिए।इसे भी पढ़ें: दिल्ली की रफ्तार थमने के आसार! किराये में बढ़ोतरी की मांग को लेकर 21 से 23 मई तक ऑटो-टैक्सी की तीन दिवसीय हड़तालदवा विक्रेताओं के संगठन ने विशेष रूप से जीएसआर 817 और जीएसआर 220 अधिसूचनाओं पर आपत्ति जताई है। हम आपको बता दें कि जीएसआर 817 करीब आठ वर्ष पहले ऑनलाइन फॉर्मेसी के लिए नियामक ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से लाया गया मसौदा था, लेकिन न तो इसे पूरी तरह लागू किया गया और न ही वापस लिया गया। दूसरी ओर जीएसआर 220 कोविड महामारी के दौरान घर तक दवाइयां पहुंचाने की अस्थायी व्यवस्था के रूप में लागू किया गया था। अब संगठन का आरोप है कि ऑनलाइन कंपनियां इसी का फायदा उठाकर बिना स्पष्ट कानूनी ढांचे के कारोबार कर रही हैं। दवा दुकानदारों का कहना है कि बड़ी कंपनियां भारी छूट देकर बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा पैदा कर रही हैं, जिससे छोटे दुकानदारों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।उधर दिल्ली-एनसीआर में टैक्सी और ऑटो चालक संगठनों ने भी 21 से 23 मई तक तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान कर दिया है। चालकों की मांग है कि बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतों को देखते हुए टैक्सी और ऑटो किराए में तत्काल वृद्धि की जाए। चालक संगठनों का कहना है कि पिछले लगभग 15 वर्षों से किराए में कोई बड़ा संशोधन नहीं हुआ है, जबकि सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा वाहन रखरखाव, बीमा, परमिट और फिटनेस प्रमाणपत्र जैसी लागत भी कई गुना बढ़ चुकी है।चालक शक्ति संघ सहित कई संगठनों ने दिल्ली के उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और पुलिस आयुक्त को पत्र भेजकर अपनी मांगों से अवगत कराया है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि एक या दो सप्ताह के भीतर किराए में संशोधन नहीं किया गया तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। चालक नेताओं का कहना है कि लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों ने मध्यमवर्गीय चालकों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर कर दी है और परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। 23 मई को दिल्ली सचिवालय के बाहर प्रदर्शन की भी घोषणा की गई है।हड़ताल पर जा रहे चालकों ने ऑनलाइन टैक्सी कंपनियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ओला, उबर और रैपिडो जैसी कंपनियां मनमाने तरीके से काम कर रही हैं और चालकों का आर्थिक शोषण कर रही हैं। चालकों का आरोप है कि ईंधन कीमतें बढ़ने के बावजूद यात्रियों से लिया जाने वाला किराया और चालकों को मिलने वाला भुगतान उसी अनुपात में नहीं बढ़ाया जाता। इससे चालक लगातार घाटे में काम करने को मजबूर हैं। पिछले वर्ष इस मुद्दे को लेकर चालक संगठनों को दिल्ली उच्च न्यायालय तक जाना पड़ा था, जहां न्यायालय ने सरकार को टैक्सी चालकों की समस्याओं के समाधान और किराया बढ़ाने पर विचार करने को कहा था।हम आपको बता दें कि देश में ईंधन कीमतों में हाल ही में फिर वृद्धि हुई है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में पेट्रोल लगभग 99 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गया है। इससे पहले वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण भी तेल कीमतों में उछाल आया था। इसका सीधा असर परिवहन क्षेत्र और आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये हड़तालें व्यापक स्तर पर सफल रहीं तो आम लोगों को दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है। एक ओर यात्रा सेवाएं प्रभावित होंगी, वहीं दूसरी ओर दवाइयों की आपूर्ति में भी अस्थायी बाधा आ सकती है। नियमित दवाइयां लेने वाले मरीजों को पहले से दवाइयां खरीदकर रखने की सलाह दी जा रही है। बहरहाल, लगातार बढ़ती महंगाई, ईंधन संकट और अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ते असंतोष ने सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
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