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    सुहाग की लंबी उम्र के लिए रखा वट व्रत:ज्येष्ठ अमावस्या पर बरेली के सभी प्रमुख मंदिरों में उमड़ी सुहागिनों की भारी भीड़

    17 hours ago

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    बरेली सहित पूरे देश में आज वट सावित्री का महापर्व मनाया जा रहा है। अपने सुहाग की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर सुहागिन महिलाओं ने आज वट सावित्री का व्रत रखा। सुबह से ही निर्जला रहकर महिलाओं ने वट वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और भगवान से अपने पति की दीर्घायु का वरदान मांगा। बरेली के प्रमुख मंदिरों में उमड़ी सुहागिनों की भीड़ बरेली के मढ़ीनाथ स्थित संतोषी माता मंदिर, गुलाबनगर स्थित गौरी शंकर मंदिर, त्रिवटी नाथ मंदिर, वनखंडी नाथ मंदिर, अलखनाथ मंदिर और तपेश्वरनाथ मंदिर परिसर में सुबह से ही विशेष रौनक देखने को मिली। जिन-जिन स्थानों पर वट वृक्ष मौजूद हैं, वहां सुहागिन महिलाएं पारंपरिक 16 श्रृंगार कर पूजा-अर्चना के लिए पहुंचीं। कलावा बांधकर की सुख-समृद्धि की प्रार्थना पूजा के दौरान महिलाओं ने वट वृक्ष की सात बार परिक्रमा की और वृक्ष के तने पर कलावा (रक्षासूत्र) व पीला धागा लपेटा। सुहाग के अजर-अमर रहने की कामना के साथ महिलाओं ने बरगद देवता को सुहाग की सभी सामग्रियां अर्पित कीं। इस खास मौके पर घरों में विशेष पकवान भी तैयार किए गए। यमराज से पति के प्राण वापस लाने की पौराणिक कथा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सावित्री के पति सत्यवान की मृत्यु हो गई थी, तब उन्होंने यमराज से अपने पति के प्राण वापस पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। सावित्री की निष्ठा से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें जेष्ठ माह की अमावस्या को वट वृक्ष का व्रत करने की बात कही थी, जिसके प्रभाव से सत्यवान पुनः जीवित हो उठे। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। निशा मिश्रा ने साझा की व्रत की महत्ता पूजा स्थल पर मौजूद निशा मिश्रा ने बताया कि आज उन्होंने पूर्ण निष्ठा के साथ वट सावित्री का व्रत रखा है। सुबह से ही निर्जला रहकर वट वृक्ष की विधि-विधान से पूजा की गई और कथा सुनने के बाद ही व्रत खोला गया। इस व्रत को लेकर महिलाओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
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