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    रामलला प्राण-प्रतिष्ठा के बाद राम नगरी में बढ़ा प्रदूषण:अयोध्या में प्रदूषण का सर्वे कराएगा ट्रस्ट, बीएचयू के पर्यावरण विज्ञान विभाग को जिम्मेदारी, AQI मध्यम श्रेणी में

    3 hours ago

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    रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या धाम में श्रद्धालुओं का जनसैलाब लगातार उमड़ रहा है। इसके साथ ही होटल, गेस्ट हाउस और धर्मशालाओं के निर्माण में तेजी आई है, जिससे शहर के पर्यावरण पर असर दिखने लगा है। बढ़ती निर्माण गतिविधियों और यातायात के दबाव के बीच प्रदूषण स्तर में इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है। इसे देखते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूरे अयोध्या धाम में प्रदूषण का व्यापक सर्वे कराने का निर्णय लिया है। बीएचयू करेगा सर्वे, जल्द होगा अनुबंध ट्रस्ट ने इस सर्वे के लिए बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पर्यावरण विज्ञान विभाग को चुना है। जानकारी के अनुसार, बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी के साथ जल्द ही औपचारिक समझौता किया जाएगा। प्रो. चतुर्वेदी आईआईटी कानपुर और आईआईटी रुड़की से जुड़े रहे हैं और राम मंदिर परियोजना के तकनीकी कार्यों का अनुभव भी रखते हैं। इसी आधार पर ट्रस्ट ने उन्हें प्राथमिकता दी है। AQI 160 के आसपास, ‘मध्यम’ श्रेणी में स्थिति अवध विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के प्रो. डॉ. विनोद चौधरी के मुताबिक केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार अयोध्या का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) करीब 160 के आसपास बना हुआ है, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। उन्होंने बताया कि 0 से 500 के पैमाने पर AQI मापा जाता है, जिसमें 101-200 के बीच स्तर होने पर सांस के मरीजों को दिक्कत हो सकती है। मापन व्यवस्था पर भी सवाल विशेषज्ञों का कहना है कि अयोध्या में प्रदूषण मापन की व्यवस्था अभी पूरी तरह आधुनिक नहीं है। CPCB के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. आरवी सिंह के अनुसार, कई स्थानों पर अभी भी मैनुअल तरीके से मापन हो रहा है, जिससे सटीक आंकड़े सामने आने में दिक्कत होती है। फिलहाल शनिवार को AQI 128 दर्ज किया गया, जो मध्यम श्रेणी में ही आता है। आने वाले समय में बढ़ सकती है चुनौती विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर निर्माण कार्य और भीड़ का दबाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो प्रदूषण स्तर और ऊपर जा सकता है। ऐसे में यह सर्वे भविष्य की पर्यावरणीय रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
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