Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    सांप-सीढ़ी खेल जैन धर्म की देन:भगवान ऋषभदेव ने सिखाई थी खेती, कला और सामाजिक व्यवस्था

    5 hours ago

    1

    0

    कानपुर के सीएसजेएम विश्वविद्यालय में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में यह दिलचस्प जानकारी सामने आई है कि बचपन में खेला जाने वाला सांप-सीढ़ी का खेल वास्तव में जैन धर्म की देन है। 'तीर्थंकर ऋषभदेव: उनका सामाजिक-सांस्कृतिक अवदान' विषय पर केंद्रित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में विद्वानों ने भगवान ऋषभदेव के जीवन और उनकी शिक्षाओं के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी में प्रति-कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने बताया कि भारतीय संस्कृति में 'असि' (शस्त्र), 'मसि' (लेखन) और 'कृषि' (खेती) की शुरुआत भगवान ऋषभदेव ने ही की थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जैन धर्म का योगदान केवल अध्यात्म तक सीमित नहीं है। बल्कि देश की कला, संस्कृति और वास्तुकला में भी इसकी गहरी छाप स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। डॉ. नीता दवे जैन ने भगवान ऋषभदेव को भारतीय सभ्यता का पहला शिल्पी बताया। उनके अनुसार, आदिनाथ ने ही समाज की व्यवस्था का निर्माण किया और संयम से जीवन जीने का मार्ग सिखाया। मुख्य वक्ता डॉ. धर्मेन्द्र कुमार जैन ने उल्लेख किया कि योगेश्वर श्रीकृष्ण और भगवान आदिनाथ की शिक्षाएं कर्म और धर्म के संतुलन पर समान रूप से जोर देती हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने भगवान ऋषभदेव की शिक्षाओं को आज के दौर में भी प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी दर्शन तभी आगे बढ़ता है जब वह आम लोगों के लिए सुलभ हो। कुलपति ने नई पीढ़ी को इस ज्ञान से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि वे भविष्य में इन शिक्षाओं को आगे बढ़ा सकें। सांप-सीढ़ी के जरिए समझाया जीवन का दर्शन कार्यक्रम में पहुंचीं दीक्षा जैन ने यूनिवर्सिटी की इस पहल को सराहा। उन्होंने बताया कि सांप-सीढ़ी का खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जैन धर्म के कर्म सिद्धांतों को समझाने का एक तरीका था। इस दौरान नेपाल से आए नीरज दाहाल समेत कई विद्वानों ने भी अपने विचार रखे। दूसरे सत्र में सात शोध छात्रों ने अपने पेपर पढ़कर जैन दर्शन के आधुनिक महत्व को समझाया।
    Click here to Read more
    Prev Article
    दर्जनों वाहनों के चालान काटे गए:बागपत के गौरीपुर मोड़ पर परिवहन विभाग का चेकिंग अभियान
    Next Article
    वैश्विक हालात का मेरठ के उद्योगों पर पड़ा असर:गैस की कमी, महंगा सी-फ्रेट और शिपमेंट में देरी से MSME परेशान

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment