Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Prabhasakshi NewsRoom: Assam Arunachal Border पर क्यों चली गोलियां? 804 किलोमीटर सीमा पर 1200 विवाद क्यों नहीं सुलझ रहे हैं?

    4 hours from now

    1

    0

    असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच वर्षों से सुलग रहे सीमा विवाद ने सोमवार को एक बार फिर हिंसक रूप ले लिया। देमाजी जिले के मिंगमंग-बस्ती इलाके में कथित अतिक्रमण और जमीन के स्वामित्व को लेकर शुरू हुआ विवाद अचानक गोलीबारी में बदल गया। अरुणाचल प्रदेश की ओर से आए लोगों द्वारा कथित तौर पर की गई अंधाधुंध फायरिंग में असम के 12 से 18 लोग घायल बताये जा रहे हैं। इनमें कई की हालत गंभीर बताई गई है। घटना ने सीमावर्ती गांवों में दहशत पैदा कर दी और दोनों राज्यों के बीच चल रही सुलह की प्रक्रिया के सामने एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।हम आपको बता दें कि यह घटना सोमवार सुबह गेरुकामुख थाना क्षेत्र के अंतर्गत गोगामुख राजस्व सर्किल के मिंगमंग इलाके की बताई गई है। अधिकारियों के अनुसार, असम की जमीन पर अरुणाचल प्रदेश की ओर से कथित अतिक्रमण को लेकर स्थानीय लोगों और दूसरी ओर से आए लोगों के बीच विवाद हुआ। देखते ही देखते विवाद टकराव में बदल गया और आरोप है कि दूसरी ओर से असम के ग्रामीणों को निशाना बनाकर फायरिंग की गई।इसे भी पढ़ें: Assam Flood विकराल: राज्य में मृतक संख्या 101 हुई, 1.26 लाख लोग प्रभावितघायल लोगों की पहचान दुर्गेश्वर पातिर, रोहित डोले, नागराज डोले, बिगेश्वर पातिर, पेम/पामा पेगू, संजय तायूंग, उत्पल डोले और जन डोले के रूप में हुई है। चार अन्य घायलों की पहचान अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। सभी घायलों को पहले गोगामुख ग्रामीण अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। गंभीर रूप से घायल सात लोगों को बाद में देमाजी सिविल अस्पताल रेफर किया गया, जबकि इनमें से चार को बेहतर इलाज के लिए असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेजा गया।घटना के बाद सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस और प्रशासन की बड़ी टुकड़ी मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। एक घायल ने अस्पताल में बताया कि गोली उसके नाक के पास लगी और वह बेहोश हो गया। एक अन्य घायल ने अरुणाचल प्रशासन से जुड़े लोगों पर फायरिंग में शामिल होने का आरोप लगाया। उसने दावा किया कि उसने लोअर सियांग जिले के उपायुक्त के बेटे और एक पुलिस अधिकारी को फायरिंग करते देखा। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।दूसरी ओर, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घटना को ‘स्थानीय स्तर का संघर्ष’ बताते हुए कहा कि स्थिति को तेजी से नियंत्रण में ले लिया गया है और तनाव कम हो गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री रानोज पेगू को अरुणाचल प्रदेश सरकार से बातचीत के लिए भेजा गया है। असम के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक भी अरुणाचल प्रदेश के अपने समकक्षों के लगातार संपर्क में हैं। सरमा ने यह भी स्पष्ट किया कि असम अपनी जमीन को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने पुलिस को जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि असम की जमीन न जाए।देखा जाये तो यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि महज कुछ दिन पहले यानि 1 अगस्त को असम के मुख्यमंत्री और अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मेन के बीच बैठक हुई थी। मेन ने बातचीत को ‘गर्मजोशी भरी और सार्थक’ बताते हुए दोनों राज्यों के बीच सहयोग और साझा विकास को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई थी। लेकिन सीमा पर हुई गोलीबारी ने दिखा दिया कि राजनीतिक स्तर पर रिश्तों में सुधार के बावजूद जमीन पर विवाद की जड़ें अब भी गहरी हैं।जहां तक सीमा विवाद की बात है तो आपको बता दें कि असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच करीब 804.1 किलोमीटर लंबी अंतरराज्यीय सीमा है और लगभग 1,200 बिंदुओं पर विवाद बताया जाता है। असम सरकार ने 29 जुलाई को विधानसभा में बताया था कि अरुणाचल प्रदेश ने असम की 16,144.01 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण किया है, जबकि अरुणाचल प्रदेश का दावा 858.91 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर है। यानी विवाद केवल गांवों की सीमाओं का नहीं, बल्कि बड़े भू-भाग और उसके प्रशासनिक अधिकार का है।हम आपको यह भी बता दें कि इस विवाद की जड़ें स्वतंत्रता के बाद के प्रशासनिक पुनर्गठन में हैं। आज का अरुणाचल प्रदेश स्वतंत्रता के बाद पहले केंद्र शासित प्रशासन वाला क्षेत्र था, फिर केंद्र शासित प्रदेश बना और अंततः 1987 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला। राज्य बनने के बाद एक त्रिपक्षीय समिति ने असम से कुछ क्षेत्रों को अरुणाचल प्रदेश में स्थानांतरित करने की सिफारिश की। असम ने इस सिफारिश को चुनौती दी और मामला अंततः सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, जहां विवाद अभी भी विचाराधीन है।हालांकि विवाद का समाधान बातचीत से निकालने की कोशिशें जारी हैं। दोनों राज्यों ने सीमा विवाद के निपटारे के लिए 12 क्षेत्रीय समितियां बनाई हैं। 15 जुलाई 2022 को हुए नमसाई घोषणा-पत्र के जरिए असम के उन 123 गांवों को लेकर समाधान की प्रक्रिया शुरू की गई, जिन पर अरुणाचल प्रदेश दावा करता है। इसके बाद 20 अप्रैल 2023 को नई दिल्ली में दोनों मुख्यमंत्रियों ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। अधिकारियों के मुताबिक 123 में से 71 गांवों का विवाद सुलझ चुका है, जबकि 52 गांवों को लेकर प्रक्रिया अभी जारी है।यही इस गोलीकांड की सबसे बड़ी विडंबना है क्योंकि जब बातचीत की मेज पर दशकों पुराने विवाद को सुलझाने की कोशिश चल रही है, उसी समय जमीन पर सीमा की अस्पष्टता स्थानीय लोगों के बीच टकराव और हिंसा को जन्म दे रही है। मिंगमंग की गोलीबारी इसलिए महज एक स्थानीय घटना नहीं है; यह चेतावनी है कि कागज पर खींची गई सीमाओं और जमीन पर मौजूद वास्तविक दावों के बीच की खाई अभी पूरी तरह नहीं भरी गई है।बहरहाल, दोनों सरकारों के बीच संवाद और प्रशासनिक समन्वय से तत्काल तनाव भले ही थम गया हो, लेकिन स्थायी समाधान तभी संभव है जब सीमा के विवादित हिस्सों का स्पष्ट निर्धारण, जमीन के दावों का निष्पक्ष निपटारा और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। वरना हर अगला अतिक्रमण का आरोप फिर वही पुराना सवाल खड़ा करेगा कि सीमा आखिर नक्शे पर है या जमीन पर?
    Click here to Read more
    Prev Article
    कोलंबिया में 7.4 तीव्रता का भूकंप, कई देशों में महसूस किए गए झटके; 79 की मौत
    Next Article
    Delhi-NCR में Diabetes और हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ा, 40 के बाद जोखिम अधिक

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment