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    रोहिणी बोलीं- चुनाव लड़ने नहीं, लड़वाने आई हूं:अखिलेश या कांग्रेस नहीं, वाल्मीकियों को हिस्सेदारी देने वाले को समर्थन देंगे

    10 hours ago

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    स्विट्जरलैंड में 6 साल बिताने के बाद भारत लौटीं रोहिणी घावरी अब अपने वाल्मीकि समाज को राजनीतिक रूप से मजबूत करने की मुहिम में जुटी हैं। डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी करने और स्विट्जरलैंड में 2 साल नौकरी करने के बाद उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया। दिल्ली, हरियाणा और मेरठ के बाद वे लखनऊ पहुंचीं। दैनिक भास्कर से एक्सक्लूसिव बातचीत में रोहिणी ने क्रीमी लेयर के आरक्षण, वाल्मीकि समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी, 2027 के विधानसभा चुनाव, अखिलेश यादव और मायावती से लेकर चंद्रशेखर आजाद पर खुलकर बात की। कहा कि मेरा व्यक्तिगत लक्ष्य चुनाव लड़ना नहीं, अपने समाज के लोगों को चुनाव लड़वाकर विधानसभा और संसद तक पहुंचाना है। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: स्विट्जरलैंड का 6 साल का सफर छोड़कर भारत वापस क्यों आईं? जवाब: मैं स्विट्जरलैंड पढ़ने गई थी। मेरी डॉक्टरेट (Ph.D.) की डिग्री पूरी हो गई है। विदेश में रहकर अक्सर लोग अपने परिवारों को भूल जाते हैं। लेकिन, मैं अपने समाज और लोगों की पीड़ा को नहीं भूल सकी। मैं लगातार उनके मुद्दों पर लिख रही थी। अपने देश में जो बदलाव मैं देखना चाहती हूं, यही काम करने भारत वापस आई हूं। सवाल: आपने कहा था कि अगले 5 साल में वाल्मीकि समाज का मुख्यमंत्री बनाऊंगी? जवाब: मेरा यह कहना नहीं है कि मुख्यमंत्री केवल यूपी में ही बने। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में हमारी अच्छी आबादी है। हमारे देश में हर वर्ग को मौका मिला है। जिस समाज को वर्षों तक केवल सफाई के काम के लायक समझा गया, उसे भी सत्ता तक पहुंचाना ही हमारी मांग है। सवाल : आपने आर्थिक आरक्षण और जातिगत व्यवस्था में बदलाव की बात कही थी? जवाब : हम सुप्रीम कोर्ट के 1 अगस्त, 2024 के फैसले के तहत आरक्षण वर्गीकरण का समर्थन कर रहे हैं। जब हरियाणा, तेलंगाना और पंजाब में यह लागू हो सकता है, तो उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश या राजस्थान में क्यों नहीं? आरक्षण का फायदा कुछ ही जातियां पीढ़ी-दर-पीढ़ी ले रही हैं। जो समाज स्लम्स में रह रहा है, आरक्षण का लाभ उन तक पहुंचना चाहिए। सवाल: क्या आप चाहती हैं कि क्रीमी लेयर की व्यवस्था लागू की जाए? जवाब: बिल्कुल, मैं समर्थन करती हूं कि क्रीमी लेयर लागू होना चाहिए। मेरी मां, दादी और नानी सफाईकर्मी थीं। मुझे आरक्षण का फायदा मिला, मैं विदेश पढ़ने गई। अच्छे पैकेज पर काम किया। अब मेरी आने वाली पीढ़ी को आरक्षण का फायदा नहीं मिलना चाहिए। सवाल: क्या राजनीति में उतरने का मन बना लिया है? जवाब: स्लम से स्विट्जरलैंड तक का सफर मेरे लिए बेहद कठिन था। जिस घर में बचपन में मांगकर खाना पड़ा हो, वहां से स्विट्जरलैंड पहुंचने की यात्रा मैंने पूरी की। अब अगला लक्ष्य अपने समाज को सत्ता में पहुंचाना है। आजादी के 80वें साल में भी वाल्मीकि समाज अपने राष्ट्रीय