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    Prabhasakshi NewsRoom: India की Long Range Land Attack Cruise Missile किन किन देशों तक जाकर तबाही मचा सकती है?

    1 day ago

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    भारत ने एक बार फिर दुनिया को साफ संदेश दे दिया है कि अब यह नया भारत है, जो दुश्मन की सीमा के भीतर घुसकर वार करने की क्षमता भी रखता है और उस वार को रोक पाना अब आसान नहीं रहने वाला। हम आपको बता दें कि ओडिशा तट के पास डॉ. अब्दुल कलाम द्वीप से भारत ने स्वदेशी लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण करके सामरिक ताकत के उस नए अध्याय का उद्घाटन कर दिया है, जिसने चीन और पाकिस्तान दोनों की सैन्य रणनीतियों की नींद उड़ा दी है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित इस घातक मिसाइल ने साबित कर दिया है कि भारत निर्णायक जवाब देने वाली शक्ति बन चुका है।करीब एक हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तक हमला करने में सक्षम यह मिसाइल दुश्मन के सबसे संवेदनशील सैन्य ठिकानों, कमान केंद्रों, राडार अड्डों और हथियार भंडारों को कुछ ही मिनटों में तबाह कर सकती है। सबसे खतरनाक बात यह है कि यह मिसाइल किसी सामान्य बैलिस्टिक मिसाइल की तरह सीधे रास्ते पर नहीं चलती। यह धरती की सतह के बेहद करीब उड़ान भरते हुए पहाड़ों, घाटियों और भूभाग की बनावट का इस्तेमाल करती है। यही कारण है कि दुश्मन के राडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाते और जब तक पता चलता है, तब तक विनाश सामने खड़ा होता है।इसे भी पढ़ें: India Ballistic Missile Programme | 2 दिनों में 3 सफल टेस्ट! भारत की रक्षा प्रणाली में ऐतिहासिक मील का पत्थर, DRDO ने मजबूत की मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल सुरक्षाकरीब छह मीटर लंबी और डेढ़ टन वजनी इस मिसाइल में पूरी तरह स्वदेशी टर्बोफैन इंजन लगाया गया है। यह ध्वनि की गति के लगभग 80 प्रतिशत वेग से उडान भर सकती है और चार सौ किलोग्राम तक का पारंपरिक वारहेड लेकर चल सकती है। इसे भविष्य में जमीन आधारित मोबाइल प्रक्षेपक, युद्धपोतों और हवाई मंचों से भी दागे जाने की तैयारी है। यानी आने वाले समय में भारत की तीनों सेनाओं के हाथों में एक ऐसा साझा हथियार होगा, जो किसी भी मोर्चे पर दुश्मन की सांसें रोक सकता है।इस परीक्षण की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि मिसाइल ने अपने सभी मिशन उद्देश्यों को पूरी सटीकता के साथ पूरा किया। एकीकृत परीक्षण क्षेत्र में तैनात कई ट्रैकिंग और दूरमापी प्रणालियों ने इसकी क्षमता की पुष्टि की। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि मिसाइल ने तय मानकों के अनुसार प्रदर्शन किया।देखा जाये तो यह सफलता ऐसे समय आई है जब कुछ ही दिन पहले भारत ने नई पीढ़ी की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली के लगातार तीन सफल परीक्षण किए थे और नौसेना के लिए मध्यम दूरी की जहाज भेदी मिसाइल का पहला सफल परीक्षण भी किया था। इसका सीधा अर्थ है कि भारत अब केवल हमलावर हथियार ही नहीं बना रहा, बल्कि दुश्मन के हमलों को हवा में ही खत्म करने की तैयारी भी पूरी कर चुका है। यानी रक्षा और आक्रमण दोनों मोर्चों पर भारत तेजी से आत्मनिर्भर सैन्य शक्ति बन रहा है।