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    सहारनपुर में अंतिम संस्कार पर हंगामा:ईसाई धर्म अपनाने के बाद दलित परिवार श्मशान में अंतिम संस्कार करना चाहता था

    2 hours ago

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    सहारनपुर के गांव पिंकी में एक बुजुर्ग महिला की मौत के बाद अंतिम संस्कार पर विवाद खड़ा हो गया। दरअसल, महिला ने परिवार समेत ईसाई धर्म अपना लिया था। महिला की मौत के बाद परिजन गांव के श्मशान घाट में उसका अंतिम संस्कार करने ले जा रहे थे। इसी को लेकर गांववालों का महिला के परिजन से विवाद हो गया। लोगों ने शवयात्रा रास्ते में रोक ली और अपने धर्म के मुताबिक अंतिम संस्कार करने की बात पर अड़ गए। उनका कहना था कि परिवार का पहले ही बिरादरी से बहिष्कार किया जा चुका है। आखिरकार गांव की पंचायत में फैसला हुआ कि परिवार दोबार अपने मूल धर्म में लौट आएगा। इसके बाद लोग महिला के अंतिम संस्कार के लिए राजी हो गए। अब पूरा मामला समझिए… गांव पिंकी निवासी मामचंदी पत्नी रामसिंह की गुरुवार रात मौत हो गई। परिजन सुबह शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले जाने लगे। इसी दौरान दलित समाज के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और कहा कि जिन परिवारों ने ईसाई धर्म अपना लिया है, उन्हें अपने धर्म के रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार करना चाहिए। सुबह गांव के मंदिर में पंचायत बुलाई गई। बिरादरी के लोगों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि कोई भी व्यक्ति मामचंदी की अंतिम यात्रा में शामिल नहीं होगा। पंचायत में यह भी मुद्दा उठा कि गांव के कुल 13 परिवारों ने पहले ईसाई धर्म अपना लिया था। पंचायत के दौरान 11 परिवारों ने वापस अपने मूल धर्म में लौटने पर सहमति जताई। इसके बाद माहौल बदला और पंचायत ने फैसला लिया कि शव का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट में ही किया जाएगा। मृत महिला के बड़े बेटे सुरेंद्र ने बताया, “गांव के जिम्मेदार लोगों और बिरादरी के बीच आपसी सहमति बन गई है। अब मां का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान में ही होगा।” हालांकि गांव में अभी दो परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने ईसाई धर्म न छोड़ने की बात कही है। गांव के कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें भी समझा-बुझाकर जल्द वापसी कराई जाएगी।
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