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    सुनील पांडे ने कहा- जुनैद की परफॉर्मेंस प्रभावशाली लगी:राम संपत बोले- आमिर खान के साथ काम करने के लिए सच्चाई और मेहनत सबसे जरूरी है

    1 hour ago

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    फिल्म ‘एक दिन’ को लेकर डायरेक्टर सुनील पांडे और म्यूजिक कंपोजर राम संपत ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। दोनों ने बताया कि यह फिल्म उनके लिए सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक भावनात्मक सफर है। सुनील के मुताबिक, उन्होंने ट्रेंड्स की बजाय कहानी की सच्चाई पर भरोसा किया, वहीं राम संपत ने इसे अपने करियर का माइलस्टोन बताया। उन्होंने कहा कि आमिर खान के साथ काम करने के लिए सच्चाई और मेहनत सबसे जरूरी है। फिल्म को आमिर खान प्रोड्यूस की है, जबकि जुनैद खान और साईं पल्लवी इसमें लीड रोल में हैं। सवाल: सुनील, आपके लिए फिल्म ‘एक दिन’ क्या है? जवाब/ सुनील पांडे: ‘एक दिन’ मेरे लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि एक एहसास है। यह एक ऐसी भावना है जिसे शब्दों में पूरी तरह बयां करना मुश्किल है। जब मैंने इस कहानी को पहली बार पढ़ा, तभी से यह मेरे अंदर बस गई। यह फिल्म मेरे दिल के बहुत करीब है और मेरे लिए एक बहुत बड़ी चीज है। मैं इसे सिर्फ कहानी या प्रोजेक्ट की तरह नहीं देखता, बल्कि एक अनुभव की तरह महसूस करता हूं। सवाल: राम, आपके लिए ‘एक दिन’ क्या मायने रखती है? जवाब/ राम संपत: मेरे लिए ‘एक दिन’ एक खास सफर और एक महत्वपूर्ण मुकाम है। मैंने अपने करियर में पहली बार किसी लव स्टोरी पर काम किया है, इसलिए इसका महत्व और बढ़ जाता है। सवाल: इस फिल्म से आपको एक कंपोजर के तौर पर क्या हासिल हुआ? जवाब/ राम संपत: हर संगीतकार का सपना होता है कि उसे एक खूबसूरत प्रेम कहानी पर काम करने का मौका मिले। इस फिल्म में मुझे वो मौका मिला और मैंने अपनी कई इच्छाएं पूरी कीं। हमारे देश के महान संगीतकार जैसे पंचम दा, मदन मोहन या नौशाद साहब की पहचान उनकी लव स्टोरीज के संगीत से बनी है। उसी तरह, ‘एक दिन’ मेरे लिए एक माइलस्टोन की तरह है, जहां मैंने अपने अंदर के कई संगीत भावों को खुलकर व्यक्त किया। सवाल: सुनील, आज के एक्शन और मसाला दौर में इतना सॉफ्ट और मासूम किरदार दिखाना रिस्क नहीं था? जवाब/ सुनील पांडे: देखिए, मेरे लिए सबसे जरूरी चीज कहानी की सच्चाई है। जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी, तो मुझे यह कहानी बहुत ईमानदार और खूबसूरत लगी। उस समय मैंने यह नहीं सोचा कि आजकल क्या ट्रेंड चल रहा है या दर्शक क्या ज्यादा देखना पसंद कर रहे हैं। सवाल: क्या आपने मार्केट ट्रेंड को बिल्कुल नजरअंदाज किया? जवाब/ सुनील पांडे: हां, बिल्कुल। फिल्म बनाते समय मेरा पूरा फोकस इस बात पर था कि जो कहानी मुझे कागज पर पसंद आई, क्या मैं उसे उसी ईमानदारी से स्क्रीन पर ला पा रहा हूं या नहीं। ट्रेंड्स बदलते रहते हैं, लेकिन अच्छी कहानी हमेशा असर छोड़ती है। सवाल: जुनैद को इस किरदार के लिए क्यों चुना? जवाब/ सुनील पांडे: जुनैद इस किरदार में बिल्कुल फिट बैठे। उनके अंदर वही सादगी और मासूमियत है, जो इस किरदार की जरूरत थी। उन्होंने जिस तरह से परफॉर्म किया, उसमें एक