Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    समंदर में 'दादागिरी' नहीं चलेगी! संयुक्त राष्ट्र में ईरान के खिलाफ खुलकर उतरा भारत

    3 hours from now

    1

    0

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने खाड़ी देशों और जॉर्डन पर ईरान के हमलों की निंदा करते हुए एक मसौदा प्रस्ताव पारित किया और तेहरान से तत्काल शत्रुता रोकने की मांग की। खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) द्वारा प्रायोजित और 135 अन्य संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों द्वारा सह-प्रायोजित इस प्रस्ताव के पक्ष में यूएनएससी के 15 सदस्यों में से 13 ने मतदान किया। किसी भी देश ने मसौदे के खिलाफ मतदान नहीं किया। यह एकतरफा फैसला था। परिषद में 13 मत पक्ष में पड़े, दो मत अनुपस्थित रहे। प्रस्ताव में ईरान से सभी हमलों को तुरंत रोकने की मांग की गई है और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की उसकी धमकियों की आलोचना की। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में प्रस्ताव को स्पॉन्सर किया है।इसे भी पढ़ें: Iran के बाद Kim टारगेट पर? उधर नॉर्थ कोरिया ने युद्धपोत से दागी क्रूज मिसाइल, बेटी के साथ किम जोंग भी रहे मौजूदवोटिंग और प्रस्ताव का समर्थनअमेरिका की अध्यक्षता वाली 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद ने 13 मतों के साथ इस प्रस्ताव को बुधवार को पारित किया। इसके खिलाफ कोई मत नहीं पड़ा जबकि वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों चीन और रूस ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत ने 130 से अधिक देशों के साथ मिलकर बहरीन के नेतृत्व वाले इस प्रस्ताव का सह-प्रायोजन किया। इस प्रस्ताव को प्रायोजित करने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बांग्लादेश, भूटान, कनाडा, मिस्र, फ्रांस, जर्मनी, यूनान, इटली, जापान, कुवैत, मलेशिया, मालदीव, म्यांमा, न्यूजीलैंड, नॉर्वे, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सिंगापुर, स्पेन, यूक्रेन, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, अमेरिका, यमन और जाम्बिया शामिल हैं। इस प्रस्ताव के कुल 135 सह-प्रायोजक थे। इसमें बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता एवं राजनीतिक स्वतंत्रता के प्रति मजबूत समर्थन को दोहराया गया है। इसमें बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन के क्षेत्रों पर ईरान के भीषण हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा गया है कि इस प्रकार के कृत्य अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं तथा अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। क्या मांग रखी गईइस प्रस्ताव में मांग की गई है कि ईरान जीसीसी देशों एवं जॉर्डन के खिलाफ सभी हमलों को तत्काल रोके और पड़ोसी देशों के खिलाफ छद्म समूहों के इस्तेमाल समेत किसी भी उकसावे वाली या धमकाने वाली कार्रवाई को ‘‘तुरंत और बिना शर्त’’ रोके। इसमें दोहराया गया कि व्यापारिक एवं वाणिज्यिक पोतों के नौवहन अधिकारों और स्वतंत्रता का विशेष रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के आसपास अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप सम्मान किया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव में सदस्य देशों के उस अधिकार को संज्ञान में लिया गया है जिसके तहत वे ‘‘हमलों और उकसावों से अपने पोतों की रक्षा कर सकते हैं।’’ इस प्रस्ताव में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय नौवहन को बंद करने, बाधित करने या किसी भी तरह से हस्तक्षेप करने या बाब अल मंदाब में समुद्री सुरक्षा को खतरे में डालने के उद्देश्य से की गई हर प्रकार की कार्रवाई या धमकी की निंदा की गई। इस प्रस्ताव में कहा गया कि रिहायशी इलाकों पर हमला किया गया, असैन्य साजो सामानों को निशाना बनाया गया और इन हमलों में आम नागरिक हताहत हुए तथा असैन्य इमारतों को नुकसान पहुंचा। प्रस्ताव में उन देशों और लोगों के साथ एकजुटता जताई गई जो हमलों का शिकार हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के प्रतिनिधि राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि इस प्रस्ताव को अपनाया जाना ‘‘ईरानी शासन की क्रूरता की निंदा करने वाला खाड़ी देशों का सीधा और स्पष्ट बयान है। इसे भी पढ़ें: Trump शुरू करने वाले थे 'ऑपरेशन प्योंगयांग', किम ने निकाल दिया 5000 टन का युद्धपोत, अमेरिका के छूटे पसीनेअमेरिका ने क्या कहाईरानी शासन की आम नागरिकों और असैन्य अवसंरचना को निशाना बनाने की प्रवृत्ति निंदनीय है।’’ वाल्ट्ज ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी टीम ने कूटनीतिक बातचीत की हर कोशिश की। वाल्ट्ज ने कहा, ‘‘उन्होंने शांति की कोशिश की और 47 वर्षों की शत्रुता एवं हमलों को खत्म करने का प्रयास किया लेकिन ईरान ने केवल और अधिक मिसाइल, और अधिक ड्रोन तथा परमाणु प्रलय की ओर अग्रसर होने का रास्ता खोजा। राष्ट्रपति ट्रंप ने लक्ष्मण रेखा खींच दी है। ईरान ने इसे एक बार फिर पार किया और अब दुनिया इसके परिणामों का सामना कर रही है।’’ वाल्ट्ज ने प्रस्ताव का सह-प्रायोजन करने वाले 135 देशों के प्रति आभार जताया। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत अमीर सईद इरावानी ने परिषद की इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण और अवैध बताते हुए कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है तथा यह ऐसी कार्रवाई है जो आक्रामकता एवं शांति भंग करने के कृत्यों को नियंत्रित करने वाले स्थापित सिद्धांतों की पूर्णतय: अवहेलना करती है। उन्होंने कहा कि कोई भूल न करे: आज ईरान है; कल कोई और संप्रभु देश हो सकता है। इरावानी ने कहा कि 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजराइल के लगातार सैन्य हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित 1,348 से अधिक आम नागरिक मारे गए हैं, 17,000 से अधिक आम नागरिक घायल हुए हैं और 19,734 असैन्य स्थलों को नष्ट या क्षतिग्रस्त किया गया है। ईरानी दूत ने कहा, ‘‘इन हमलों का पैमाना और उनका व्यवस्थित स्वरूप युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ स्पष्ट रूप से अपराध है।’’ इरावानी ने कहा कि ईरान फारस की खाड़ी क्षेत्र के देशों के साथ पारस्परिक सम्मान, अच्छे पड़ोसी होने के सिद्धांत और एक-दूसरे की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए ‘‘प्रतिबद्ध’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘क्षेत्र में अमेरिका के सैन्य अड्डों और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की ईरान की रक्षात्मक कार्रवाई किसी भी तरह से क्षेत्रीय देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ नहीं है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Petrol की कीमतों पर Donald Trump की बड़ी चाल! अमेरिका खोलेगा अपना Strategic Petroleum Reserve, ईरान युद्ध के बीच राहत की तैयारी
    Next Article
    रक्षा गुप्ता संग खेसारी लाल की केमिस्ट्री ने मचाया धमाल, नया गाना ओठलाली पs हुआ रिलीज

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment