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    RG Kar Case: कीर्ति आजाद का CBI पर सीधा हमला, बोले- 'Mamata सरकार को बदनाम किया'

    14 hours ago

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    तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कीर्ति आज़ाद ने शनिवार को आरोप लगाया कि सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की निष्पक्षता प्रभावित हुई है। उन्होंने दावा किया कि एजेंसी ने आखिरकार वही रिपोर्ट स्वीकार कर ली, जो कोलकाता पुलिस ने RG कर मामले के संबंध में सौंपी थी। एएनआई से बात करते हुए आज़ाद ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी RG कर मामले को लेकर गलत रिपोर्ट जारी कर रही है। TMC सांसद ने यह भी दावा किया कि CBI ने 62 दिनों के बाद पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार की छवि को पूरी तरह से खराब कर दिया है। आज़ाद ने कहा कि दो दिनों, यानी 48 घंटों के अंदर ही कोलकाता पुलिस ने रिपोर्ट दे दी थी। बीजेपी ने 62 दिनों तक इसका फ़ायदा उठाया क्योंकि CBI को काम पर लगाया गया था। 62 दिनों के बाद CBI ने ममता सरकार को पूरी तरह बदनाम भी किया। और सीबीआई ने वही रिपोर्ट मानी जो कोलकाता पुलिस ने दी थी... इसका मतलब है कि CBI भी प्रभावित हुई है... इसका मतलब है कि CBI गलत रिपोर्ट दे रही थी।इसे भी पढ़ें: Karnataka की सियासत में उबाल! Vijayendra का DKS पर तंज- 'कुर्सी पाने में 3, बचाने में 2 साल लगेंगे'टीएमसी सांसद की ये बातें तब सामने आईं जब पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने RG कर मामले से जुड़ी फ़ाइलें फिर से खोलीं। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शरद्वत मुखर्जी ने कोलकाता के RG कर मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में एक पोस्टग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर के रेप और मर्डर की जांच से जुड़े मामलों की नए सिरे से समीक्षा करने की घोषणा की। मंत्री ने आरोप लगाया कि मामले से जुड़े सबूत और जानकारी को सोची-समझी साज़िश के तहत नष्ट कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि विभाग सबूत नष्ट करने के लिए ज़िम्मेदार लोगों की जांच करेगा और यह भी पता लगाएगा कि क्या जांच में हुई कथित गड़बड़ियों में कोई बड़ा नेटवर्क शामिल था। मुखर्जी ने आगे कहा कि सभी उपलब्ध दस्तावेज़ों और रिकॉर्ड्स को इकट्ठा किया जाएगा और आगे की जांच-पड़ताल के लिए सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) और क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) जैसी जांच एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा।इसे भी पढ़ें: राम मंदिर के चंदे में घपले की कहानी, क्या सच में चढ़ावे से 'चंपत' हो गए 7 करोड़ रुपए? इस बीच, बीजेपी नेता और तेलंगाना हाई कोर्ट के वकील करुणा सागर ने आरोप लगाया कि शुरुआती जांच के दौरान मामले से जुड़ी अहम जानकारी और डेटा इकट्ठा करने में गड़बड़ी हुई थी। उन्होंने दावा किया कि CBI की शुरुआती जांच में पुलिस की जांच में लापरवाही और कमियों की बात सामने आई थी। सागर ने ANI को बताया, "कलकत्ता हाई कोर्ट ने RG कर अस्पताल रेप और मर्डर केस की सुनवाई करते हुए CBI को मामले की दोबारा जांच के लिए 3 सदस्यों वाली SIT बनाने का निर्देश दिया है... कोर्ट ने यह भी पाया कि मर्डर से जुड़ी अहम जानकारी और डेटा इकट्ठा करने के मामले में पुलिस ने गुमराह किया। CBI की शुरुआती रिपोर्ट में पुलिस की लापरवाही और खराब जांच का ज़िक्र किया गया है।
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