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    सलमान खुर्शीद बोले, शंकराचार्य पर आरोप मानना कठिन:कोर्ट सच्चाई सिद्ध करेगा; विदेश नीति पर भी उठाए सवाल

    3 hours ago

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    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद फर्रुखाबाद जनपद के कायमगंज कोतवाली क्षेत्र स्थित पितौरा गांव पहुंचे। यहां उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनीं और विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखी। खुर्शीद ने शंकराचार्य पर लगे आरोपों को मानना कठिन बताया और विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। शंकराचार्य पर लगे आरोपों के संबंध में पूछे जाने पर खुर्शीद ने कहा कि इन आरोपों को मानना बहुत कठिन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसकी सच्चाई क्या है, यह कोई न कोई कोर्ट जरूर सिद्ध करेगा। खुर्शीद ने कहा कि इतने बड़े अस्तित्व और धर्म से जुड़े व्यक्ति पर ऐसे आरोप लगाना मुश्किल है, और इसकी वास्तविकता अदालत द्वारा ही सामने आएगी। यूजीसी से जुड़े एक सवाल पर पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि कई लोग इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब विरोध की क्या आवश्यकता है, जब लोगों ने अपनी बात कह दी है और सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए निर्णय लेने का फैसला किया है। खुर्शीद के अनुसार, यदि सरकार कुछ करती है और उसमें कुछ अनुचित पाया जाता है, तो सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट ही फैसला सुनाते हैं। सुप्रीम कोर्ट इस पर गौर करेगा और विचार के बाद फैसला सुनाएगा। प्रयागराज में बटुकों की पिटाई को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में सलमान खुर्शीद ने कहा कि किसी के साथ भी दुर्व्यवहार गलत है। उन्होंने कहा कि चाहे वह समाज में सम्मानित व्यक्ति हो, या कोई गरीब व्यक्ति, किसी के साथ भी ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। खुर्शीद ने 'रूल ऑफ लॉ' का सम्मान करने पर जोर दिया और कहा कि पुलिस अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी या राजनेता, सभी को कानून का सम्मान करना चाहिए। इस दौरान उन्होंने देश की विदेश नीति पर भी टिप्पणी की। खुर्शीद ने सवाल उठाया कि "हमारी विदेश नीति में नैतिकता है या नहीं।" इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमले को लेकर अखिलेश ने विदेश नीति पर सवाल उठाए इस सवाल के जवाब में पूर्व विदेश मंत्री ने कहा बहुत लोगों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए किस किसको करनी चाहिए इसकी एक लंबी सूची बन सकती है। हम बहुत दिन से कह रहे हैं इस युद्ध से संबंधित नहीं बल्कि पूरे विश्व से संबंधित है इन सब को लेकर हमारा एक प्रश्न है कि हमारी विदेश नीति आखिर क्या है क्या विदेश नीति में नैतिकता भी है या नहीं। विदेश नीति सिर्फ किसी से सौदा करना किसी से सौदे का इंकार करना सिर्फ यहां तक सीमित रह गई है। आज इसको मुखर रूप से सामने आकर देखने का एक और अवसर प्राप्त हुआ है। इसके कारण दुनिया की जो व्यवस्था है उसे पर बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा है। भारत को हमेशा अगुआई करनी होती है शांति दूत बनकर पूरे विश्व के लोगों को संदेश देने का एक दायित्व है। भारत में इसे हमेशा अपनाया है। आज वह देखने को नहीं मिल रहा है इसका हमको बहुत दुख है। अमेरिका द्वारा रूस से 30 दिन के लिए तेल लेने के सवाल पर उन्होंने कहा उन्होंने आज्ञा दी है कि आप यह भी कर सकते हैं। कल हमको वह आज्ञा दें कि आप बोल भी सकते हैं। किस-किस चीज पर वह हमें अपनी आज्ञा देंगे, आदेश देंगे। यह बहुत बड़ा सवाल है हमको यह बताया गया था हम स्वत अपने निर्णय लेते हैं। हमारी विदेश नीति स्वत निर्णय लेने की नीति है। यह क्या स्वत निर्णय लिया है कि आज हम रूस से तेल खरीदेंगे कि हम रूस से नहीं खरीदेंगे। जब वो हमारा बटन दबाएंगे कि हम रूस से खरीद सकते हैं तो खरीदेंगे जब वह बटन को बंद करेंगे तब हम रूस से नहीं खरीदेंगे। यह क्या हमारी विदेश नीति है। 2027 में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर पूर्व विदेश मंत्री ने कहा गठबंधन से लड़ेंगे या नहीं हमको नहीं मालूम उन्होंने कहा गठबंधन हो या न हो हमको तैयार रहना है। हम लोग कांग्रेस पार्टी के सिपाही हैं पार्टी के निर्णय पर ही हमको आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा जिले में कांग्रेस के जो भी कार्यक्रम होते हैं मुझे दुख है मैं उन सभी कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाता हूं। जिले में कांग्रेस का संगठन कमजोर है इस पूछे के सवाल पर उन्होंने कहा संगठन कहीं कमजोर नहीं है। बुरी स्थिति आई विश्व में पूर्व विदेश मंत्री ने कहा अमेरिका इजरायल द्वारा ईरान पर जो हमला किया गया है युद्ध हो रहा है इसका असर पूरे विश्व में है। इसका दूरगामी असर सभी पर पड़ने वाला है। हम सरकार से अपेक्षा करते हैं कि इसमें सरकार को कोई कार्रवाई करनी चाहिए। ताकि विश्व को सही रास्ते पर एक बार फिर से लाया जा सके।
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