नेतृत्व की तलाश कर रहा है। सवाल: अखिलेश यादव या कांग्रेस के साथ जाने की चर्चाएं हैं? जवाब: हमारी शर्त साफ है कि हम उसी पार्टी के साथ जाएंगे, जो हमें राजनीतिक हिस्सेदारी देगी। जो पार्टी आरक्षण वर्गीकरण लागू करेगी और वाल्मीकि समाज को उचित हिस्सेदारी देगी, हम उसका समर्थन करेंगे। अगर भाजपा मांग मानती है तो हम उसके साथ जाएंगे। अगर अखिलेश यादव आरक्षण वर्गीकरण लागू करके हमें उचित हिस्सेदारी (जैसे 10 टिकट) देते हैं, तो हम उन्हें समर्थन देंगे। सवाल: 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी के रूप में दिखेंगी? जवाब: मैं चुनाव लड़ने नहीं, अपने समाज के लोगों को चुनाव लड़ाने आई हूं। सच्चा लीडर वही होता है, जो नई लीडरशिप तैयार करे। खुद पद पर बैठ जाना लीडरशिप नहीं है। सवाल: जिन्हें चुनाव लड़ाएंगी, क्या गारंटी है कि वे जीतने के बाद आपके साथ रहेंगे? जवाब: पहली प्राथमिकता अपने भाई-बहनों को टिकट दिलवाना और उन्हें जिताकर विधानसभा पहुंचाना है। सवाल: अखिलेश यादव के 'पीडीए' नारे को कैसे देखती हैं? जवाब: पिछले एक साल से अखिलेश जी का काम सराहनीय रहा है। वे पीड़ितों, दलितों, शोषितों और अल्पसंख्यकों को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। वे युवाओं और शिक्षा के मुद्दों पर बात कर रहे हैं। यूपी बदलाव चाहता है और एक बार मौका दिया जाना चाहिए। सवाल: क्या 2 दिनों के दौरान अखिलेश से मुलाकात की संभावना है? जवाब: बिल्कुल संभावना है। स्विट्जरलैंड में रहने के दौरान भी उनसे बातचीत हुई थी। तब उन्होंने कहा था कि लखनऊ आना, तो बताना। मैं उनसे मिलकर अपने समाज की मांगें और अधिकार उनके सामने रखूंगी। सवाल: क्या आपकी बहन मायावती से कोई बात या मुलाकात हुई? जवाब: सीधे बहनजी से बात नहीं हुई, लेकिन उनके करीबी लोगों से संपर्क हुआ था। बहनजी मेरे लिए हमेशा आदर्श रहेंगी। सवाल: दलित आंदोलन के तीन मॉडल (बसपा, पीडीए और चंद्रशेखर) में से किसे बेहतर मानती हैं? जवाब: शुरुआत में जब बसपा आई थी, तब उसके मॉडल को लोगों ने काफी सराहा था। लोग उससे जुड़े और समर्थन दिया था। इसी वजह से बहनजी 4 बार मुख्यमंत्री बनीं। PDA मॉडल अभी नया है। अखिलेश यादव पहले भी काम करते रहे हैं। अभी जाटव कम्युनिटी का एक बड़ा हिस्सा उनके साथ जुड़ रहा है। वे उन्हें अपना विकल्प मान रहे हैं। मैंने यह भी देखा है कि वाल्मीकि कम्युनिटी के लोग भी उनसे जुड़ रहे हैं। जहां तक तीसरे मॉडल की बात है, मैं उसे कोई मॉडल नहीं मानती। वह एक व्यक्ति को खुद को स्थापित करने की रणनीति है। उसमें कम्युनिटी के कल्याण और उत्थान का कोई मॉडल नजर नहीं आता। सवाल: बाराबंकी में चंद्रशेखर के कार्यक्रम में आपके समर्थन में हुई नारेबाजी पर क्या कहेंगी? जवाब: मुझे इसकी जानकारी देर रात मिली। मुझे नहीं पता कि वे कौन लोग थे। पुलिस ने भी ऐसी किसी घटना से इनकार किया है। लेकिन जो भी गलत करेगा, उसे नतीजा भुगतना पड़ेगा। देशभर के जो लोग मुझे अपनी बहन मानते हैं, वे मेरे न्याय के लिए खड़े हैं। सवाल: भारत आने के बाद करणी सेना आपके समर्थन में दिख रही? जवाब: करणी सेना ने मेरी लड़ाई में बिना किसी स्वार्थ के मेरा समर्थन किया है। 