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    रोकी चाबहार की फंडिंग, नाराज होकर ईरान ने ये क्या कह दिया?

    3 hours from now

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    भारत और ईरान के बीच में दोस्ती की बड़ी वजहों में से एक बड़ी वजह है चाबहार पोर्ट। भारत और ईरान ने मिलकर इस पोर्ट का विकास किया। लेकिन अब ऐसा लगता है कि यही पोर्ट दोनों देशों के बीच विवाद का कारण भी हो सकता है क्योंकि भारत ने अपने इस साल के बजट में चाबहार परियोजना को शामिल नहीं किया। यानी कि भारत ने अपने चाबहार परियोजना के लिए कोई भी फंड का एलोकेशन इस साल के वित्तीय बजट पे नहीं रखा। भारत और ईरान का चाबहार पोर्ट इसलिए बेहद रणनीतिक रूप से जरूरी है क्योंकि यह चाबहार एक तरह से स्वर्ण द्वार है जो हिंद महासागर क्षेत्र को मध्य एशिया काशेष और फिर यूरोप से जोड़ता है और सबसे बड़ी बात यह है कि चाबहार के जरिए भारत को एक रणनीतिक लाभ मिलता है जिससे भारत सीधे पाकिस्तान को बाईपास करके ईरान और अफगानिस्तान तक अपनी पहुंच बनाता है।इसे भी पढ़ें: उतार-चढ़ाव के बीच सपाट बंद हुए Sensex- Nifty, GDP आंकड़ों और अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले निवेशक सतर्कलेकिन अमेरिका के द्वारा लगातार ईरान पर लगाए जा रहे सेंशंस के कारण भारत कहीं ना कहीं चाबहार की नीति से इस वक्त दिगता दिखता है। ऐसे में ईरान के विदेश मंत्री से जब सवाल हुआ तो उन्होंने इस मामले में निराशा व्यक्त की। उनका कहना है कि यह ईरान और भारत दोनों के लिए निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि एक बहुत रणनीतिक बंदरगाह है और इसका पूर्ण विकास किया जाए तो भारत को ईरान से मध्य एशिया का अवशेष और फिर यूरोप से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया जा सकता है। उनका मानना है कि यह सबसे अच्छा परागमन मार्ग होगा। उन्हें आशा है कि वह एक दिन इस बंदरगाह का पूर्ण विकास देख सकेंगे।  जिस अंदाज में ईरान के विदेश मंत्री पहले चाबहार की महत्वपूर्ण रणनीतिक भूमिका बताते हैं। उसके बाद यह उम्मीद जताते हैं कि एक ना एक दिन इस बंदरगाह का वो पूर्ण विकास देख लेंगे। इसे भी पढ़ें: मोदी सरकार से हो गयी बड़ी गलती? भारत से Iran हुआ बेहद आहत! अब दुनिया में कुछ बड़ा होगा!उससे लगता है कि ईरान को बहुत अधिक भारत से उम्मीदें हैं। इसके पहले भी इस इंटरव्यू में ईरानी विदेश मंत्री ने इस बात का जिक्र किया था कि भारत और ईरान के संबंध बेहद मजबूत हैं। दोनों देश एक दूसरे से बेहद आत्मीय लगाव रखते हैं। हालांकि ईरान के विदेश मंत्री ने पीएम नरेंद्र मोदी के इजराइल यात्रा को दुर्भाग्यपूर्ण भी करार दिया था। 
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