सामरिक दृष्टि से यह मिसाइल बेहद महत्वपूर्ण है। चीन लंबे समय से अपनी लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों और हाइपरसोनिक हथियारों के दम पर एशिया में दबदबा बनाने की कोशिश करता रहा है। पाकिस्तान भी चीन की तकनीक के सहारे अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने में जुटा है। लेकिन भारत की यह नई क्षमता पूरे शक्ति संतुलन को बदल सकती है। अब भारत के पास ऐसी मारक क्षमता है, जो दुश्मन के भीतर गहरे स्थित ठिकानों को बिना सीमा पार किए नष्ट कर सकती है। युद्ध की स्थिति में यह मिसाइल दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली, संचार केंद्र और सैन्य कमान को शुरुआती चरण में ही ध्वस्त कर सकती है। इससे विरोधी देश की जवाबी क्षमता कमजोर पड़ सकती है।इसके साथ ही भारत अब उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा हो गया है, जिनके पास स्वदेशी लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल तकनीक मौजूद है। अभी तक अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और कुछ हद तक ब्रिटेन जैसे देशों के पास ही ऐसी अत्याधुनिक क्षमता थी, जो दुश्मन की सीमा के भीतर बेहद सटीक और कम ऊंचाई पर घुसकर हमला कर सके। अब भारत ने भी इस विशिष्ट सैन्य क्लब में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज करा दी है। भारत की यह मिसाइल एक हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तक वार कर सकती है, जिसका मतलब है कि भारतीय सीमा से दागे जाने पर पाकिस्तान का लगभग पूरा इलाका इसकी जद में आ जाता है। चीन के कई सामरिक ठिकाने, तिब्बत क्षेत्र के सैन्य अड्डे और हिंद महासागर क्षेत्र में सक्रिय दुश्मन ठिकाने भी इसके निशाने पर आ सकते हैं। इतना ही नहीं, बांग्लादेश, म्यांमार और हिंद महासागर के कई हिस्सों तक इसकी पहुंच बनती है। तुर्की सीधे भारतीय भूभाग से इसकी सामान्य मारक सीमा में नहीं आता, लेकिन यदि भविष्य में इसे नौसैनिक मंचों या हवाई मंचों पर तैनात किया गया, तो भारत की प्रहार क्षमता का दायरा और अधिक व्यापक हो जाएगा। यही कारण है कि इस परीक्षण को केवल एक सैन्य उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे एशियाई शक्ति संतुलन को बदल देने वाली रणनीतिक छलांग माना जा रहा है।साथ ही रणनीतिक स्तर पर यह परीक्षण आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है। इस मिसाइल के प्रमुख कलपुर्जे और प्रणालियां भारत में ही विकसित की गई हैं। बेंगलुरु स्थित वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान इस परियोजना की प्रमुख प्रयोगशाला रही। यानी भारत अब विदेशी हथियारों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जरूरतों के अनुसार खुद घातक सैन्य तकनीक तैयार कर रहा है। यही वह बदलाव है, जो आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में भी नई ताकत बना सकता है।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता को भारत की रक्षा तैयारियों के लिए बड़ा उत्साहजनक बताया है, जबकि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने वैज्ञानिकों और अभियंताओं को बधाई दी। लेकिन असली संदेश दुनिया के लिए है। भारत अब चुप रहने वाला राष्ट्र नहीं है। अगर किसी ने भारत की संप्रभुता को चुनौती देने की कोशिश की, तो जवाब केवल सीमा पर गोलियों से नहीं, बल्कि ऐसी सटीक और घातक मारक क्षमता से दिया जाएगा, जो दुश्मन के दिल तक पहुंचकर उसे झकझोर देगी।कुल मिलाकर देखें तो यह परीक्षण केवल एक सैन्य उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की बदलती रणनीतिक सोच का ऐलान है। नया भारत अब इंतजार नहीं करता, तैयारी करता है। और जब तैयारी इतनी घातक हो, तो दुश्मन की बेचैनी तय है।
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