2023 में जब मैंने संयुक्त राष्ट्र (UN) में भाषण दिया था, तभी से देश का सर्वसमाज मेरे साथ जुड़ा हुआ है। सवाल: चंद्रशेखर की ताकत और कमजोरी क्या मानती हैं? जवाब: उनकी ताकत लोगों को अपनी बातों से प्रभाव में लेना है। कमजोरी यह है कि उनके पास कोई साफ विजन, नीति या ब्लूप्रिंट नहीं है। जो व्यक्ति समाज के कल्याण के बजाय अपने पद, पेंशन, बंगले और लग्जरी की चिंता करे, वह सामाजिक आंदोलनों का नेता नहीं हो सकता। सवाल: चंद्रशेखर से अलग होने का कारण क्या है? जवाब: जो व्यक्ति निजी रिश्तों में ईमानदार नहीं हो सकता, वह समाज या राजनीति में भी ईमानदार नहीं हो सकता। संगठन के कई प्रदेश अध्यक्ष मेरे संपर्क में थे। अंदर का सच यही था कि समाज के नाम पर केवल हाइप बनाई जा रही थी। जमीनी स्तर पर काम शून्य था। सवाल: इस लड़ाई में आपके परिवार और पिता का कैसा सहयोग रहा? जवाब: मेरे पिता इंदौर में अपनी ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने हमारी पढ़ाई के लिए अपनी नौकरी तक छोड़ दी थी। जब मुझ पर संकट आया, तो मेरे माता-पिता और भाई मेरे साथ मजबूती से खड़े रहे। परिवार के विश्वास की वजह से ही मैं आज निडर होकर खड़ी हूं। सवाल: क्या आप शादी करेंगी? जवाब: बिल्कुल नहीं। यह मैंने बहुत स्ट्रिक्ट डिसीजन ले लिया है। अब मेरे पास वक्त नहीं है। मेरी 33 की एज है। ये 5-6 साल जो मेरे बर्बाद हुए, उस वक्त शादी हो जाती तो हो जाती। वो गलती हो गई। उस वक्त कोई ईमानदार व्यक्ति मिलता, तो शायद मेरा घर बस जाता। मुझे भी दुल्हन बनना था। मेरे भी सपने थे कि ड्रीम मैरिज होगी। करोड़ों में जो लड़की कमा रही है, वो कैसा लहंगा पहनेगी, ऐसा गोल्ड खरीदेगी। सब सपने एक आम लड़की की तरह देखे थे। लेकिन जो सपने मेरे टूटे हैं, वो मैं जानती हूं। इतना त्याग करने के बाद आज भी मुझे लोग बोल रहे हैं कि ये गलत है। क्यों? क्योंकि मैं आम लड़की हूं और वह सांसद है। यही लोग, जो आज मुझे गाली दे रहे हैं, मुझे लगता है कि थोड़े दिन बाद तो ये मेरे बिना कपड़ों के भी एडिट किए हुए फोटोज वायरल करेंगे। बोलेंगे- ऐसी लड़की है। कहां है बहुजन एकता? यह काम कोई ब्राह्मण नहीं कर रहा है मेरे लिए। यह काम राजपूत नहीं कर रहा है। ठाकुर या कोई मुसलमान नहीं। ये वही बहुजन समाज के लोग हैं, जो एकता की बात करते हैं। सवाल: क्या पूरी जिंदगी समाज के लिए समर्पित करने जा रही हैं? जवाब: हां, मैंने अपना व्यक्तिगत जीवन त्याग दिया है। अब शादी या परिवार बसाने का विचार नहीं है। बाबासाहेब अंबेडकर, मान्यवर कांशीराम साहब और बहन मायावती जी के जीवन से प्रेरणा लेकर मैंने अपना पूरा जीवन वाल्मीकि समाज और बहुजन समाज के अधिकारों की लड़ाई के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया है। --------------------------- यह खबर भी पढ़ें - बसपा में क्या मायावती के खिलाफ साजिश हो रही, आकाश के तबीयत पूछने से नाराजगी बसपा सुप्रीमो मायावती को लगता है कि पार्टी से निकाले गए लोग उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। रविवार, 13 सितंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा- कुछ लोग यह भ्रम फैला रहे हैं कि बहनजी बीमार हैं, लेकिन मैं बिल्कुल ठीक हूं। मायावती ने इस साजिश का ठीकरा अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ पर फोड़ा। पढ़िए पूरी खबर…
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