सच्चाई और ईमानदारी दिखती है, और मेरे लिए वही सबसे अहम था। सवाल: राम, फिल्म का संगीत इतना इमोशनल और साइलेंस में भी असरदार कैसे बना? जवाब/ राम संपत: हम जब भी संगीत बनाते हैं, तो सबसे पहले स्क्रिप्ट को समझते हैं। हमारा मकसद होता है कि संगीत कहानी के साथ जुड़ा हुआ लगे, अलग से नहीं। अगर म्यूजिक स्क्रीनप्ले के साथ मिलकर चलता है, तभी वह दिल तक पहुंचता है। सवाल: गानों को तैयार करने की प्रक्रिया कैसी रही? जवाब/ राम संपत: हमने हर गाने पर बहुत मेहनत की। एक-एक गाने के कई वर्जन बनाए, अलग-अलग धुनें और आइडियाज ट्राई किए। उसके बाद बैठकर यह तय किया कि कौन सा गाना सबसे सही लग रहा है। यह एक लंबी लेकिन बहुत संतोष देने वाली प्रक्रिया थी। सवाल: इरशाद कामिल के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब/ राम संपत: इरशाद कामिल जैसे लिरिसिस्ट के साथ काम करना बहुत खास होता है। वो उन भावनाओं को शब्द देते हैं, जिन्हें हम सीधे कह नहीं पाते। उनकी लिखी लाइनों में गहराई और सादगी दोनों होती है, जो इस फिल्म के म्यूजिक को और मजबूत बनाती है। सवाल: आज के दौर में 90 के दशक जैसा यादगार और दिल में बसने वाला संगीत बनाना कितना चुनौतीपूर्ण है? जवाब/ राम संपत: सच कहूं तो हम ट्रेंड्स के बारे में ज्यादा नहीं सोचते। आजकल बहुत सारा म्यूजिक ट्रेंड और स्टाइल के हिसाब से बनता है, लेकिन हम ईमानदारी और आत्मा वाले संगीत में विश्वास रखते हैं। सवाल: फिल्म के संगीत में सादगी क्यों रखी गई? जवाब/ राम संपत: हमने जानबूझकर संगीत को सरल रखा, ताकि कहानी और भावनाएं साफ-साफ सामने आएं। कई बार ऐसा हुआ कि मैं कुछ म्यूजिकल एलिमेंट जोड़ता था और सुनील उसे हटा देते थे। आखिर में जो बना, वह बहुत ही सादा लेकिन गहराई से भरा हुआ संगीत है, जैसे सिर्फ पियानो या गिटार के साथ। सवाल: सुनील, राम के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब/ सुनील पांडे: राम सिर्फ एक बेहतरीन म्यूजिशियन ही नहीं, बल्कि एक शानदार स्टोरीटेलर भी हैं। मैंने उन्हें कभी यह नहीं बताया कि मुझे कैसा म्यूजिक चाहिए। मैंने सिर्फ कहानी, किरदार और सिचुएशन के बारे में बात की, और उन्होंने उसे अपने तरीके से संगीत में ढाल दिया। उनकी यही समझ इस फिल्म के म्यूजिक को खास बनाती है। सवाल: आप दोनों के बीच काम करते समय तालमेल कैसे बनता है? जवाब/ राम संपत: हम एक-दूसरे की पसंद और काम करने के तरीके को समझते हैं। जैसे सुनील अलग-अलग समय पर अलग तरह का संगीत सुनते हैं। कुछ गाने वो रात में सुनना पसंद करते हैं, कुछ दिन में। इन छोटी-छोटी बातों को समझकर हम म्यूजिक को और बेहतर बना पाते हैं। सवाल: आमिर खान के साथ काम करना कितना आसान या मुश्किल है? जवाब/ सुनील पांडे: वो बहुत समझदार और सहयोगी हैं। अगर आप अपनी बात सही तरीके से रखते हैं और उसमें दम होता है, तो वो जरूर सुनते हैं और मान भी जाते हैं। सवाल: राम, आप का आमिर के साथ काम करने का असली अनुभव क्या रहा? जवाब/ राम संपत: अगर आप मेहनती हैं और ईमानदारी से काम करते हैं, तो उनके साथ काम करना बहुत आसान है। लेकिन अगर आप शॉर्टकट लेने की कोशिश करेंगे, तो वो तुरंत पकड़ लेते हैं। उनके साथ काम करने के लिए सच्चाई और मेहनत सबसे जरूरी है।
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