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    Rafale, AI और Space Deal... PM Modi के सुपरहिट France दौरे से भारत की बड़ी डिप्लोमेटिक जीत

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    प्रिय मित्र नरेंद्र, मुझे बहुत खुशी हुई आपका नीस, एवियन और पेरिस में स्वागत करके। फ्रांस और भारत की दोस्ती अमर रहे। मुझे उम्मीद है कि यह सही था।  फ्रांस आपसे प्यार करता है...आप मेरे सच्चे दोस्त हैं। पीएम मोदी की फ्रांस यात्रा खत्म होने पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने राजनयिक प्रोटोकॉल तोड़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए हिंदी में विदाई संदेश जारी किया है।  मोदी का फ्रांस दौरा 13 जून को शुरू हुआ, जब उन्होंने नीस का दौरा किया, मैक्रों के साथ 'भारत इनोवेट्स' कार्यक्रम का उद्घाटन किया और फ्रांसीसी राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक की। स्लोवाकिया की दो दिन की यात्रा के बाद, भारतीय नेता 16 और 17 जून को G7 समिट के लिए फ्रांस के एवियन-लेस-बैन्स लौटे, जहाँ उन्होंने 16 महीनों में पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। मोदी ने पेरिस में अपनी यात्रा पूरी कर वतन वापसी कर ली है। लेकिन मोदी की फ्रांस यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ? आइए, इस यात्रा के अहम नतीजों को समझते हैं।इसे भी पढ़ें: मैक्रों की मुस्कान, कार्नी की चुप्पी, ट्रंप की Awkward Diplomacy, G7 कैसे बना 'रियलिटी चेक' सम्मेलनडिफेंस, ट्रेड और AI... भारत-फ्रांस संबंधों में आई और भी नज़दीकी13 जून को फ्रांस पहुँचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने नीस (Nice) शहर का दौरा किया और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच व्यापक स्तर पर बातचीत हुई, जिसमें फ्रांस की जानी-मानी डिफेंस कंपनी डसॉल्ट एविएशन से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की भारत की योजना भी शामिल थी। इस बातचीत के बाद, दोनों नेता भारत-फ्रांस संबंधों को एक 'विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर पर ले जाने के लिए सहमत हुए। इसके साथ ही उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक कॉम्पिटिशन और सैन्य गतिविधियों के बीच ऑर्बिट (कक्षा) में होने वाली एक्टिविटीज़ को ट्रैक करने, महत्वपूर्ण सैटेलाइट इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा करने और स्पेस सिक्योरिटी पर आपसी तालमेल को और मजबूत करने के लिए 'स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस' में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की।नए लक्ष्य तय किएभारत और फ्रांस के बीच लगातार बढ़ रहे द्विपक्षीय व्यापार पर संतोष जताते हुए अगले पांच सालों में इसे दोगुना करने के लिए एक हाई-लेवल मैकेनिज्म स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को जल्द लागू करने का आह्वान किया। साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को अधिक मजबूत बनाने पर सहमति जताई।इसे भी पढ़ें: G-7 में सीढ़ियों पर लड़खड़ाए Trump, PM Modi ने गिरने से बचाया!एआई से स्पेस तक, भविष्य की तस्वीर साफपीएम ने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, क्वांटम कप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मटीरियल्स को भविष्य को आकार देने वाली प्रमुख तकनीकों के रूप मे रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मानव सभ्यता का अगला अध्याय इन्हीं तकनीकी क्षेत्रों से लिखा जाएगा। हर तकनीकी क्रांति अपने साथ नई जिम्मेदारियां लेकर आती है।स्पेस सेक्टर में बढ़ेगी भागीदारीह्यूमन स्पेसफ्लाइट और स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों के बीच साझेदारी बढ़ाने के तरीकों पर बात की। नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों ने कहा कि भारत का शांति अधिनियम सहयोग के नए अवसर पैदा करता है, जिनमें छोटे और उन्नत मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टरों पर साझेदारी भी शामिल है।मोदी-ट्रंप की दोस्ती का रिसेट मोड ऑनमोदी की फ्रांस यात्रा का एक और बड़ा नतीजा फ्रांस के एवियन-लेस-बेन्स में हुए G7 समिट के दौरान देखने को मिला। यहीं पर PM मोदी, जिन्हें इस समिट में बुलाया गया था, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिले। भारत-अमेरिका रिश्तों में 16 लंबे, मुश्किल और उतार-चढ़ाव भरे महीनों के बाद यह उनकी पहली मुलाकात थी। इस मुलाकात से पहले, भारत-अमेरिका संबंध इस दौरान अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए थे। इसमें टैरिफ विवाद, ऑपरेशन सिंदूर सीज़फायर, रूसी तेल की खरीद, अमेरिकी हमलों में भारतीय नाविकों की मौत और भारत व उसकी अर्थव्यवस्था को कमज़ोर करने वाले कई बयान शामिल थे। भारत ने UK और कनाडा के साथ अपने व्यापारिक संबंध बढ़ाए हैंफ्रांस में G7 समिट के दौरान, PM मोदी ने दूसरे देशों के साथ भी संबंध मजबूत करने की कोशिश की। असल में, G7 समिट के दौरान ही UK के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और मोदी ने उस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लागू करने पर सहमति जताई, जिस पर उन्होंने लगभग एक साल पहले हस्ताक्षर किए थे। दोनों देशों ने बुधवार को घोषणा की कि यह डील 15 जुलाई से लागू हो जाएगी। यूके के बिज़नेस और ट्रेड सेक्रेटरी पीटर काइल ने कहा कि हम भारत के साथ अपनी अहम ट्रेड डील को जल्द से जल्द लागू कर रहे हैं, क्योंकि हम चाहते हैं कि बिज़नेस और आम लोगों को इसके फ़ायदे तुरंत मिलें, जिसमें सिर्फ़ पहले साल में ही 400 मिलियन पाउंड के टैरिफ में कटौती शामिल है।
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