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    संभल पहुंचे करणी सेना राष्ट्रीय अध्यक्ष:चामुंडा देवी मंदिर में की पूजा, बोले- UGC के खिलाफ दिल्ली में महाआंदोलन 8 को

    10 hours ago

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    डॉ. शेखावत संभल कोतवाली क्षेत्र के मौहल्ला हल्लू सराय स्थित प्राचीन सिद्धपीठ चामुंडा देवी मंदिर में शनिवार रात 08:40 बजे पहुंचे। यहां उन्होंने पूजा-अर्चना की, जहां क्षत्रिय समाज के लोगों ने उनका स्वागत किया।क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत ने UGC एक्ट के विरोध में 8 मार्च को दिल्ली में महाआंदोलन की घोषणा की है। उन्होंने संभल में कहा कि यदि यह कानून वापस नहीं लिया गया तो आगामी चुनावों में इसका असर दिखाई देगा। डॉ. शेखावत ने आरोप लगाया कि यह कानून देश के सामान्य वर्ग के छात्रों और नागरिकों पर थोपा गया है। उनके अनुसार, एक्ट में ऐसी व्यवस्थाएं हैं जिनसे एकतरफा कार्रवाई की आशंका बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि आरोपी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई का प्रावधान है, जबकि शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है। साथ ही, जांच समिति में सामान्य वर्ग को प्रतिनिधित्व न देने का भी आरोप लगाया गया। डॉ. शेखावत ने संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी नागरिकों को समानता और सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार है। उन्होंने दावा किया कि इस एक्ट से इन अधिकारों का हनन हो रहा है। एक्ट को वापस लेने की मांग को लेकर "स्वर्ण समाज समन्वय समिति" का गठन किया गया है। इसके माध्यम से हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में 'आमंत्रण यात्रा' निकाली जा रही है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश बड़े जनआंदोलनों की धरती रहा है और इस बार भी यहां से भारी संख्या में लोग दिल्ली पहुंचेंगे। राज शेखावत ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में इस एक्ट को लेकर मामला विचाराधीन है और फिलहाल इस पर स्टे मिला हुआ है। हालांकि, संगठन की मांग है कि कानून को पूरी तरह निरस्त किया जाए, और जब तक यह नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न सांसदों से संपर्क कर राजनीतिक समर्थन जुटाया जा रहा है। उनका आरोप है कि संसद में बिल पारित होने के समय कई जनप्रतिनिधियों ने विरोध दर्ज नहीं कराया, जिससे समाज में नाराजगी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कानून वापस नहीं लिया गया तो इसका प्रभाव चुनावों में दिखाई देगा। जब तक यह काला कानून, यह यूजीसी रोलबैक नहीं होता, तब तक भाजपा को न हमें मतदान करना है, न हमें वोट देना है, न हमारा परिवार देगा, न हमारे सगे-संबंधी देंगे और न ही हमारे मित्र देंगे। इनका एकमात्र विकल्प है, और वह विकल्प है 'वोट की चोट'। तो हम तो इनको उखाड़ फेंकने के लिए मैदान में उतर चुके हैं। दुख की बात तो यह है कि 140 सांसद हमारे हैं, जो हमने हमारे कोटे से इनको टिकट मिली और हमने जिताकर उन्हें संसद में भेजा। लेकिन जब यह बिल पास हुआ, तो किसी ने आपत्ति दर्ज नहीं की। तो उन सांसदों की भी खैर नहीं है और इस भाजपा की भी खैर नहीं है। इसको दिखाएँगे कि सामान्य वर्ग कितनी बड़ी संख्या में इस भारत देश में आपके साथ था, अब आपके साथ नहीं है।" उन्होंने देशभर के लोगों से 8 मार्च को दिल्ली पहुंचकर आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया और कहा कि यह समान अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई है, जिसे पूरी ताकत से लड़ा जाएगा।
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