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    राप्ती की कटान से किसानों की जमीन नदी में समाई:घटते-बढ़ते जलस्तर से कटान तेज, धान की खड़ी फसल भी चपेट में; प्रशासन करवा रहा सर्वे

    32 minutes ago

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    श्रावस्ती में राप्ती नदी का घटता-बढ़ता जलस्तर तटवर्ती किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। रविवार को जानकारी मिली कि जमुनहा और इकौना क्षेत्र में नदी का कटान जारी है। कथरा माफी के घाटे पुरवा और हसनापुर समेत कई गांवों में खेती की जमीन धीरे-धीरे नदी में समा रही है। खेतों में खड़ी धान की फसल भी कटान की चपेट में आ गई है। पानी के उतार-चढ़ाव से बढ़ी कटान की रफ्तार जिले में रुक-रुककर हो रही बारिश और पहाड़ी इलाकों से आ रहे पानी के कारण राप्ती नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव हो रहा है। हालांकि, नदी का जलस्तर अभी खतरे के निशान से काफी नीचे है। इसके बावजूद पानी के घटने-बढ़ने से नदी की धार तेज हो गई है, जिससे किनारों पर कटान शुरू हो गया है। आंखों के सामने नदी में समा रही खेती की जमीन किसानों का कहना है कि जिन खेतों से अनाज पैदा होता था और परिवारों का गुजारा चलता था, वही जमीन अब उनकी आंखों के सामने नदी में समा रही है। कई किसानों की वर्षों की मेहनत और कमाई देखते ही देखते नदी की धारा में बह गई। कटान की चपेट में आ रही फसल को कुछ किसान मजबूरी में काटकर पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। सात बीघा में से पांच बीघा जमीन नदी में गई किसान छोटेलाल ने बताया कि नदी किनारे उनकी सात बीघा जमीन थी, जिसमें से करीब पांच बीघा जमीन नदी बहा ले गई। उन्होंने मजदूरी देकर खेत में धान की रोपाई कराई थी, लेकिन कटान के कारण फसल भी नहीं बच सकी। वहीं, एक महिला किसान ने बताया कि नदी के कटान से काफी नुकसान हुआ है। खेती की जमीन नदी में समा जाने के बाद अब उन्हें मजदूरी कर किसी तरह परिवार की गुजर-बसर करनी पड़ रही है। किसानों ने मुआवजे की मांग की किसानों ने खेती की जमीन और फसल के नुकसान का मुआवजा दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि खेती ही उनके परिवार की गुजर-बसर का मुख्य जरिया है। जमीन लगातार नदी में समाने से आने वाले समय में रोजी-रोटी का संकट और बढ़ सकता है। प्रशासन करा रहा प्रभावित इलाकों का सर्वे तहसील प्रशासन के अनुसार, कटान से प्रभावित इलाकों का सर्वे कराया जा रहा है। दो दिन के अंदर पूरी रिपोर्ट आने की उम्मीद है। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित विभाग को जानकारी देते हुए आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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