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    सहारनपुर में महापौर समेत 8 अधिकारियों को कोर्ट नोटिस:चौड़ीकरण के नाम पर मकानों को तोड़ने का आरोप, कोर्ट ने कई विभागों से मांगी रिपोर्ट

    2 hours ago

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    सहारनपुर के सर्किट हाउस रोड के चौड़ीकरण के नाम पर अतिक्रमण बताकर मकानों को तोड़े जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पीड़ित पक्ष ने सीधे प्रशासनिक अधिकारियों पर सवाल खड़े करते हुए भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए महापौर, नगर आयुक्त, एसडीएम समेत आठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। हसनपुर निवासी शमशेर सिंह गौतम ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने नियमों की अनदेखी करते हुए उनके और अन्य लोगों के मकानों को अवैध रूप से नुकसान पहुंचाया। उन्होंने इस मामले में महापौर डॉ.अजय कुमार, नगर आयुक्त शिपू गिरि, विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष सूरज पटेल, एसडीएम सदर सुबोध कुमार समेत कई विभागीय अधिकारियों और थाना प्रभारियों को पार्टी बनाया है। पढ़िए...पूरा मामला दरअसल, सर्किट हाउस रोड का चौड़ीकरण लोक निर्माण विभाग द्वारा किया जाना प्रस्तावित है। इस रोड के बीचोंबीच एक रजबहा (नहर) बहता है, जिसके दोनों किनारों पर सड़क बनी हुई है। यह पूरा क्षेत्र सिंचाई विभाग के अधीन आता है। शमशेर सिंह के अनुसार, सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड में रजबहा और दोनों पटरियों की कुल चौड़ाई 55 फीट दर्ज है। इसमें एक ओर 35 फीट और दूसरी ओर 20 फीट की पटरी है। यही जानकारी सूचना का अधिकार (RTI) के तहत भी उन्हें मिली थी। इसके बावजूद, हाल ही में सिंचाई विभाग और अन्य विभागों के अधिकारियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए इस क्षेत्र को अतिक्रमण घोषित कर दिया और जेसीबी मशीनों से मकानों के हिस्से तोड़ दिए। पीड़ितों का आरोप है कि ये कार्रवाई न केवल गलत थी बल्कि जल्दबाजी और नियमों के उल्लंघन में की गई। मामले में सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि जब विभाग ने अतिक्रमण हटाने के लिए 4 अप्रैल तक का समय दिया था, तो 1 अप्रैल को ही कार्रवाई क्यों कर दी गई? पीड़ितों का कहना है कि बिना तय समय का इंतजार किए तीन दिन पहले ही बुलडोजर चलाकर भारी नुकसान पहुंचाया गया। पीड़ित पक्ष का ये भी आरोप है कि उन्होंने पहले हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया था कि प्रभावित लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाए और मौके पर यथास्थिति बनाए रखी जाए। लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई जारी रही, जो न्यायालय की अवमानना के दायरे में भी आ सकती है। भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए न सिर्फ संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है, बल्कि विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिवों से भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
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