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    सहारनपुर में पूर्व ASDC पर मुकदमा:फर्जी वेटिंग लेटर दिया, ढाई करोड़ का वर्क ऑर्डर रद्द; कंपनी ब्लैकलिस्ट

    3 hours ago

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    सहारनपुर में स्किल डेवलपमेंट से जुड़ी एक परियोजना में फर्जी दस्तावेजों का मामला सामने आया है। एक निजी कंपनी ने आरोप लगाया है कि ऑटोमोटिव स्किल्स डेवलपमेंट काउंसिल (ASDC) के एक पूर्व कर्मचारी ने संस्था के नाम पर फर्जी वेटिंग लेटर जारी कर दिया। इसी दस्तावेज के आधार पर सरकारी प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन बाद में जांच में पत्र फर्जी निकलने पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया और करीब ढाई करोड़ रुपए का वर्क ऑर्डर भी रद कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी पूर्व कर्मचारी के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया है। मामला थाना सदर बाजार क्षेत्र का है। डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कराई जानकारी के अनुसार, हसनपुर स्थित स्वानिक वेंचर प्राइवेट लिमिटेड में एक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने की योजना पर काम कर रही थी। कंपनी ने सरकार की निर्धारित प्रक्रिया के तहत डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कराई और जमीन से जुड़े जरूरी कागजात भी पूरे कराए। नियमों के मुताबिक इस तरह की परियोजना के लिए ASDC से वेटिंग कराना जरूरी था। कंपनी का आरोप है कि इसी प्रक्रिया के दौरान उनका संपर्क ASDC के पूर्व कर्मचारी हर्षित उप्पल से हुआ। व्हाट्सएप और ई-मेल के जरिए बातचीत के बाद कंपनी ने वेटिंग के लिए अपने दस्तावेज उन्हें भेज दिए। कंपनी का कहना है- कुछ समय बाद हर्षित उप्पल ने उन्हें ASDC के लेटरहेड पर एक वेटिंग लेटर भेज दिया। आरोप है कि इस पत्र पर संस्था के सीईओ अरिनदम लाहिड़ी के हस्ताक्षर और आधिकारिक मुहर भी अंकित बताई गई। इसी दस्तावेज के आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन विभाग की ओर से कंपनी को लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) जारी कर दिया गया। मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे को आवश्यक दस्तावेज भेजे इसके बाद कंपनी ने सरकारी अनुदान प्राप्त करने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे को आवश्यक दस्तावेज भेजे। दस्तावेजों की जांच के दौरान मंत्रालय ने वेटिंग लेटर की पुष्टि के लिए ASDC से संपर्क किया। यहीं से पूरे मामले का खुलासा हुआ। ASDC की ओर से जवाब दिया गया कि ऐसा कोई वेटिंग लेटर उनके कार्यालय से जारी ही नहीं किया गया। मामला सामने आने के बाद मंत्रालय ने कंपनी को 23 जनवरी 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कंपनी ने 28 जनवरी को अपना जवाब भी दाखिल किया, लेकिन जांच में वेटिंग लेटर फर्जी पाए जाने के बाद 2 मार्च 2026 को कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। इसके साथ ही कंपनी को मिला करीब 2.5 करोड़ रुपये का वर्क ऑर्डर भी निरस्त कर दिया गया। मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी कंपनी के निदेशकों का कहना है- आरोपी द्वारा फर्जी वेटिंग लेटर दिए जाने के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान, मानहानि और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी है। उन्होंने पुलिस को ई-मेल, व्हाट्सएप चैट और अन्य दस्तावेज भी उपलब्ध कराए हैं, जिनके आधार पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर हर्षित उप्पल के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। मामले से जुड़े डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपी से पूछताछ की जा सकती है।
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