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    Russia-China से इतना डरा अमेरिका? पेंटागन का कैसा बड़ा कबूलनामा

    4 hours from now

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    ईरान और अमेरिका के बीच भीषण टकराव का खतरा बढ़ता जा रहा है। मिडिल ईस्ट में जंग जैसे हालात बन रहे हैं और स्टेट ऑफ होर्मुज में तनाव एकदम चरम पर है। ऐसे हालात में दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश जिसे अपनी ताकत पर बड़ा गुमान है। जिसकी मिसाइलें दुनिया के किसी भी कोने में सटीक वार कर मिनटों में तबाही मचा सकती हैं। वह अमेरिका आज खुद को बचाने में असमर्थ है। अपनी खुद की रक्षा करने में असमर्थ है। यह किसी का विश्लेषण नहीं बल्कि यह खुद अमेरिकी सेना के हेड क्वार्टर पेंटागन का कबूलनामा है जिसमें उसने खुद मान लिया कि अगर दुश्मन ने एडवांस्ड मिसाइलें दाग दी तो अमेरिका के पास उसे रोकने का कोई ठोस तरीका नहीं है। सवाल यह है कि क्या सुपर पावर की चमक अब फीकी पड़ रही है? या फिर दुनिया हथियारों की दौड़ के सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। जहां सबसे पावरफुल देश भी खुद को असुरक्षित महसूस करने लगा है। इसे भी पढ़ें: UAE OPEC Exit Impact India: यूएई क्यों हो रहा OPEC से बाहर, क्‍या हमें खुश होना चाह‍िए?पेंटागन ने यह बात वाशिंगटन में हुई कांग्रेसल हियरिंग के दौरान कबूल की है। अमेरिका की घटती सैन्य क्षमता को स्वीकार करने वाले अधिकारी का नाम है मार्क बेकोविड्स जो स्पेस पॉलिसी के लिए असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ वॉर है। उन्होंने यूएस सीनेट को यह भी बताया कि दुश्मन अब नॉन बैलेस्टिक खतरे को विकसित कर रहे हैं। जिनसे निपटना मुश्किल है। उन्होंने साफ-साफ कहा कि अमेरिका के पास हाइपरसोनिक हथियारों, एडवांस्ड क्रूज मिसाइलों और स्टीलथ ड्रोन जैसे खतरों से बचने का कोई पुख्ता डिफेंस सिस्टम नहीं है। यानी अगर यह हथियार इस्तेमाल होते हैं तो अमेरिका खुद को पूरी तरह सुरक्षित नहीं मान सकता।  दूसरी तरफ स्टील ड्रोन और लो फ्लाइंग क्रूज मिसाइलें रडार से बचकर सीधे टारगेट पर हमला कर सकती हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिका का मौजूदा डिफेंस सिस्टम अभी भी पुराने खतरों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यानी यह सिस्टम मुख्य रूप से बैलेस्टिक मिसाइलों के खिलाफ डिजाइन किया गया था और वह भी छोटे पैमाने के हमलों के लिए लेकिन आज का युद्ध बदल चुका है और अमेरिका का डिफेंस सिस्टम उस बदलाव के साथ कदम नहीं मिला पा रहा। इसे भी पढ़ें: Iran-America टेंशन के बीच तेज हुई कूटनीति, Putin से मिलकर Pakistan पहुंचे ईरानी विदेश मंत्रीअब यहीं से शुरू होता है अमेरिका का नया मास्टर प्लान गोल्डन डोम। एक ऐसा मेगा प्रोजेक्ट जिसे भविष्य का सबसे बड़ा मिसाइल डिफेंस सिस्टम माना जा रहा है। इसका मकसद है जमीन, समुद्र, हवा और अंतरिक्ष। चारों लेयर में एक ऐसा नेटवर्क बनाना जो हर तरह के खतरे को पहचान सके और उसे खत्म कर सके। इस सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल होगा। स्पेस बेस्ड सेंसर होंगे और ऐसे इंटरसेप्टर होंगे जो दुश्मन की मिसाइलों को हवा में ही खत्म कर दें। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सब इतना आसान है? इस प्रोजेक्ट की लागत सुनकर आप चौंक जाएंगे। करीब 175 से 185 बिलियन डॉलर यानी लाखों करोड़ रुपए और यह सिर्फ शुरुआत है। इसे पूरी तरह तैयार होने में 2030 तक का समय लग सकता है। तब तक क्या होगा? क्या अमेरिका इस डिफेंस गैप के साथ ही रहेगा?
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